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भगवान कृष्ण ही परमात्मा का पूर्ण अवतार है : श्रीराम प्रपन्नाचार्य
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। बाबा जयरामदास धर्मशाला में आयोजित सतगुरु सेवा समिति की श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृंदावन से पधारे कथावाचक स्वामी श्रीरामप्रपन्नाचार्य ने शुक्रवार को भगवान कृष्ण के जन्म और उनकी बाल लीलाओं का वर्णन किया।
उन्होंने प्रभु कृष्ण को परमात्मा के पूर्ण अवतार की संज्ञा देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण समस्त कलाओं के ज्ञाता थे। उनकी बाल लीलाओं को देख लोग आज भी मुग्ध हो जाते हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण का जन्मदिन मथुरा में न मनाए जाने के कारणों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जन्म के समय मथुरा में कंस का राज था। इसीलिए प्रभु कृष्ण का जन्मोत्सव सदैव गोकुल में ही मनाया जाता है। राजा कंस को आज भी हिंसा का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने माता यशोदा और बाबा नंद का कृष्ण लीलाओं पर बलिहारी हो जाना आज भी गोकुलवासियों को याद है। स्वामी प्रपन्नाचार्य ने भ्रूण हत्या को घोर पाप बताते हुए इसमें सम्मलित होने वाले लोगों को कंस जैसे राक्षस की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि जिस नगर और गांव और घर में नारी के साथ कन्या को सम्मान नहीं मिलता। उस नगर और घर में शांति और संपति का वास कभी नहीं होता है। उन्होंने कहा कि प्राचीनकाल से ही कन्याओं को देवी और लक्ष्मी का रूप माना जाता रहा है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सब लोग आज यहां से गो सेवा करने और भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़-मूल से समाप्त करने का संकल्प लेकर जाए।
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महेंद्रगढ़। बाबा जयरामदास धर्मशाला में आयोजित सतगुरु सेवा समिति की श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृंदावन से पधारे कथावाचक स्वामी श्रीरामप्रपन्नाचार्य ने शुक्रवार को भगवान कृष्ण के जन्म और उनकी बाल लीलाओं का वर्णन किया।
उन्होंने प्रभु कृष्ण को परमात्मा के पूर्ण अवतार की संज्ञा देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण समस्त कलाओं के ज्ञाता थे। उनकी बाल लीलाओं को देख लोग आज भी मुग्ध हो जाते हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण का जन्मदिन मथुरा में न मनाए जाने के कारणों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जन्म के समय मथुरा में कंस का राज था। इसीलिए प्रभु कृष्ण का जन्मोत्सव सदैव गोकुल में ही मनाया जाता है। राजा कंस को आज भी हिंसा का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने माता यशोदा और बाबा नंद का कृष्ण लीलाओं पर बलिहारी हो जाना आज भी गोकुलवासियों को याद है। स्वामी प्रपन्नाचार्य ने भ्रूण हत्या को घोर पाप बताते हुए इसमें सम्मलित होने वाले लोगों को कंस जैसे राक्षस की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि जिस नगर और गांव और घर में नारी के साथ कन्या को सम्मान नहीं मिलता। उस नगर और घर में शांति और संपति का वास कभी नहीं होता है। उन्होंने कहा कि प्राचीनकाल से ही कन्याओं को देवी और लक्ष्मी का रूप माना जाता रहा है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सब लोग आज यहां से गो सेवा करने और भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़-मूल से समाप्त करने का संकल्प लेकर जाए।
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