{"_id":"5bad32d2867a557fed5e9dd2","slug":"41538077394-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नपा के पास खुद की मलकियत नहीं, लीज का प्रस्ताव विभाग को मंजूर नहीं, अधर में लटकी वाटर ट्रीटमेंट योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नपा के पास खुद की मलकियत नहीं, लीज का प्रस्ताव विभाग को मंजूर नहीं, अधर में लटकी वाटर ट्रीटमेंट योजना
Updated Fri, 28 Sep 2018 01:12 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। नांगल चौधरी नपा के पास खुद की मलकियत नहीं, लीज की जमीन के प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों ने खारिज कर दिया। उन्होंने जमीन खरीदकर प्लांट निर्माण करने के आदेश दिए हैं। लेकिन प्रयासों के बावजूद विभाग को जमीन नहीं मिल रही। अब प्लांट का निर्माण करवाया जाए, इसी उधेड़बुन में अधिकारी इधर-उधर की भागदौड़ में जुटे हैं। लेकिन अभी सफलता मिलती नजर नहीं आ रही।
गौरतलब है कि शहर में पानी निकासी, अतिक्रमण, पेयजल, रास्तों का पक्का निर्माण आदि मुख्य समस्या हैं। नपा गठन के बाद विभिन्न सुविधाएं मिलने की उम्मीद हुई थी। उम्मीद 28 मई 2015 को प्रबल हो गई थी, जब हलका विधायक डॉ. अभयसिंह यादव की सिफारिश पर सीएम मनोहरलाल ने नपा में सीवर, पेयजल लाइन, सड़कों का निर्माण, बस स्टैंड व अनाज मंडी का कंप्लीट निर्माण के लिए घोषणा की। घोषणा के मुताबिक दो महीने बाद ही सीवर व पेयजल लाइन के लिए करीब 47 करोड़ बजट स्वीकृत कर दिया था। जनवरी 2016 में पाइप लाइन दबाने का शुभारंभ किया गया था। सीवर का पानी स्टॉक करने के लिए आठ करोड़ अलग से मंजूर हो चुके। इसके लिए जैनपुर मोड़ पर तीन एकड़ जमीन 20 साल के लिए पट्टे पर ली। प्रस्ताव को जिला उपायुक्त की स्वीकृति मिलने के बाद चंडीगढ़ मुख्य प्रशासक को भेजा गया था। उन्होंने लीज के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। तर्क दिया कि 20 साल (लीज अवधि) के बाद किसान जमीन को छुड़ाने का हकदार है जबकि सीवर लाइन की सुविधा स्थायी रहेगी। इसके बाद अगर आसपास जमीन लीज पर नहीं मिली तो दूषित पानी को कहां स्टॉक करेंगे। करोड़ों की लागत से बिछाई जाने वाली सीवर लाइन को उखाड़ना संभव नहीं होगा। ऐसे में नपा की मलकियत पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण कराना उचित रहेगा। प्रस्ताव को खारिज करने के बाद सुविधाजनक जमीन तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने लूजोता गांव की पंचायती जमीन खरीदने का प्रपोजल विभाग को भेजा है, लेकिन जमीन खरीदने का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। जबकि पांच महीने पहले सूचीबद्ध वार्डों में पाइप लाइन दबाने का काम पूरा हो चुका है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की जगह नहीं मिलने के कारण शहरवासियों की सुविधा अटकी हुई है।
प्लांट निर्माण से किसानों को मिलेगी राहत
दूषित वाटर स्टोरेज से गिरते भूजल स्तर पर अंकुश लगेगा। दूषित पानी का शुद्धिकरण होने के बाद उसे सिंचाई में इस्तेमाल किया जा सकेगा। विभाग के मुताबिक वाटर ट्रीटमेंट के दौरान खाद की प्राप्ति होगी। इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ेगी।
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पानी की निकासी कृष्णावती नदी की ओर संभव
विभाग द्वारा सीवर के पानी की निकासी का नक्शा बनाया गया है। इसके मुताबिक नपा के अंतर्गत आने वाले गांवों और ढाणियों की पाइप लाइनों का कनेक्शन निजामपुर के किनारे दबाए गए मोटे पाइपों से होगा। इससे पानी का स्टॉक कृष्णावती नदी की ओर प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट में होगा।
प्रस्ताव खारिज, विकल्प की तलाश
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ अमित ने बताया कि लीज की जमीन के प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों ने खारिज कर दिया है। नपा की मलकियत पर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराने के निर्देश मिले हैं। लूजोता की पंचायती जमीन की लोकेशन देखी गई थी। लेकिन अभी तक खरीद प्रक्रिया अटकी हुई है। जमीन मिलने के बाद ही ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण संभव हो पाएगा।
