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हैवी ब्लास्टिंग से मकान क्षतिग्रस्त डस्ट से स्वास्थ्य हुआ प्रभावित, धरने पर बैठे पीड़ित ग्रामीण
Updated Tue, 22 May 2018 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी (नारनौल)।
बखरीजा माइंस में हैवी ब्लास्टिंग होने से मेघोत बींजा के करीब दो दर्जन मकानों में दरार पड़ गई। समस्या से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया। बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारण सोमवार सुबह ग्रामीणों ने धरना शुरू कर प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने बताया कि मेघोत बींजा गांव पहाड़ के इस तरफ है। दूसरी ओर बखरीजा गांव की सीमा तथा पहाड़ है। इसमें पत्थर खनन के लिए लीज पर छोड़ दिया गया। विभिन्न शर्तें पूरी करने का शपथ पत्र देकर संचालक खनन करने में जुटा हुआ है। नियमानुसार क्रेशर या माइंस संचालक को पानी का छिड़काव, सुरक्षा के प्रबंध, पौध रोपण, प्रभावित गांवों के विकास कार्यों में सहयोग करना आदि मापदंड पूरे करने होंगे, लेकिन बखरीजा, गांगोताना जोन की माइंस व क्रेशरों पर नियमों की सरेआम अवहेलना हो रही है। 140 फीट गहरी खदान में हैवी ब्लास्टिंग होती है। इसके करीब 300 मीटर की दूरी पर मेघोत बींजा गांव है।
रविवार रात करीब 11 बजे हुई ब्लास्टिंग से मकानों में कंपन हो गई। गिरने की संभावना के चलते मकान मालिक तुरंत बाहर निकल गए। उन्होंने माइंस विभाग के कर्मचारियों से संपर्क किया, किंतु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इसी दौरान तीन ब्लास्टिंग और की गई। इससे भयभीत ग्रामीण चार घंटे तक घरों में नहीं घुसे। इस ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों ने सुबह आठ बजे मीटिंग की, जिसमें रोजाना एक घंटे धरने पर बैठने का निर्णय लिया। 10 बजे बखरीजा माइंस के पास टेंट लगाकर महिलाओं और पुरुषों ने धरना आरंभ कर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या से प्रशासन पूरी तरह वाकिफ है, लेकिन सत्तासीन नेताओं का दबाव होने के कारण कार्रवाई नहीं कर रहा। इसका परिणाम भाजपा को चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
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ब्लास्टिंग से नहीं कोई लेनादेना : वासुदेव
जिला खनन अधिकारी वासुदेव ने बताया कि डस्ट की कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। ब्लास्टिंग से खनन विभाग का कोई लेनादेना नहीं है। गाजियाबाद कार्यालय से ब्लास्टिंग की अनुमति मिलती है। माइंस विभाग केवल मापदंडों का निरीक्षण करता है। बखरीजा माइंस सभी मापदंडों को पूरा कर रही है।
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नांगल चौधरी (नारनौल)।
बखरीजा माइंस में हैवी ब्लास्टिंग होने से मेघोत बींजा के करीब दो दर्जन मकानों में दरार पड़ गई। समस्या से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया। बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारण सोमवार सुबह ग्रामीणों ने धरना शुरू कर प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने बताया कि मेघोत बींजा गांव पहाड़ के इस तरफ है। दूसरी ओर बखरीजा गांव की सीमा तथा पहाड़ है। इसमें पत्थर खनन के लिए लीज पर छोड़ दिया गया। विभिन्न शर्तें पूरी करने का शपथ पत्र देकर संचालक खनन करने में जुटा हुआ है। नियमानुसार क्रेशर या माइंस संचालक को पानी का छिड़काव, सुरक्षा के प्रबंध, पौध रोपण, प्रभावित गांवों के विकास कार्यों में सहयोग करना आदि मापदंड पूरे करने होंगे, लेकिन बखरीजा, गांगोताना जोन की माइंस व क्रेशरों पर नियमों की सरेआम अवहेलना हो रही है। 140 फीट गहरी खदान में हैवी ब्लास्टिंग होती है। इसके करीब 300 मीटर की दूरी पर मेघोत बींजा गांव है।
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रविवार रात करीब 11 बजे हुई ब्लास्टिंग से मकानों में कंपन हो गई। गिरने की संभावना के चलते मकान मालिक तुरंत बाहर निकल गए। उन्होंने माइंस विभाग के कर्मचारियों से संपर्क किया, किंतु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इसी दौरान तीन ब्लास्टिंग और की गई। इससे भयभीत ग्रामीण चार घंटे तक घरों में नहीं घुसे। इस ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों ने सुबह आठ बजे मीटिंग की, जिसमें रोजाना एक घंटे धरने पर बैठने का निर्णय लिया। 10 बजे बखरीजा माइंस के पास टेंट लगाकर महिलाओं और पुरुषों ने धरना आरंभ कर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या से प्रशासन पूरी तरह वाकिफ है, लेकिन सत्तासीन नेताओं का दबाव होने के कारण कार्रवाई नहीं कर रहा। इसका परिणाम भाजपा को चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
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ब्लास्टिंग से नहीं कोई लेनादेना : वासुदेव
जिला खनन अधिकारी वासुदेव ने बताया कि डस्ट की कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। ब्लास्टिंग से खनन विभाग का कोई लेनादेना नहीं है। गाजियाबाद कार्यालय से ब्लास्टिंग की अनुमति मिलती है। माइंस विभाग केवल मापदंडों का निरीक्षण करता है। बखरीजा माइंस सभी मापदंडों को पूरा कर रही है।