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जरा संभलकर चलिए... हाईवे पर है लावारिस पशुओं का कब्जा
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। लावारिस पशु हाईवे पर चलने वाले वाहनों के लिए सबसे अधिक खतरा साबित हो रहे हैं। सतनाली चौक पर दिन भर पशुओं का जमावड़ा रहता है। यहां वाहन चालक सावधानी न बरतें तो रोजाना कई हादसे हो जाएंगे। दुकानदार हाईवे से गोवंश को हटाते रहते हैं। नगर पालिका ने पशुओं के लिए किसी तरह का प्रबंध नहीं किया है।
पूरे नगर पालिका एरिया में गोवंश सड़कों पर घूमते रहते हैं। गलियों से लेकर चौक चौराहे तक चारों ओर पशुओं का साम्राज्य है। लावारिस पशु बस अड्डा, नगर पालिका कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, रेलवे स्टेशन पर अक्सर टहलते हुए मिलते हैं। नारनौल-दादरी हाईवे पर भी पशु घूमते रहते हैं। जिसमें सतनाली चौक सबसे प्रमुख एरिया है। यहां पशु खेतों की ओर से आकर शहर की ओर दौड़ते हैं। कभी शहर की ओर से आकर खेतों की ओर जाते दिखते हैं। रात के समय तो पशु चौक पर ही बैठ जाते हैं। यहां लाइट की पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण रात के समय खतरा अधिक बढ़ जाता है। यहां दुकानदार गोवंश को बचाने के लिए हाईवे से हटाते रहते हैं। दिनभर हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों की नगर पालिका, जिला प्रशासन से लावारिस गोवंश को लेकर काफी नाराजगी है। इस बारे में लोग कई बार मांगपत्र भी सौंप चुके हैं।
लावारिस गोवंश दिनभर सड़कों पर रहता है। वाहन चालक जोर से ब्रेक लगाते हैं। कई बार बड़े हादसे होते होते बचे हैं। हम भी दिन भर गोवंश को यहां से हटाने का प्रयास करते हैं। प्रशासन गोवंश की समस्या का समाधान करने में नाकाम है।
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- राजकुमार, जूस कार्नर संचालक
हम कई बार नगर पालिका में शिकायत दे चुके हैं। कोई असर नहीं होता। नगर पालिका में भी प्रतिनिधि और अधिकारियों के बीच टकराव रहता है। जिस कारण समस्या का निदान करने की बजाए समस्याओं को बढ़ाते रहते हैं। पता नहीं कब इनसे राहत मिलेगी।
- अशोक कुमार, दुकानदार
हाइवे पर हमारी दुकान है। दिन भर लावारिस नंदी सड़कों पर रहते हैं। हाइवे पर स्पीड में वाहन चालक इस एरिया में बेहद कम गति पर चलने को मजबूर होते हैं। यहां कई बार हादसे भी हुए हैं। वाहन चालकों के अचानक ब्रेक लगाने से वाहन सवारों को चोट भी आई थी।
- धर्मेंद्र, दुकानदार
एक चाय वाले साथी दुकानदार को लावारिस गोवंश ने पिछले महीने मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद भी किसी को कोई असर नहीं पड़ा। शहर में उसी तरह से लावारिस पशुओं का आतंक है। एक भी पशु कम होने की बजाए संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
- राजू, चायवाला
वर्जन
लावारिस पशुओं को लेकर एक अभियान चलाया था। बाद में यह गोवंश दोबारा से गोशाला से बाहर आ गए। अब आचार संहिता लगी होने के कारण पशुओं को पकड़वाने का टेंडर नहीं कर सकते। आचार संहिता खत्म होने के बाद इस पर काम कराएंगे।
- रीना गर्ग, चेयरपर्सन, नगर पालिका, महेंद्रगढ़
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महेंद्रगढ़। लावारिस पशु हाईवे पर चलने वाले वाहनों के लिए सबसे अधिक खतरा साबित हो रहे हैं। सतनाली चौक पर दिन भर पशुओं का जमावड़ा रहता है। यहां वाहन चालक सावधानी न बरतें तो रोजाना कई हादसे हो जाएंगे। दुकानदार हाईवे से गोवंश को हटाते रहते हैं। नगर पालिका ने पशुओं के लिए किसी तरह का प्रबंध नहीं किया है।
पूरे नगर पालिका एरिया में गोवंश सड़कों पर घूमते रहते हैं। गलियों से लेकर चौक चौराहे तक चारों ओर पशुओं का साम्राज्य है। लावारिस पशु बस अड्डा, नगर पालिका कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, रेलवे स्टेशन पर अक्सर टहलते हुए मिलते हैं। नारनौल-दादरी हाईवे पर भी पशु घूमते रहते हैं। जिसमें सतनाली चौक सबसे प्रमुख एरिया है। यहां पशु खेतों की ओर से आकर शहर की ओर दौड़ते हैं। कभी शहर की ओर से आकर खेतों की ओर जाते दिखते हैं। रात के समय तो पशु चौक पर ही बैठ जाते हैं। यहां लाइट की पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण रात के समय खतरा अधिक बढ़ जाता है। यहां दुकानदार गोवंश को बचाने के लिए हाईवे से हटाते रहते हैं। दिनभर हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों की नगर पालिका, जिला प्रशासन से लावारिस गोवंश को लेकर काफी नाराजगी है। इस बारे में लोग कई बार मांगपत्र भी सौंप चुके हैं।
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लावारिस गोवंश दिनभर सड़कों पर रहता है। वाहन चालक जोर से ब्रेक लगाते हैं। कई बार बड़े हादसे होते होते बचे हैं। हम भी दिन भर गोवंश को यहां से हटाने का प्रयास करते हैं। प्रशासन गोवंश की समस्या का समाधान करने में नाकाम है।
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- राजकुमार, जूस कार्नर संचालक
हम कई बार नगर पालिका में शिकायत दे चुके हैं। कोई असर नहीं होता। नगर पालिका में भी प्रतिनिधि और अधिकारियों के बीच टकराव रहता है। जिस कारण समस्या का निदान करने की बजाए समस्याओं को बढ़ाते रहते हैं। पता नहीं कब इनसे राहत मिलेगी।
- अशोक कुमार, दुकानदार
हाइवे पर हमारी दुकान है। दिन भर लावारिस नंदी सड़कों पर रहते हैं। हाइवे पर स्पीड में वाहन चालक इस एरिया में बेहद कम गति पर चलने को मजबूर होते हैं। यहां कई बार हादसे भी हुए हैं। वाहन चालकों के अचानक ब्रेक लगाने से वाहन सवारों को चोट भी आई थी।
- धर्मेंद्र, दुकानदार
एक चाय वाले साथी दुकानदार को लावारिस गोवंश ने पिछले महीने मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद भी किसी को कोई असर नहीं पड़ा। शहर में उसी तरह से लावारिस पशुओं का आतंक है। एक भी पशु कम होने की बजाए संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
- राजू, चायवाला
वर्जन
लावारिस पशुओं को लेकर एक अभियान चलाया था। बाद में यह गोवंश दोबारा से गोशाला से बाहर आ गए। अब आचार संहिता लगी होने के कारण पशुओं को पकड़वाने का टेंडर नहीं कर सकते। आचार संहिता खत्म होने के बाद इस पर काम कराएंगे।
- रीना गर्ग, चेयरपर्सन, नगर पालिका, महेंद्रगढ़