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Mahendragarh-Narnaul News: नारनौल में 6 माह में 350 बच्चे मिले फ्लोरोसिस से पीड़ित

Fri, 04 Jul 2025 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Fri, 04 Jul 2025 11:51 PM IST
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350 children found suffering from fluorosis in Narnaul in 6 months
फोटो 2नारनौल के खड़कड़ी मोहल्ले में बच्चों को जागरूक करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।स्रोत विभाग
नारनौल। स्वास्थ्य विभाग ने आंगनबाड़ी और स्कूलों में पिछले छह माह में 925 बच्चों की जांच की थी। इनमें से करीब 36 फीसदी 350 बच्चे फ्लोरोसिस बीमारी से पीड़ित मिले हैं। फ्लोरोसिस बीमारी से दांत, हड्डियां और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है, जो सालों तक ठीक नहीं होती। यह आंकड़े चिंताजनक हैं। क्योंकि आने वाले समय में इसमें और इजाफा हो सकता है।
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स्वास्थ्य विभाग की जिला परामर्शदाता डॉ. अंजू सिंघानिया ने बताया कि जनवरी से लेकर जून तक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में जांच की गई थी। इस दौरान 350 बच्चों में फ्लोरोसिस की समस्या मिली है। उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से बच्चों और उनके अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग की टीम बच्चों को विटामिन बी के टेबलेट और बिना फ्लोराइड का टूथ पेस्ट व ब्रश वितरित कर रही है।
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लहरोदा ट्यूबवेल में मिला 5.4 पीपीएम फ्लोराइड

स्वास्थ्य विभाग ने कई गांवों में पानी की शुद्धता चेक की थी। इसमें कहीं एक पीपीएम से भी नीचे तो कुछ स्थानों पर अधिक मात्रा में फ्लोराइड मिला। जांच में लहरोदा ट्यूबवेल में सर्वाधिक 5.4 पीपीएम फ्लोराइड मिला है। यह सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। वहीं, अटेली में 0.15, सैदपुर में 0.7, तोबड़ा में 0.9, बिहाली में 0.7 पीपीएम मिला है। इसके अलावा भूषण कला और कोरियावास में भी पीपीएम की मात्रा कम मिली है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पेयजल में फ्लोराइड की सुरक्षित मात्रा 1.2 पीपीएम मानी जाती है।
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फ्लोरोसिस के कारण और बचाव
पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा का अधिक होना, काला नमक व अधिक फ्लोराइड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन, तंबाकू, सुपारी व बिना दूध की चाय का सेवन, अधिक फ्लोराइड युक्त दंत मंजन के प्रयोग से भी फ्लोरोसिस बीमारी होती है। इसके बचाव के लिए पीने के लिए आरओ, नहरी पानी व वर्षा जल का प्रयोग करना चाहिए। दूध, दही, हरी सब्जी का सेवन करना चाहिए। खट्टे फलों और विटामिन सी व डी युक्त भोजन के सेवन से इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।
वर्जन-



-नारनौल के नागरिक अस्पताल में फ्लोराइड और पानी के सैंपल की जांच निशुल्क जांच की जाती है। साथ ही विभाग की तरफ से आंगनबाड़ी व स्कूलों में जांच कर विटामिन की टेबलेट वितरित की जाती है।




-डॉ. अंजू सिंघानिया, जिला परामर्शदाता स्वास्थ्य विभाग नारनौल।



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-आरओ का पानी प्रयोग कर फ्लोरोसिस बीमार से बचा जा सका है। अगर किसी में फ्लोरोसिस के लक्षण दिखाई दें तो अस्पताल में आकर जांच करा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निशुल्क जांच व दवा दी जाती है।



-डॉ. दिनेश, उप सिविल सर्जन नारनौल।
नारनौल में कहां कितनी मात्रा में मिला फ्लोराइड

गांव पीपीएम
बलाहा कला 2.5
गनियार 2.3
खेड़की 3.5
गडानिया 2.7
पाल 2.5
अकबरपुर 1.3
सलुनी 2.9
लहरोदा ट्यूबवेल 5.4
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