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नांगल चौधरी। नांगल चौधरी नपा के पास खुद की मलकियत नहीं, लीज की जमीन के प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों ने खारिज कर दिया। उन्होंने जमीन खरीदकर प्लांट निर्माण करने के आदेश दिए हैं। लेकिन प्रयासों के बावजूद विभाग को जमीन नहीं मिल रही। अब प्लांट का निर्माण करवाया जाए, इसी उधेड़बुन में अधिकारी इधर-उधर की भागदौड़ में जुटे हैं। लेकिन अभी सफलता मिलती नजर नहीं आ रही।
गौरतलब है कि शहर में पानी निकासी, अतिक्रमण, पेयजल, रास्तों का पक्का निर्माण आदि मुख्य समस्या हैं। नपा गठन के बाद विभिन्न सुविधाएं मिलने की उम्मीद हुई थी। उम्मीद 28 मई 2015 को प्रबल हो गई थी, जब हलका विधायक डॉ. अभयसिंह यादव की सिफारिश पर सीएम मनोहरलाल ने नपा में सीवर, पेयजल लाइन, सड़कों का निर्माण, बस स्टैंड व अनाज मंडी का कंप्लीट निर्माण के लिए घोषणा की। घोषणा के मुताबिक दो महीने बाद ही सीवर व पेयजल लाइन के लिए करीब 47 करोड़ बजट स्वीकृत कर दिया था। जनवरी 2016 में पाइप लाइन दबाने का शुभारंभ किया गया था। सीवर का पानी स्टॉक करने के लिए आठ करोड़ अलग से मंजूर हो चुके। इसके लिए जैनपुर मोड़ पर तीन एकड़ जमीन 20 साल के लिए पट्टे पर ली। प्रस्ताव को जिला उपायुक्त की स्वीकृति मिलने के बाद चंडीगढ़ मुख्य प्रशासक को भेजा गया था। उन्होंने लीज के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। तर्क दिया कि 20 साल (लीज अवधि) के बाद किसान जमीन को छुड़ाने का हकदार है जबकि सीवर लाइन की सुविधा स्थायी रहेगी। इसके बाद अगर आसपास जमीन लीज पर नहीं मिली तो दूषित पानी को कहां स्टॉक करेंगे। करोड़ों की लागत से बिछाई जाने वाली सीवर लाइन को उखाड़ना संभव नहीं होगा। ऐसे में नपा की मलकियत पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण कराना उचित रहेगा। प्रस्ताव को खारिज करने के बाद सुविधाजनक जमीन तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने लूजोता गांव की पंचायती जमीन खरीदने का प्रपोजल विभाग को भेजा है, लेकिन जमीन खरीदने का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। जबकि पांच महीने पहले सूचीबद्ध वार्डों में पाइप लाइन दबाने का काम पूरा हो चुका है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की जगह नहीं मिलने के कारण शहरवासियों की सुविधा अटकी हुई है।
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प्लांट निर्माण से किसानों को मिलेगी राहत
दूषित वाटर स्टोरेज से गिरते भूजल स्तर पर अंकुश लगेगा। दूषित पानी का शुद्धिकरण होने के बाद उसे सिंचाई में इस्तेमाल किया जा सकेगा। विभाग के मुताबिक वाटर ट्रीटमेंट के दौरान खाद की प्राप्ति होगी। इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ेगी।
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पानी की निकासी कृष्णावती नदी की ओर संभव
विभाग द्वारा सीवर के पानी की निकासी का नक्शा बनाया गया है। इसके मुताबिक नपा के अंतर्गत आने वाले गांवों और ढाणियों की पाइप लाइनों का कनेक्शन निजामपुर के किनारे दबाए गए मोटे पाइपों से होगा। इससे पानी का स्टॉक कृष्णावती नदी की ओर प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट में होगा।
प्रस्ताव खारिज, विकल्प की तलाश
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ अमित ने बताया कि लीज की जमीन के प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों ने खारिज कर दिया है। नपा की मलकियत पर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराने के निर्देश मिले हैं। लूजोता की पंचायती जमीन की लोकेशन देखी गई थी। लेकिन अभी तक खरीद प्रक्रिया अटकी हुई है। जमीन मिलने के बाद ही ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण संभव हो पाएगा।