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हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब बंद होंगे जिले के 72 स्टोन क्रशर
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नारनौल व नांगल चौधरी क्रशर जोन में अब हाईकोर्ट ने 72 स्टोन क्रशरों को बंद करने आदेश दिए हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि इन क्रशरों को बंद पर जो स्टे लगाया था वह 10 अगस्त तक जारी रहेगा मगर इसके बाद उसको खत्म समझा जाए और इसके बाद स्टे की याचिका को खारिज किया जाता है।
गौरतलब है कि एनजीटी ने तीन दिसंबर 2020 के महेंद्रगढ़ जिले के 72 स्टोन क्रशरों के बंद करने के आदेश दिए थे। एनजीटी ने कहा था कि क्रशरों के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है तथा नियमों को ताक पर रखकर ये क्रशर लगाएं गए हैं। इस फैसले के बाद हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जब क्रशर संचालकों को मई 2021 में क्रशरों की एनओसी रद्द करने के पत्र जारी करने शुरू किए तो उसके बाद गांव धोलेडा-बीगोपुर के 7 क्रशरों के संचालकों ने एनओसी रद्द करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
क्रशर संचालक 28 मई को हाईकोर्ट पहुंचे थे जिस पर 11 जून 2021 मुकर्रर की गई थी और 11 जून को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एक बेंच ने 7 क्रशरों को कुछ राहत देते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा एनओसी रद्द करने के पत्रों पर कुछ समय के लिए स्टे दे दिया था और सुनवाई के लिए 12 जुलाई 2021 निर्धारित की गई थी और मामला स्थानांतरित होकर चीफ जस्टिस की बेंच में पहुंच गया था।
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चीफ जस्टिस रविशंकर झा व अरुण पल्ली की बेंच ने 12 जुलाई 2021 को सुनवाई करते हुए क्रशर संचालकों की याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस अरुण पल्ली व चीफ जस्टिस रविशंकर झा ने फैसला सुनाया कि हाईकोर्ट की एक जूनियर बेंच के द्वारा हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एनओसी रद्द करने के पत्र पर जो 7 क्रशरों को कुछ राहत व स्टे दी गई थी, वो स्टे बरकरार रहने की बजाय सिर्फ 10 अगस्त 2021 तक जारी रहेगी लेकिन याचिका खारिज की जाती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच आदेश में कहा कि जब पूरा मामला एनजीटी के अंतर्गत चल रहा है तो इस प्रक्रिया में हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा व इसके आगे की सारी प्रक्रिया की सुनवाई एनजीटी ही करेगा।
गौरतलब है कि महेंद्रगढ़ व विशेष तौर पर नारनौल नांगल चौधरी क्षेत्र के सैकड़ों स्टोन क्रशर व इससे हो रहे पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ पर्यावरणविद व सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर तेजपाल यादव कई सालों से आंदोलन कर रहे हैं। विधायकों, जनप्रतिनिधियों, नेताओं व भाजपा सरकार तक शिकायत भेजी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तेजपाल यादव ने 3 साल पहले एनजीटी का रुख अपनाया था और एनजीटी में एक लंबी लड़ाई लड़ी गई जिसमें 24 जुलाई 2019 को महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशरों को तुरंत बंद करने के आदेश हुए थे। उसके बाद स्टोन क्रशर संचालक 24 जुलाई 2019 के एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। सुप्रीम कोर्ट में तेजपाल यादव की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने पैरवी की और उनकी मजबूत पैरवी के चलते 2 नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट को यह मामला वापस एनजीटी को सौंपना पड़ा और एनजीटी में मामला वापस आने के बाद 3 दिसंबर 2020 को एनजीटी ने अपने 24 जुलाई 2019 के आदेश को दोहराते हुए महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशरों के बंद करने के आदेश दिए थे। पर्यावरण प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए संघर्ष रहेगा जारी
इंजीनियर तेजपाल यादव ने कहा कि स्टोन क्रशर संचालक सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी दोनों जगह अपनी लड़ाई पहले ही हार चुके हैं। लिहाजा एनजीटी के 3 दिसंबर 2020 के महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशरों के बंद करने के आदेश के 5 माह बाद हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा एनओसी रद्द करने के पत्र जारी करने व इसके तुरंत बाद कुछ 7 क्रशर संचालकों का हाईकोर्ट चले जाना, प्रदेश सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों, क्रशर संचालकों तीनों की बड़े स्तर की मिलीभगत की कड़ी साबित करता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता को पर्यावरण प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए हमारा संघर्ष अपने अंतिम पड़ाव पार करके अंतिम विजय प्राप्त करके ही दम लेगा।
