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सीहमा खंड के 30 गांवों में अभी फंसे हैं यूपी के 900 मजदूर

Thu, 14 May 2020 10:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 10:42 PM IST
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900 workers of UP are trapped in 30 villages of Sihama block
नारनौल से ट्रेन में सवार होते बिहार के मजदूर। - फोटो : Narnol
बाबू जी हमें अब बस हमारे प्रदेश यूपी पहुंचा दो। हम आपके आगे हाथ जोड़कर विनती करते हैं। यह शब्द सीहमा में यूपी के प्रवासी मजदूर मेवालाल, जोधा सिंह, आशाराम, अशोक व मौजीराम जिला लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश ने एडवोकेट हेमंत सीहमा के आवास पर पहुंच कर कही।
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मजदूरों ने बताया कि अब उनके पास न तो मजदूरी का काम है और ना ही पैसा और राशन भी एक दिन का बचा है। वे अपने गृह प्रदेश पैदल जाने को तैयार है। लेकिन, पुलिस उन्हें वापस रास्तों से भेज देती है। मजदूरों की व्यथा सुनकर एडवोकेट हेमंत ने उन्हें जल्द सूखा राशन देने का हामी भरी व उनकी समस्या जिला प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंचाने का वायदा किया। एडवोकेट हेमंत सीहमा ने खंड कार्यालय पहुंचकर सामाजिक शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी अभय सिंह को सीहमा खंड के प्रवासी मजदूरों को जल्द उनके गृह राज्य यूपी भेजने का प्रबंध करने का आग्रह किया। पंचायत अधिकारी अभय सिंह ने बताया कि सीहमा के 30 गांवों में से मुंडियाखेड़ा, दोंगडा अहीर, दोंगडा जाट, कलवाड़ी, सिलारपुर, अटाली में से गत दिनों 246 मजदूरों को उनके गृह राज्य के जिलों में बस द्वारा भेजा गया था। अभी भी खंड के गांव सीहमा में 150, सुराणा में 40, दुबलाना में 70, कलवाड़ी में 25, नीरपुर में 45, फैजाबाद में 20, अकबरपुर में 60, गुवानी में 70, सलुनी में 30, हुडीना में 25, कलवाड़ी में 25, जाट गुवाणा में 40 सहित सीहमा ब्लाक के 30 गांवों में 900 के लगभग यूपी के जिला संभल, अमरोहा, हापुड़, झांसी, लखीमपुर व पीलीभीत सहित विभिन्न जिलों के प्रवासी मजदूर यहां ठहरे हैं।
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लॉकडाउन से पूर्व आये थे प्रवासी मजदूर
यूपी, बिहार व एमपी के मजदूर हरियाणा और पंजाब में हर साल फसल कटाई व विभिन्न कार्यों की मजदूरी व रोजी रोटी कमाने के लिए यहां आते हैं। इस बार भी कई ठेकेदार इन्हें लॉकडाउन से पूर्व अच्छी कमाई मजदूरी से कराने का वायदा करके यहां बुलाया था। सरसों-गेहूं की फसल कटाई से कुछ मजदूरों के ठेकेदारों ने मोटा मुनाफा भी कमाया। लेकिन, फसली काम खत्म होते ही मजदूरों के कुछ ठेकेदार गायब हो गए हैं और मजदूरों ने जो लॉकडाउन से पूर्व खून पसीने से कमाई की थी वह भी अब काम नही मिलने के कारण खर्च हो गई है। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि उन्हें अब तक प्रशासन से खाने का एक दाना भी नहीं मिला है। गांवों में कुछ समाजसेवी लोग व किसान ही उनकी चिंता करके दाना-पानी और मजदूरी देने का कार्य कर रहे हैं।
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