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पानी निकासी की 209 लाख की योजना रद्द
Updated Fri, 03 Nov 2017 09:46 PM IST
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पानी निकासी की 209 लाख की योजना रद्द
पांच महीने बाद विभाग ने माना नहीं बहाई जा सकती उल्टी गंगा
-अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा, अब उठाए गए पाइप
फोटो नंबर एक व दो
देवेंद्र यादव
नारनौल। शहर के विभिन्न मोहल्लों से बरसाती पानी निकासी के लिए बनाई गई 209 लाख रुपये की योजना अब रद्द हो गई है। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने यह मान लिया कि इस योजना में कुछ खामी थी। पानी निकासी के लिए जो फ्लो बनाया गया था, वह सही नहीं था। इसके बाद मंगलवार को विभाग ने इस योजना के लिए शहर में कई जगह डाले गए पाइप उठा लिए हैं। अब विभाग इसके लिए दोबारा से कोई नई योजना बनाएगा, ताकि बारिश के पानी की शहर से निकाली हो सके।
शहर में बरसाती पानी जमा होना एक विकराल समस्या है। जरा सी बारिश होते ही पानी जमा हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने गत अप्रैल-मई माह में बारिश से पूर्व 209 लाख रुपये की एक योजना बनाई थी। इस योजना के तहत शहर में करीब आठ स्थान चिह्नित किए गए थे। इन आठ स्थानों से शहर का पानी निकालने के लिए पाइप डाले गए थे। इसके तहत 24 इंच तक के पाइप शहर के विभिन्न हिस्सों में डाले गए थे।
पाइप डालते ही शुरू हो गया था विरोध
शहर के विभिन्न स्थानों पर जमा होने वाले बरसाती पानी की निकासी के लिए पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की इस योजना का मई माह में ही शहर में पाइप डलते ही विरोध शुरू हो गया था। विभाग ने पानी निकालने के लिए जो रास्ते चुने, वह बहाव के विपरीत थे। वहीं निकासी के रास्तों में ऊंचाई ज्यादा थी। ऐसे में लोग यह कहने लग गए थे कि विभाग बरसाती पानी निकालने के लिए उल्टी गंगा बहाने का प्रयास कर रहा है।
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तीन जगह ही डाले गए पाइप
योजना के तहत आठ से नौ जगह पाइप डाले जाने थे, मगर विभाग ने केवल तीन जगहों पर ही पानी निकासी के लिए पाइप डाले। इनमें मोहल्ला रावका में प्रागपुरा, रेलवे स्टेशन के पास से कृष्णावति नदी तक और सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास तीन जग पानी निकासी के लिए पाइप डाल दिए गए। जबकि सैन चौक, जमालपुर, पुरानी कचहरी तथा रेस्ट हाउस के पास व नलापुर मोहल्ले से पाइपों को उठा लिया गया।
दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है शहर के पानी का बहाव
शहर में पानी का फ्लो (बहाव) शहर के निजामपुर रोड व नांगल चौधरी रोड यानी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है। शहर के बीचोबीच बहने वाली छलक नदी का बहाव भी ऐसा ही है। वहीं नांगल चौधरी से पटीकरा व शहर की ओर आने वाली कृष्णावति नदी और हमीदपुर नदी का बहाव भी ऐसा ही है। जो नीमकाथाना से महेंद्रगढ़ की ओर बहती है। यह बहाव सदियों से ऐसा ही है। जबकि विभाग इसको उल्टा कर रहा था तथा पानी उत्तर से दक्षिण की ओर निकालने का प्रयास कर रहा था।
शहर का नाला व पुरानी सीवरेज व्यवस्था भी ऐसी ही
शहर के बीच जो छलक नाला बना है, वह भी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर के हिसाब से बनाया गया है। वहीं शहर में जो पुरानी सीवरेज व्यवस्था है, वह भी ऐसी ही है। इसके तहत शहर के सीवर का सारा पानी नीरपुर की ओर बन रहे ट्रीटमेंट प्लांट में डाला जाता है।
उत्तर से दक्षिण की ओर डालना चाह रहा था विभाग पानी
शहर में पानी निकासी की व्यवस्था ही पूरी दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर निकालने की है। मगर अब जनस्वास्थ्य विभाग इसके विपरीत पानी निकालने की योजना बना रहा था। इससे लोगों को डर था कि यह व्यवस्था फेल हो सकती है तथा पानी निकासी के लिए लगाए गए लाखों रुपये पानी में ही बह जाएंगे।
केस एक
सैन चौक का पानी नाले में डालने की योजना
