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लॉजिस्टिक हब के लिए उपजाऊ जमीन के बदले बंजर भूमि देने का आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। गांव बसीरपुर के किसानों ने लॉजिस्टिक हब के लिए उपजाऊ जमीन के बदले बंजर जमीन देने का आरोप लगाया है। किसानों ने जमीन अधिग्रहण पर रोक लगाने को लेकर मंगलवार को एसडीएम जगदीश शर्मा को मुख्यमंत्री व राज्यपाल के नाम पर ज्ञापन सौंपा है।
एसडीएम के मार्फत मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में किसानों ने बताया कि लॉजिस्टिक हब के लिए हरियाणा कंसोलिडेशन ऑफ प्रोजेक्ट लैंड एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण की जा रही है। किसानों को उनकी उपजाऊ जमीन के बदले में दूसरी जगह बंजर जमीन दी गई है। किसानों की जमीन का जिला प्रशासन ने निरीक्षण भी नहीं किया है। किसानों ने बिना किसी सुनवाई के जबरन जमीन अधिग्रहित करने का आरोप लगाया है। किसानों ने जिला राजस्व अधिकारी से अधिग्रहीत जमीन व उसके बदले दी जा रही जमीन का मौके पर जाकर निरीक्षण करवाने की मांग की है। ज्ञापन में महावीर, आजाद, मूलचंद, योगेश, दिनेश, गजराज, पृथ्वी, उदमसिंह, सत्यप्रकाश, सत्यनारायण, अशोक, विरेन्द्र, रणवीर, महेश, करतारसिंह, सज्जनसिंह, जयवीर, मुकेश, संजय, राजकुमार, अजय, अनिल, चेतराम, जसवीर, सुरेन्द्र, राजेन्द्र, रामबीर, रतीराम, सुनील, हरफुल, रामजीलाल, ओमप्रकाश, राजेश, बनवारी, दयाराम, रमेश, सुरेश, विक्रम, सुबेसिंह, दलीपसिंह, नरेन्द्र, विनोद, रामचन्द्र, कृष्ण सहित सौ से अधिक किसानों ने हस्ताक्षर किए हैं।
किसानों से बातचीत-
जीविका का एकमात्र साधन खेती बाड़ी है। भूमि लॉजिस्टिक हब के लिए लेने से किसान बर्बाद हो जाएंगे और रोजी रोटी के लाले पड़ जाएगे। उनकी भूमि सिंचित भूमि थी। इसके बदले में दी जाने वाली भूमि फसल के लायक नहीं है। जिसमें कोई फसल पैदा नहीं होती है।
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-नेतराम, किसान
सरकार द्वारा बदले में दी जा रही जमीन में पैदावार बहुत कम होगी। इसके अलावा सिंचाई का कोई साधन नहीं होने के कारण यह जमीन बंजर भूमि के समान है। बिना सिंचाई के जमीन में कोई पैदावार नहीं होती है। जिससे आजीविका का साधन खत्म हो जाएगा।
शिवकुमार, किसान
गांव बसीरपुर व तलोट की भूमि बढ़िया, उपजाऊ किस्म की भूमि है और जिसमें दोनों फसलें होती है और उक्त भूमि के लिए नहर व कुओं से सिंचाई का साधन है। गांव बसीरपुर की भूमि समतल होने से सिंचाई भी आसानी से हो जाती है। सरकार द्वारा बदले में दी जा रही भूमि उबड़ खाबड़ है।
रमेश, किसान
सरकार द्वारा बदले में दी जा रही भूमि की कीमत बहुत कम है। रोजगार का कोई साधन नहीं होने के कारण वे खेती पर ही निर्भर है। सरकार द्वारा हब के लिए हमारी भूमि पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। इससे गरीब किसान बर्बाद हो जाएगे।
सुबेदार सिंह, किसान
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नारनौल। गांव बसीरपुर के किसानों ने लॉजिस्टिक हब के लिए उपजाऊ जमीन के बदले बंजर जमीन देने का आरोप लगाया है। किसानों ने जमीन अधिग्रहण पर रोक लगाने को लेकर मंगलवार को एसडीएम जगदीश शर्मा को मुख्यमंत्री व राज्यपाल के नाम पर ज्ञापन सौंपा है।
एसडीएम के मार्फत मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में किसानों ने बताया कि लॉजिस्टिक हब के लिए हरियाणा कंसोलिडेशन ऑफ प्रोजेक्ट लैंड एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण की जा रही है। किसानों को उनकी उपजाऊ जमीन के बदले में दूसरी जगह बंजर जमीन दी गई है। किसानों की जमीन का जिला प्रशासन ने निरीक्षण भी नहीं किया है। किसानों ने बिना किसी सुनवाई के जबरन जमीन अधिग्रहित करने का आरोप लगाया है। किसानों ने जिला राजस्व अधिकारी से अधिग्रहीत जमीन व उसके बदले दी जा रही जमीन का मौके पर जाकर निरीक्षण करवाने की मांग की है। ज्ञापन में महावीर, आजाद, मूलचंद, योगेश, दिनेश, गजराज, पृथ्वी, उदमसिंह, सत्यप्रकाश, सत्यनारायण, अशोक, विरेन्द्र, रणवीर, महेश, करतारसिंह, सज्जनसिंह, जयवीर, मुकेश, संजय, राजकुमार, अजय, अनिल, चेतराम, जसवीर, सुरेन्द्र, राजेन्द्र, रामबीर, रतीराम, सुनील, हरफुल, रामजीलाल, ओमप्रकाश, राजेश, बनवारी, दयाराम, रमेश, सुरेश, विक्रम, सुबेसिंह, दलीपसिंह, नरेन्द्र, विनोद, रामचन्द्र, कृष्ण सहित सौ से अधिक किसानों ने हस्ताक्षर किए हैं।
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किसानों से बातचीत-
जीविका का एकमात्र साधन खेती बाड़ी है। भूमि लॉजिस्टिक हब के लिए लेने से किसान बर्बाद हो जाएंगे और रोजी रोटी के लाले पड़ जाएगे। उनकी भूमि सिंचित भूमि थी। इसके बदले में दी जाने वाली भूमि फसल के लायक नहीं है। जिसमें कोई फसल पैदा नहीं होती है।
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-नेतराम, किसान
सरकार द्वारा बदले में दी जा रही जमीन में पैदावार बहुत कम होगी। इसके अलावा सिंचाई का कोई साधन नहीं होने के कारण यह जमीन बंजर भूमि के समान है। बिना सिंचाई के जमीन में कोई पैदावार नहीं होती है। जिससे आजीविका का साधन खत्म हो जाएगा।
शिवकुमार, किसान
गांव बसीरपुर व तलोट की भूमि बढ़िया, उपजाऊ किस्म की भूमि है और जिसमें दोनों फसलें होती है और उक्त भूमि के लिए नहर व कुओं से सिंचाई का साधन है। गांव बसीरपुर की भूमि समतल होने से सिंचाई भी आसानी से हो जाती है। सरकार द्वारा बदले में दी जा रही भूमि उबड़ खाबड़ है।
रमेश, किसान
सरकार द्वारा बदले में दी जा रही भूमि की कीमत बहुत कम है। रोजगार का कोई साधन नहीं होने के कारण वे खेती पर ही निर्भर है। सरकार द्वारा हब के लिए हमारी भूमि पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। इससे गरीब किसान बर्बाद हो जाएगे।
सुबेदार सिंह, किसान