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Mahendragarh-Narnaul News: भागवत कथा में किया 28 प्रकार के नरकों का वर्णन
Sun, 01 Sep 2024 11:32 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 01 Sep 2024 11:32 PM IST
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फोटो नंबर-05भागवत कथा का श्रवण करती महिलाएं। स्त्रोत-आयोजक
नारनौल। शहर के समीपवर्ती गांव डोहर खुर्द में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भक्तों को भागवत ज्ञान की गंगा में डुबकी लगवाते हुए आचार्य बजरंग शास्त्री ने 28 प्रकार के नरकों का वर्णन सुनाया।
आचार्य ने गज ग्राह की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि हमें कभी भी रूप, यौवन, संपति, शक्ति का अभिमान नही करना चाहिए। इसके बाद आचार्य जी ने प्रजापति दक्ष का प्रसंग उनकी साठ कन्याओं के वंश का वर्णन व गुरुओं की अवज्ञा का परिणाम व 49 मरूदगणों की कथा सुनाई और वृत्तासुर की कथा का बड़ा ही सुंदर मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान नारायण स्वयं नरसिंह का रूप धारण करके प्रहलाद की रक्षा करने के लिए आए और हिरण्यकश्यप का कल्याण किया। आचार्य ने गज और ग्राह की कथा सुनाते हुए बताया की गज को अपनी ताकत पर अभिमान था, लेनिक उसकी ताकत और परिवार भी काम नहीं आया अंत में हारकर उसने नारायण को पुकारा और नारायण ने उसकी रक्षा की। व्यास जी ने भरत चरित्र, वामन चरित्र, समुद्र मंथन व सूर्यवंश की कथा में श्री राम जन्म और राम कथा का सुंदर वर्णन किया।
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आचार्य ने गज ग्राह की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि हमें कभी भी रूप, यौवन, संपति, शक्ति का अभिमान नही करना चाहिए। इसके बाद आचार्य जी ने प्रजापति दक्ष का प्रसंग उनकी साठ कन्याओं के वंश का वर्णन व गुरुओं की अवज्ञा का परिणाम व 49 मरूदगणों की कथा सुनाई और वृत्तासुर की कथा का बड़ा ही सुंदर मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान नारायण स्वयं नरसिंह का रूप धारण करके प्रहलाद की रक्षा करने के लिए आए और हिरण्यकश्यप का कल्याण किया। आचार्य ने गज और ग्राह की कथा सुनाते हुए बताया की गज को अपनी ताकत पर अभिमान था, लेनिक उसकी ताकत और परिवार भी काम नहीं आया अंत में हारकर उसने नारायण को पुकारा और नारायण ने उसकी रक्षा की। व्यास जी ने भरत चरित्र, वामन चरित्र, समुद्र मंथन व सूर्यवंश की कथा में श्री राम जन्म और राम कथा का सुंदर वर्णन किया।
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