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गोशाला कक
Updated Fri, 22 Dec 2017 10:17 PM IST
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फूड प्वाइजनिंग से गोशाला में 20 गोवंश की मौत
महेंद्रगढ़। श्रीकृष्ण सुदामा गोशाला भालखी में फूड प्वाइजनिंग से 20 गोवंश की मौत हो गई। हालांकि ग्रामीण इनकी संख्या 50 बता रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार गोवंश को तीन दिन बासी रोटी खिलाई गई थी। मौके पर पहुंचे गोसेवा आयोग के सदस्य दयाशंकर तिवाड़ी ने गोशाला का निरीक्षण किया और चिकित्सकों से बात कर गायों का पोस्टमार्टम करवाया। बाद में जेसीबी मशीन से गायों को गोशाला के अंदर ही गड्ढा खोदकर दबा दिया गया है।
इस गोशाला की स्थापना तीन वर्ष पहले हुई थी। इसमें 250 के लगभग गोवंश हैं। इसे सुरेश मुनि महाराज चला रहे हैं। हालांकि गोशाला में गायों की साफ-सफाई और खाने-पीने सुविधा बहुत अच्छी की गई है, लेकिन गोवंश की मौत के बाद गांव के कुछ लोग नाराज दिखाई दिए और उन्होंने इसका विरोध किया।
उल्लेखनीय है कि श्री कृष्णा सुदामा गोशाला के गोवंश की अचानक तबीयत खराब हो गई। इससे गोशाला स्टाफ में हड़कंप मंच गया। गोशाला स्टाफ और गोसेवक गोवंश को संभालने में जुट गए और पशु चिकित्सकों को सूचित कर दिया। सात लोगों की टीम ने इसकी कमान संभाली और रात 11 बजे तक गोवंश को उपचार दिया गया। इसके बाद शुक्रवार को सुबह फिर चिकित्सक जल्द आकर गोवंश के इलाज में जुट गए। इस दौरान ही गोवंश की मौत हो गई
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50 गायों का मरने का जताया दावा
ग्रामीण अजीत सिंह, कमल सिंह और अन्य ने बताया कि गोवंश वीरवार दोपहर 11 बजे से ही बीमार हो रखा था। उन्हें बासी खाना खिलाया जाता है। उन्होंने बताया कि लगभग 50 गोवंश की मौत हुई हैं। इनको शाम के समय गांव की बणी में जेसीबी से गड्ढ़ा खोदकर दबा रहे थे। इसके अलावा गोशाला के दोनों गेट बंद किए हुए थे। किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। उन्होंने बताया कि 30 से 35 गोवंश को उन्होंने स्वयं देखा है। अब भी 15 गोवंश मरे पड़े हैं।
गोवंश को खिलाई गई बासी रोटियां
चिकित्सक बलजीत और अरुण जैन ने बताया कि सर्दियों में रोटियों में नमी के कारण फंगस जल्द पकड़ लेती है। उन रोटियों के खाने से फूड प्वाइजनिंग हो जाता है। इससे टोकसिमिया बना जाता है। इससे आंतों में इनफेक्शन हो जाता है। गोवंश को डीहाइड्रेशन हो जाता है। इसके अलावा वो चरना भी छोड़ देते हैं। उन्होंने बताया कि गोवंश के बीमार होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर देखा तो लगभग 85 गोवंश बीमार थे। जिनकी तबीयत ज्यादा खराब थीं, उनकी मौत हो गई जबकि शेष को तीन राउंड तक इलाज किया गया। 65 गायों को बचा लिया गया। अभी पांच छह गायों की हालत नाजुक बनी हुई है।
गोसेवकों ने किया विशेष सहयोग
गो सेवक पवन भारद्वाज, प्रमोद यादव पवन देवास, अशोक गोस्वामी, गोशाला स्टाफ और अन्य गो सेवकों ने गायों को बचाने के लिए पूरा प्रयास किया। इसके अलाव मृत गायों को उठाने और दबाने के लिए जेसीबी की व्यवस्था की गई। जेसीबी के माध्यम से गोशाला में गड्ढ़ा खोदकर गायों को दबा दिया गया। कुछ गायों को गोशाला से दूर बणी में दबाया गया है।
गोशाला का निरीक्षण किया था। लगभग 20 गायों की मौत हुई है। चिकित्सकों की टीम उनका उपचार करने में लगी हुई है। साफ-सफाई और पानी की पूरी सुविधा है। फूड प्वाइजनिंग के कारण गायों की मौत हुई है।
-दयाशंकर तिवाड़ी।
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गोशाला में गायों को बासी रोटी खिलाई थी। उसके खिलाने के बाद ही वो बीमार हुई हैं। लगभग 20 गायों की मौत हुई। शेष को उपचार दिया गया है। शेष सभी गाये उठ गई हैं।