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो सैन चौक पर जमा होने वाले पानी को रविदास मंदिर मार्ग होते हुए गंदे नाले में डाला जाना था, जबकि लोगों का कहना है कि रविदास मार्ग, मीरा जी, पुरानी सराय और नई सराय का पानी ढलान सैन चौक की ओर होने के कारण वहां जमा होता है। ऐसे में वापस पानी को गंदे नाले में कैसे डाला जा सकता था। वहीं बहाव के अनुसार यह उत्तर से दक्षिण की ओर हो जाता। ऐसे में यहां का पानी नहीं निकल पाता।
केस-दो
पुरानी कचहरी का पानी भी नाले में डालने की योजना
विभाग पुरानी कचहरी के पास जमा होने वाले पानी को भी गंदे नाले में डालने की योजना बना रहा था, जो गलत थी। यह भी बहाव उत्तर से दक्षिण की ओर होता था। इससे भी पानी नहीं जाएगा। क्योंकि शनि मंदिर, शिवाजी नगर, पुरानी कचहरी की टंकी के पास का पानी पुरानी कचहरी गेट के पास जमा होता है, जो ज्यादा होने पर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की ओर जाता है न की नाले की ओर।
अमर उजाला ने उठाया इस मुद्दे को
अमर उजाला अखबार ने इस मुद्दे को उठाया था। मई माह में ही अमर उजाला ने इस समाचार को ‘उल्टी गंगा बहाने चला जनस्वास्थ्य विभाग’ नामक शीर्षक से प्रकाशित किया था। इसके बाद से तत्कालीन उपायुक्त राजनारायण कौशिक ने इस योजना पर दोबारा विचार करने के लिए अधिकारियों को कहा।
अब अधिकारियों ने माना, सही नहीं था फ्लो
बरसाती पानी निकासी के लिए बनी यह योजना बरसात के मौसम में भी नहीं सही की गई। बारिश का मौसम निकल जाने और अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद लोगों के विरोध को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मान लिया कि इस योजना में कुछ खामी है और पानी निकासी का फ्लो सही नहीं है। इसके बाद विभाग ने मंगलवार को इस योजना के लिए शहर के विभिन्न जगहों पर डाले गए पाइपों को उठवा दिया।
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शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए योजना बनाई गई थी, मगर लोगों के विरोध के कारण कई जगह पाइप नहीं डाले गए। लोगों का कहना है कि जो पाइप डाले जाने हैं, उसका निकासी का फ्लो सही नहीं है। इसके बाद कई जगह से पाइपों को उठा लिया गया है। अब इस पर दोबारा से काम होगा।
-रामानंद, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, सीवरेज
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पानी निकासी की 209 लाख की योजना रद्द
पांच महीने बाद विभाग ने माना नहीं बहाई जा सकती उल्टी गंगा
-अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा, अब उठाए गए पाइप
फोटो नंबर एक व दो
देवेंद्र यादव
नारनौल। शहर के विभिन्न मोहल्लों से बरसाती पानी निकासी के लिए बनाई गई 209 लाख रुपये की योजना अब रद्द हो गई है। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने यह मान लिया कि इस योजना में कुछ खामी थी। पानी निकासी के लिए जो फ्लो बनाया गया था, वह सही नहीं था। इसके बाद मंगलवार को विभाग ने इस योजना के लिए शहर में कई जगह डाले गए पाइप उठा लिए हैं। अब विभाग इसके लिए दोबारा से कोई नई योजना बनाएगा, ताकि बारिश के पानी की शहर से निकाली हो सके।
शहर में बरसाती पानी जमा होना एक विकराल समस्या है। जरा सी बारिश होते ही पानी जमा हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने गत अप्रैल-मई माह में बारिश से पूर्व 209 लाख रुपये की एक योजना बनाई थी। इस योजना के तहत शहर में करीब आठ स्थान चिह्नित किए गए थे। इन आठ स्थानों से शहर का पानी निकालने के लिए पाइप डाले गए थे। इसके तहत 24 इंच तक के पाइप शहर के विभिन्न हिस्सों में डाले गए थे।
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पाइप डालते ही शुरू हो गया था विरोध
शहर के विभिन्न स्थानों पर जमा होने वाले बरसाती पानी की निकासी के लिए पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की इस योजना का मई माह में ही शहर में पाइप डलते ही विरोध शुरू हो गया था। विभाग ने पानी निकालने के लिए जो रास्ते चुने, वह बहाव के विपरीत थे। वहीं निकासी के रास्तों में ऊंचाई ज्यादा थी। ऐसे में लोग यह कहने लग गए थे कि विभाग बरसाती पानी निकालने के लिए उल्टी गंगा बहाने का प्रयास कर रहा है।
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तीन जगह ही डाले गए पाइप
