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साल 2018 में जिले में 2200 टीबी के मरीज मिले,जिसमें 30 फीसदी युवा

Thu, 21 Feb 2019 12:13 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 21 Feb 2019 12:13 AM IST
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साल 2018 में जिले में 2200 टीबी के मरीज मिले,जिसमें 30 फीसदी युवा
अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। जिले में स्वास्थ्य के प्रति अनदेखी युवाओं को भारी पड़ रही है। साल 2018 में जिले में 2200 मरीज टीबी के मिले थे। इसमें करीब 30 फीसदी युवा हैं। अब विभाग ऐसे रोगियों पर विशेष ध्यान दे रहा है। जिससे की समय रहते टीबी के मरीजों का उपचार हो सके।
उन्होंनेजिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि युवाओं के खानपान पर ध्यान न देने और नशे के सेवन से टीबी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों/युवाओं में यह बीमारी का होना चिंता का विषय है। ऐसे में परिजनों को भी ध्यान देने की जरूरत है। लंबे समय तक बीमार रहने वाले बच्चों को पास के अस्पताल में जांच कराएं। टीबी के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उपचार के दौरान एक मरीज को प्रति माह 500 रुपये पोषण योजना के तहत दिए जा रहे है।
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सरकार ने साल 2025 तक प्रदेश को टीबी मुक्त करने का अभियान शुरू किया हुआ है। इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्य चल रह है। पिछले साल जिले में सीबी नेट मशीन उपलब्ध होने से बिगड़ी टीबी के रोगियों को पहचान में विभाग को राहत मिली है। इससे अब प्रारंभिक स्तर पर भी ऐसे मरीजों की जांच संभव हो पा रही है। जिला क्षय रोग विभाग के अनुसार साल 2017 में टीबी के 1400 मरीज सामने आए थे। जबकि, साल 2018 में 2200 टीबी और बिगड़ी टीबी के 54 मरीज मिले थे। इसमें से करीब 30 फीसदी युवा टीबी की पीड़ित है। विभाग के अनुसार बीस साल के उम्र के 320 और तीस साल तक के 600 युवा टीबी के मरीज है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि जिले में टीबी मरीजों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। सीबी नेट मशीन टीबी अस्पताल में होने से टीबी ग्रस्त लोगों की जांच पहले से अधिक सुविधाजनक व आसान हो गई है। इससे पहले 70 प्रतिशत मरीज ही जांच में सामने आ पाते थे। सीबी नेट मशीन से 90 से 100 प्रतिशत तक मरीजों की टीबी की पुष्टी हो जाती है। इससे बिगड़ी हुई टीबी के मरीजों को आसानी से पहचान हो रही है।
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बिगड़ी टीबी का एक टैबलेट 6500 रुपये का
डॉ. जितेंद्र ने बताया कि बिगड़ी टीबी के एक मरीज को एक टैबलेट 6500 रुपये की जा रही है। इसे छह माह तक मरीज को नियमित दी जाएगी। ऐसे में एक मरीज पर करीब 11 लाख रुपये का खर्च जाएगा। जिसे सरकार निशुल्क उपलब्ध करा रही है। ऐसे में लोग बीमारी को छिपाए नहीं आएं जांच कराएं, ताकि मरीज को समय पर उपचार मिल सके। टीबी की मरीजों की उपचार और इलाज सरकारी संस्थानों में निशुल्क है।

ये हैं लक्षण
सात दिन से ज्यादा खांसी हो तो तुरंत जांच कराए, लगातार वजन गिरना, गले में गांठ का होना, खांसी के साथ बलगम आना जैसे लक्षण पाए जाते हैं तो व्यक्ति को अस्पताल में जांच करानी चाहिए।


वर्जन
सीबी नेट मशीन होने से टीबी के मरीजों की जांच में तेजी आई है। पिछले साल के टीबी के मरीजों का डॉटा देखे तो करीब 30 फीसदी युवा इससे पीड़ित मिले। इसका प्रमुख कारण युवाओं में नशे की प्रवृत्ति का बढ़ना और खाने पर ध्यान न देना प्रमुख है। टीबी के मरीजों के लिए 1500 सुपरवाइजर/मॉनिटरिंग टीम और 800 डॉट प्रोवाइडर लगे हुए हैं।
- डॉ. जितेंद्र यादव, जिला क्षय रोग अधिकारी, नारनौल।
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