-सुरेश मुनी, गोशाला संचालक।
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महेंद्रगढ़। श्रीकृष्ण सुदामा गोशाला भालखी में फूड प्वाइजनिंग से 20 गोवंश की मौत हो गई। हालांकि ग्रामीण इनकी संख्या 50 बता रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार गोवंश को तीन दिन बासी रोटी खिलाई गई थी। मौके पर पहुंचे गोसेवा आयोग के सदस्य दयाशंकर तिवाड़ी ने गोशाला का निरीक्षण किया और चिकित्सकों से बात कर गायों का पोस्टमार्टम करवाया। बाद में जेसीबी मशीन से गायों को गोशाला के अंदर ही गड्ढा खोदकर दबा दिया गया है।
इस गोशाला की स्थापना तीन वर्ष पहले हुई थी। इसमें 250 के लगभग गोवंश हैं। इसे सुरेश मुनि महाराज चला रहे हैं। हालांकि गोशाला में गायों की साफ-सफाई और खाने-पीने सुविधा बहुत अच्छी की गई है, लेकिन गोवंश की मौत के बाद गांव के कुछ लोग नाराज दिखाई दिए और उन्होंने इसका विरोध किया।
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उल्लेखनीय है कि श्री कृष्णा सुदामा गोशाला के गोवंश की अचानक तबीयत खराब हो गई। इससे गोशाला स्टाफ में हड़कंप मंच गया। गोशाला स्टाफ और गोसेवक गोवंश को संभालने में जुट गए और पशु चिकित्सकों को सूचित कर दिया। सात लोगों की टीम ने इसकी कमान संभाली और रात 11 बजे तक गोवंश को उपचार दिया गया। इसके बाद शुक्रवार को सुबह फिर चिकित्सक जल्द आकर गोवंश के इलाज में जुट गए। इस दौरान ही गोवंश की मौत हो गई
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50 गायों का मरने का जताया दावा
ग्रामीण अजीत सिंह, कमल सिंह और अन्य ने बताया कि गोवंश वीरवार दोपहर 11 बजे से ही बीमार हो रखा था। उन्हें बासी खाना खिलाया जाता है। उन्होंने बताया कि लगभग 50 गोवंश की मौत हुई हैं। इनको शाम के समय गांव की बणी में जेसीबी से गड्ढ़ा खोदकर दबा रहे थे। इसके अलावा गोशाला के दोनों गेट बंद किए हुए थे। किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। उन्होंने बताया कि 30 से 35 गोवंश को उन्होंने स्वयं देखा है। अब भी 15 गोवंश मरे पड़े हैं।
गोवंश को खिलाई गई बासी रोटियां
चिकित्सक बलजीत और अरुण जैन ने बताया कि सर्दियों में रोटियों में नमी के कारण फंगस जल्द पकड़ लेती है। उन रोटियों के खाने से फूड प्वाइजनिंग हो जाता है। इससे टोकसिमिया बना जाता है। इससे आंतों में इनफेक्शन हो जाता है। गोवंश को डीहाइड्रेशन हो जाता है। इसके अलावा वो चरना भी छोड़ देते हैं। उन्होंने बताया कि गोवंश के बीमार होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर देखा तो लगभग 85 गोवंश बीमार थे। जिनकी तबीयत ज्यादा खराब थीं, उनकी मौत हो गई जबकि शेष को तीन राउंड तक इलाज किया गया। 65 गायों को बचा लिया गया। अभी पांच छह गायों की हालत नाजुक बनी हुई है।
गोसेवकों ने किया विशेष सहयोग
गो सेवक पवन भारद्वाज, प्रमोद यादव पवन देवास, अशोक गोस्वामी, गोशाला स्टाफ और अन्य गो सेवकों ने गायों को बचाने के लिए पूरा प्रयास किया। इसके अलाव मृत गायों को उठाने और दबाने के लिए जेसीबी की व्यवस्था की गई। जेसीबी के माध्यम से गोशाला में गड्ढ़ा खोदकर गायों को दबा दिया गया। कुछ गायों को गोशाला से दूर बणी में दबाया गया है।
गोशाला का निरीक्षण किया था। लगभग 20 गायों की मौत हुई है। चिकित्सकों की टीम उनका उपचार करने में लगी हुई है। साफ-सफाई और पानी की पूरी सुविधा है। फूड प्वाइजनिंग के कारण गायों की मौत हुई है।
-दयाशंकर तिवाड़ी।
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गोशाला में गायों को बासी रोटी खिलाई थी। उसके खिलाने के बाद ही वो बीमार हुई हैं। लगभग 20 गायों की मौत हुई। शेष को उपचार दिया गया है। शेष सभी गाये उठ गई हैं।
-सुरेश मुनी, गोशाला संचालक।