योजना के तहत आठ से नौ जगह पाइप डाले जाने थे, मगर विभाग ने केवल तीन जगहों पर ही पानी निकासी के लिए पाइप डाले। इनमें मोहल्ला रावका में प्रागपुरा, रेलवे स्टेशन के पास से कृष्णावति नदी तक और सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास तीन जग पानी निकासी के लिए पाइप डाल दिए गए। जबकि सैन चौक, जमालपुर, पुरानी कचहरी तथा रेस्ट हाउस के पास व नलापुर मोहल्ले से पाइपों को उठा लिया गया।
दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है शहर के पानी का बहाव
शहर में पानी का फ्लो (बहाव) शहर के निजामपुर रोड व नांगल चौधरी रोड यानी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है। शहर के बीचोबीच बहने वाली छलक नदी का बहाव भी ऐसा ही है। वहीं नांगल चौधरी से पटीकरा व शहर की ओर आने वाली कृष्णावति नदी और हमीदपुर नदी का बहाव भी ऐसा ही है। जो नीमकाथाना से महेंद्रगढ़ की ओर बहती है। यह बहाव सदियों से ऐसा ही है। जबकि विभाग इसको उल्टा कर रहा था तथा पानी उत्तर से दक्षिण की ओर निकालने का प्रयास कर रहा था।
शहर का नाला व पुरानी सीवरेज व्यवस्था भी ऐसी ही
शहर के बीच जो छलक नाला बना है, वह भी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर के हिसाब से बनाया गया है। वहीं शहर में जो पुरानी सीवरेज व्यवस्था है, वह भी ऐसी ही है। इसके तहत शहर के सीवर का सारा पानी नीरपुर की ओर बन रहे ट्रीटमेंट प्लांट में डाला जाता है।
उत्तर से दक्षिण की ओर डालना चाह रहा था विभाग पानी
शहर में पानी निकासी की व्यवस्था ही पूरी दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर निकालने की है। मगर अब जनस्वास्थ्य विभाग इसके विपरीत पानी निकालने की योजना बना रहा था। इससे लोगों को डर था कि यह व्यवस्था फेल हो सकती है तथा पानी निकासी के लिए लगाए गए लाखों रुपये पानी में ही बह जाएंगे।
केस एक
सैन चौक का पानी नाले में डालने की योजना
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो सैन चौक पर जमा होने वाले पानी को रविदास मंदिर मार्ग होते हुए गंदे नाले में डाला जाना था, जबकि लोगों का कहना है कि रविदास मार्ग, मीरा जी, पुरानी सराय और नई सराय का पानी ढलान सैन चौक की ओर होने के कारण वहां जमा होता है। ऐसे में वापस पानी को गंदे नाले में कैसे डाला जा सकता था। वहीं बहाव के अनुसार यह उत्तर से दक्षिण की ओर हो जाता। ऐसे में यहां का पानी नहीं निकल पाता।
केस-दो
पुरानी कचहरी का पानी भी नाले में डालने की योजना
विभाग पुरानी कचहरी के पास जमा होने वाले पानी को भी गंदे नाले में डालने की योजना बना रहा था, जो गलत थी। यह भी बहाव उत्तर से दक्षिण की ओर होता था। इससे भी पानी नहीं जाएगा। क्योंकि शनि मंदिर, शिवाजी नगर, पुरानी कचहरी की टंकी के पास का पानी पुरानी कचहरी गेट के पास जमा होता है, जो ज्यादा होने पर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की ओर जाता है न की नाले की ओर।
अमर उजाला ने उठाया इस मुद्दे को
अमर उजाला अखबार ने इस मुद्दे को उठाया था। मई माह में ही अमर उजाला ने इस समाचार को ‘उल्टी गंगा बहाने चला जनस्वास्थ्य विभाग’ नामक शीर्षक से प्रकाशित किया था। इसके बाद से तत्कालीन उपायुक्त राजनारायण कौशिक ने इस योजना पर दोबारा विचार करने के लिए अधिकारियों को कहा।
अब अधिकारियों ने माना, सही नहीं था फ्लो
बरसाती पानी निकासी के लिए बनी यह योजना बरसात के मौसम में भी नहीं सही की गई। बारिश का मौसम निकल जाने और अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद लोगों के विरोध को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मान लिया कि इस योजना में कुछ खामी है और पानी निकासी का फ्लो सही नहीं है। इसके बाद विभाग ने मंगलवार को इस योजना के लिए शहर के विभिन्न जगहों पर डाले गए पाइपों को उठवा दिया।
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शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए योजना बनाई गई थी, मगर लोगों के विरोध के कारण कई जगह पाइप नहीं डाले गए। लोगों का कहना है कि जो पाइप डाले जाने हैं, उसका निकासी का फ्लो सही नहीं है। इसके बाद कई जगह से पाइपों को उठा लिया गया है। अब इस पर दोबारा से काम होगा।
-रामानंद, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, सीवरेज