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दो घंटे थमी कलम तो मरीजों की ‘धड़कन बढ़ी’
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:05 AM IST
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दो घंटे थमी कलम तो मरीजों की ‘धड़कन बढ़ी’
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। चिकित्सकों की कमी को दूर करने समेत अनेक मांगों को लेकर सोमवार को जिले भर के सरकारी चिकित्सक सुबह दो घंटे की हड़ताल पर रहे। यह हड़ताल हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर की गई। हड़ताल के कारण जिले के नागरिक अस्पताल में सैकड़ों मरीजों को परेशानी हुई। हालात यह रही कि दो घंटे की हड़ताल में ही नागरिक अस्पताल में मरीजों की लंबी लाइन लग गई। इनमें धक्का मुक्की तक हुई। सुबह दस बजे तक नागरिक अस्पताल में 450 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया था। जिला के करीब 23 सरकारी चिकित्सक इस हड़ताल में शामिल हुए।
जिले भर के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की सुबह आठ से लेकर 10 बजे तक कलम डाउन हड़ताल रही। इनमें नागरिक अस्पताल के साथ सीएचसी और पीएचसी के चिकित्सक भी शामिल हुए। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गईं। दो घंटे की हड़ताल से ही मरीज परेशान हो उठे। हड़ताल के चलते चिकित्सकों के कक्षों के सामने मरीजों की लाइनें लग गई। दूसरी तरफ चिकित्सकों ने अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष व्यक्त किया। सभी चिकित्सक आपातकालीन विभाग में एकत्रित हुए और बैठक की। इसके बाद सोमवार को चिकित्सकों ने सुबह आठ बजे से लेकर 10 बजे तक हड़ताल रखी।
चिकित्सकों ने की मांगों को लेकर बैठक
जिले भर के सरकारी चिकित्सक स्थानीय नागरिक अस्पताल में आयोजित बैठक में शामिल हुए। बैठक को संबोधित करते हरियाणा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. आदित्य यादव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की पीजी पॉलिसी में 30 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। इसका लाभ सभी चिकित्सकों को मिलना चाहिए। दस वर्ष की नौकरी करने के बाद सभी चिकित्सकों को एसएमओ का पद स्वत: ही दिया जाए, पीजी स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को उनके भत्ते अलग से मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है। इस समय पूरे प्रदेश में मात्र 1900 चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों पर कार्य का अतिरिक्त दबाव है। कई बार चिकित्सक छुट्टी नहीं मिलने के कारण घर में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाते। उन्होंने बताया कि यदि चिकित्सक किसी साथी के साथ अपना एडजेस्टमेंट कर छुट्टी पर चला भी जाता है तो उसके साथी को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है।
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कई बार लगाई जा चुकी है सरकार से गुहार
वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सकों के खाली पदों को भरने के लिए सरकार से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन सरकार का रवैया ठीक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सकों की हड़ताल पर एस्मा लगाकर विभाग ने उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की है।
मांगे नहीं मानी तो 13 से अनिश्चितकालीन हड़ताल
बैठक में वक्ताओं का कहना था कि 12 सितंबर को वे सरकार को विचार करने के लिए एक दिन देंगे। 12 सितंबर की शाम तक चिकित्सकों की बातें नहीं मानी गई तो वे आगामी 13 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। हालांकि, उस दिन भी मोर्चरी और इमरजेंसी सेवाएं सुचारु रहेंगी। मगर, अगले दिन से इन सेवाओं को भी ठप कर दिया जाएगा।
दो घंटे में बेचैन हुए मरीज
दूसरी ओर चिकित्सकों ने केवल दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की थी। मात्र दो घंटे में ही मरीजों और उनके परिजनों को जबरदस्त परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल के चलते अस्पताल में इलाज के आई गर्भवती महिलाओं से लेकर नवजात शिशु और बुजुर्ग भी उपचार के लिए भटकते रहे। हालांकि, दस बजे चिकित्सकों के आने के बाद ओपीडी शुरू हो गई। लेकिन, तब तक तो मरीजों की लाइनें लग गई थीं।
ये सेवाएं नहीं हुईं प्रभावित
हड़ताल में जच्चा बच्चा वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, मोर्चरी, आयुर्वेदिक विभाग, डेंटल विभाग की सेवाओं को शामिल नहीं किया गया था। इस कारण इन विभागों में अपना इलाज कराने आए मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
इन सेवाओं पर पड़ा ज्यादा असर
हड़ताल के कारण शिशु रोग विभाग, सामान्य ओपीडी, सर्जन विभाग, जनरल फिजिशियन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। यहंा पर सबसे ज्यादा मरीज आते हैं।
नहीं बने पटवारियों के मेडिकल