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गौरतलब है कि एनजीटी ने तीन दिसंबर 2020 के महेंद्रगढ़ जिले के 72 स्टोन क्रशरों के बंद करने के आदेश दिए थे। एनजीटी ने कहा था कि क्रशरों के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है तथा नियमों को ताक पर रखकर ये क्रशर लगाएं गए हैं। इस फैसले के बाद हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जब क्रशर संचालकों को मई 2021 में क्रशरों की एनओसी रद्द करने के पत्र जारी करने शुरू किए तो उसके बाद गांव धोलेडा-बीगोपुर के 7 क्रशरों के संचालकों ने एनओसी रद्द करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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क्रशर संचालक 28 मई को हाईकोर्ट पहुंचे थे जिस पर 11 जून 2021 मुकर्रर की गई थी और 11 जून को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एक बेंच ने 7 क्रशरों को कुछ राहत देते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा एनओसी रद्द करने के पत्रों पर कुछ समय के लिए स्टे दे दिया था और सुनवाई के लिए 12 जुलाई 2021 निर्धारित की गई थी और मामला स्थानांतरित होकर चीफ जस्टिस की बेंच में पहुंच गया था।
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चीफ जस्टिस रविशंकर झा व अरुण पल्ली की बेंच ने 12 जुलाई 2021 को सुनवाई करते हुए क्रशर संचालकों की याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस अरुण पल्ली व चीफ जस्टिस रविशंकर झा ने फैसला सुनाया कि हाईकोर्ट की एक जूनियर बेंच के द्वारा हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एनओसी रद्द करने के पत्र पर जो 7 क्रशरों को कुछ राहत व स्टे दी गई थी, वो स्टे बरकरार रहने की बजाय सिर्फ 10 अगस्त 2021 तक जारी रहेगी लेकिन याचिका खारिज की जाती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच आदेश में कहा कि जब पूरा मामला एनजीटी के अंतर्गत चल रहा है तो इस प्रक्रिया में हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा व इसके आगे की सारी प्रक्रिया की सुनवाई एनजीटी ही करेगा।
गौरतलब है कि महेंद्रगढ़ व विशेष तौर पर नारनौल नांगल चौधरी क्षेत्र के सैकड़ों स्टोन क्रशर व इससे हो रहे पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ पर्यावरणविद व सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर तेजपाल यादव कई सालों से आंदोलन कर रहे हैं। विधायकों, जनप्रतिनिधियों, नेताओं व भाजपा सरकार तक शिकायत भेजी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तेजपाल यादव ने 3 साल पहले एनजीटी का रुख अपनाया था और एनजीटी में एक लंबी लड़ाई लड़ी गई जिसमें 24 जुलाई 2019 को महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशरों को तुरंत बंद करने के आदेश हुए थे। उसके बाद स्टोन क्रशर संचालक 24 जुलाई 2019 के एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। सुप्रीम कोर्ट में तेजपाल यादव की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने पैरवी की और उनकी मजबूत पैरवी के चलते 2 नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट को यह मामला वापस एनजीटी को सौंपना पड़ा और एनजीटी में मामला वापस आने के बाद 3 दिसंबर 2020 को एनजीटी ने अपने 24 जुलाई 2019 के आदेश को दोहराते हुए महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशरों के बंद करने के आदेश दिए थे। पर्यावरण प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए संघर्ष रहेगा जारी
इंजीनियर तेजपाल यादव ने कहा कि स्टोन क्रशर संचालक सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी दोनों जगह अपनी लड़ाई पहले ही हार चुके हैं। लिहाजा एनजीटी के 3 दिसंबर 2020 के महेंद्रगढ़ जिले के 72 अवैध स्टोन क्रशरों के बंद करने के आदेश के 5 माह बाद हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा एनओसी रद्द करने के पत्र जारी करने व इसके तुरंत बाद कुछ 7 क्रशर संचालकों का हाईकोर्ट चले जाना, प्रदेश सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों, क्रशर संचालकों तीनों की बड़े स्तर की मिलीभगत की कड़ी साबित करता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता को पर्यावरण प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए हमारा संघर्ष अपने अंतिम पड़ाव पार करके अंतिम विजय प्राप्त करके ही दम लेगा।