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Mahendragarh-Narnaul News: जिले के 325 केंद्रों पर 3400 अभ्यर्थियों ने दी उल्लास की परीक्षा
Sun, 28 Sep 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 28 Sep 2025 11:59 PM IST
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फोटो नंबर-27गंगाराम। उम्र 84 साल
नारनौल। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम उल्लास के तहत जिलेभर में 325 परीक्षा केंद्राें पर 3400 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
परीक्षा का उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्क को बुनियादी साक्षरता, संख्या ज्ञान, जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल प्रदान करना है, जिन्हें कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। जिले में 325 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जहां लगभग 3400 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
परीक्षा का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित था। परीक्षा में वही शामिल हुए, जिन्हें पहले से ही चिह्नित किया गया था। परीक्षा का स्वरूप विशेष रखा गया, जिसमें नव-साक्षर लोगों की समझ और ज्ञान की परख की गई। पास होने पर उन्हें साक्षर घोषित किया जाएगा।
यह केंद्र प्रायोजित योजना भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 से 2027 तक लागू की गई है। इसके तहत न केवल बुनियादी पढ़ाई-लिखाई सिखाई जा रही है, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल और व्यावसायिक ज्ञान भी प्रदान किया जा रहा है, ताकि अभ्यर्थी आत्मनिर्भर बन सकें। कार्यक्रम में बुजुर्गों से लेकर मध्यम आयु वर्ग तक के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस योजना से समाज में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और वे लोग भी मुख्यधारा में जुड़ सकेंगे, जिन्हें अब तक शिक्षा से वंचित रहना पड़ा था।
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बाक्स-
अक्षर ज्ञान और पढ़ाई न कर पाने का जो मलाल था उसे उल्लास ने दूर कर दिया है। अब उम्र शिक्षा में बाधा नहीं है। इस बात से हमें बहुत खुशी है।- गंगाराम, 84 साल
बाक्स-
कुछ पढ़कर कुछ समझ पाने के लिए यह एक अच्छी योजना है। आज उल्लास की परीक्षा देकर काफी प्रसन्न हूं। यह भी पता चल गया है कि पढ़ने की उम्र नहीं होती बस लगन होनी चाहिए।- शांति देवी, 70 साल
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परीक्षा का उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्क को बुनियादी साक्षरता, संख्या ज्ञान, जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल प्रदान करना है, जिन्हें कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। जिले में 325 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जहां लगभग 3400 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
परीक्षा का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित था। परीक्षा में वही शामिल हुए, जिन्हें पहले से ही चिह्नित किया गया था। परीक्षा का स्वरूप विशेष रखा गया, जिसमें नव-साक्षर लोगों की समझ और ज्ञान की परख की गई। पास होने पर उन्हें साक्षर घोषित किया जाएगा।
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यह केंद्र प्रायोजित योजना भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 से 2027 तक लागू की गई है। इसके तहत न केवल बुनियादी पढ़ाई-लिखाई सिखाई जा रही है, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल और व्यावसायिक ज्ञान भी प्रदान किया जा रहा है, ताकि अभ्यर्थी आत्मनिर्भर बन सकें। कार्यक्रम में बुजुर्गों से लेकर मध्यम आयु वर्ग तक के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस योजना से समाज में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और वे लोग भी मुख्यधारा में जुड़ सकेंगे, जिन्हें अब तक शिक्षा से वंचित रहना पड़ा था।
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अक्षर ज्ञान और पढ़ाई न कर पाने का जो मलाल था उसे उल्लास ने दूर कर दिया है। अब उम्र शिक्षा में बाधा नहीं है। इस बात से हमें बहुत खुशी है।- गंगाराम, 84 साल
बाक्स-
कुछ पढ़कर कुछ समझ पाने के लिए यह एक अच्छी योजना है। आज उल्लास की परीक्षा देकर काफी प्रसन्न हूं। यह भी पता चल गया है कि पढ़ने की उम्र नहीं होती बस लगन होनी चाहिए।- शांति देवी, 70 साल