हाल ही में पटवारी भर्ती में चयनित हुए लोगों को अपना मेडिकल बनवाने में सोमवार को परेशानी हुई। सोमवार को हड़ताल के कारण पटवारी यहां से वहां भटकते रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। चिकित्सकों की कमी को दूर करने समेत अनेक मांगों को लेकर सोमवार को जिले भर के सरकारी चिकित्सक सुबह दो घंटे की हड़ताल पर रहे। यह हड़ताल हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर की गई। हड़ताल के कारण जिले के नागरिक अस्पताल में सैकड़ों मरीजों को परेशानी हुई। हालात यह रही कि दो घंटे की हड़ताल में ही नागरिक अस्पताल में मरीजों की लंबी लाइन लग गई। इनमें धक्का मुक्की तक हुई। सुबह दस बजे तक नागरिक अस्पताल में 450 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया था। जिला के करीब 23 सरकारी चिकित्सक इस हड़ताल में शामिल हुए।
जिले भर के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की सुबह आठ से लेकर 10 बजे तक कलम डाउन हड़ताल रही। इनमें नागरिक अस्पताल के साथ सीएचसी और पीएचसी के चिकित्सक भी शामिल हुए। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गईं। दो घंटे की हड़ताल से ही मरीज परेशान हो उठे। हड़ताल के चलते चिकित्सकों के कक्षों के सामने मरीजों की लाइनें लग गई। दूसरी तरफ चिकित्सकों ने अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष व्यक्त किया। सभी चिकित्सक आपातकालीन विभाग में एकत्रित हुए और बैठक की। इसके बाद सोमवार को चिकित्सकों ने सुबह आठ बजे से लेकर 10 बजे तक हड़ताल रखी।
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चिकित्सकों ने की मांगों को लेकर बैठक
जिले भर के सरकारी चिकित्सक स्थानीय नागरिक अस्पताल में आयोजित बैठक में शामिल हुए। बैठक को संबोधित करते हरियाणा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. आदित्य यादव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की पीजी पॉलिसी में 30 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है। इसका लाभ सभी चिकित्सकों को मिलना चाहिए। दस वर्ष की नौकरी करने के बाद सभी चिकित्सकों को एसएमओ का पद स्वत: ही दिया जाए, पीजी स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को उनके भत्ते अलग से मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है। इस समय पूरे प्रदेश में मात्र 1900 चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों पर कार्य का अतिरिक्त दबाव है। कई बार चिकित्सक छुट्टी नहीं मिलने के कारण घर में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाते। उन्होंने बताया कि यदि चिकित्सक किसी साथी के साथ अपना एडजेस्टमेंट कर छुट्टी पर चला भी जाता है तो उसके साथी को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है।
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कई बार लगाई जा चुकी है सरकार से गुहार
वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सकों के खाली पदों को भरने के लिए सरकार से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन सरकार का रवैया ठीक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सकों की हड़ताल पर एस्मा लगाकर विभाग ने उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की है।
मांगे नहीं मानी तो 13 से अनिश्चितकालीन हड़ताल
बैठक में वक्ताओं का कहना था कि 12 सितंबर को वे सरकार को विचार करने के लिए एक दिन देंगे। 12 सितंबर की शाम तक चिकित्सकों की बातें नहीं मानी गई तो वे आगामी 13 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। हालांकि, उस दिन भी मोर्चरी और इमरजेंसी सेवाएं सुचारु रहेंगी। मगर, अगले दिन से इन सेवाओं को भी ठप कर दिया जाएगा।
दो घंटे में बेचैन हुए मरीज
दूसरी ओर चिकित्सकों ने केवल दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की थी। मात्र दो घंटे में ही मरीजों और उनके परिजनों को जबरदस्त परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल के चलते अस्पताल में इलाज के आई गर्भवती महिलाओं से लेकर नवजात शिशु और बुजुर्ग भी उपचार के लिए भटकते रहे। हालांकि, दस बजे चिकित्सकों के आने के बाद ओपीडी शुरू हो गई। लेकिन, तब तक तो मरीजों की लाइनें लग गई थीं।
ये सेवाएं नहीं हुईं प्रभावित
हड़ताल में जच्चा बच्चा वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, मोर्चरी, आयुर्वेदिक विभाग, डेंटल विभाग की सेवाओं को शामिल नहीं किया गया था। इस कारण इन विभागों में अपना इलाज कराने आए मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
इन सेवाओं पर पड़ा ज्यादा असर
हड़ताल के कारण शिशु रोग विभाग, सामान्य ओपीडी, सर्जन विभाग, जनरल फिजिशियन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। यहंा पर सबसे ज्यादा मरीज आते हैं।
नहीं बने पटवारियों के मेडिकल
हाल ही में पटवारी भर्ती में चयनित हुए लोगों को अपना मेडिकल बनवाने में सोमवार को परेशानी हुई। सोमवार को हड़ताल के कारण पटवारी यहां से वहां भटकते रहे।