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लावारिस पशु शहरवासियों को दे रहे जीवन भर का दर्द
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। लावारिस पशुओं ने शहर में कई लोगों को जीवन भर का दर्द दिया है। लावारिस पशुओं को देखकर अब घबराहट होने लगती है। ऐसे लोग लावारिस पशुओं के कारण अपने परिजनों को खो चुके हैं। कुुछ लोग चोटिल हो चुके हैं। पशुओं का आतंक अब भी कम नहीं हुआ। हाईवे से लेकर शहर की रिहायशी कालोनियों तक में पशुओं के झुंड नजर आते हैं। लोग इन गोवंश से बचकर निकलते हैं। सब्जी मंडी में छोटे बच्चे या बुजुर्ग अपने हाथ में सब्जी लेकर नहीं आ सकते। हाथ में सब्जी के थैले पर लावारिस पशु किसी ओर से भी धावा बोल सकते हैं।
सुरेश सैनी ने कहा लावारिस पशुओं का दर्द मेरे परिवार को पता है। हमने पिता को खोया है। लावारिस सांड़ों के कारण हमारे सिर से पिता का साया उठ गया। घर का मुखिया चले जाने के कारण पूरे परिवार को इसका दंश झेलना पड़ रहा है। लावारिस गोवंश को देखकर हम खौफ में है। हमारे पिता के चले जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई काम नहीं किया। एक भी लावारिस पशु को नहीं पकड़ा। अगर यह हादसा किसी बड़े अधिकारी या किसी बड़े नेता के परिवार के साथ हुआ होता तो लावारिस पशुओं को जब तक गोशाला भेज दिया जाता। शहर का ऐसा कोई कोना नहीं जहां लावारिस पशुओं का आतंक न हो।
यदुवंशी स्कूल में प्रवक्ता मनोज कुमार ने बताया कि 29 मार्च की शाम करीब साढ़े 5 बजे घर पर थे। घर के पास ही बच्चे खेल रहे थे। एक बछड़ा बच्चों के पीछे दौड़ने लगा। जब मनोज बच्चों को बचाने के लिए एक छोटी सी डंडी लेकर बछड़े की ओर गए तो बछड़े ने उन पर हमला बोल दिया। एक दीवार के पास पटक दिया। लावारिस गोवंश दोबारा हमला करने ही वाला था कि इसी बची मनोज कुमार के बेटे नीतेश ने अपने बल्ले से मारकर गोवंश को भगाया। मनोज कुमार ने बताया कि उसे कुछ चोटें आई। यह लावारिस गोवंश पूरे एरिया में आतंक का प्रयाय बना है।
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धर्मबीर पटवारी ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि 20 जुलाई 2018 को महेंद्रगढ़ सब्जी मंडी में सीएम की रैली के लिए तैयारियों को जांच रहे थे, जिसमें एडीसी, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार भी शामिल थे। पीछे की ओर खड़े पटवारी धर्मबीर को लावारिस पशु ने सींगो पर उठाकर कई फीट ऊपर उछाल दिया। गनीमत रही कि वह एक गाड़ी के बोनट पर गिरते हुए नीचे पड़े। अगर सीधे जमीन पर आते तो कई हड्डियां टूट जाती। धर्मबीर पटवारी ने कहा कि गोवंश को लेकर देखकर अब पहले ही दूर हो जाता हूं।
सोमबीर ने बताया कि लावारिस पशु उसे चोटिल कर चुके हैं। पूरे शहर में लावारिस गोवंश का आतंक है। कहीं भी जाओ पशुओं का सामना करना ही पड़ेगा। अब कहां कहां बचेंगे। सोमबीर ने कहा कि गोवंश ने उसे सींग से मारा तो उसे कुछ चोट आई थी। उसे घाव तो भर गए लेकिन मन में हमेशा के लिए डर बैठ गया। अब घर से निकलते ही मन में डर रहता है। पता नहीं पशु कहां से आकर मार देगा।
बुचौली रोड निवासी निरंजन ने बताया कि लावारिस पशुओं के कारण चारों ओर खतरा रहता है। उसने बताया कि वह भी पशु की चपेट में आकर घायल हो चुका है। पशु की चोट के कारण कई दिन तक काम पर नहीं जा सका। नगर पालिका को लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए शिकायत भी दी थी। पालिका ने पशुओं को पकड़ने के लिए अभी कोई अभियान नहीं चलाया। अब आचार संहिता का हवाला दे रहे हैं।
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महेंद्रगढ़। लावारिस पशुओं ने शहर में कई लोगों को जीवन भर का दर्द दिया है। लावारिस पशुओं को देखकर अब घबराहट होने लगती है। ऐसे लोग लावारिस पशुओं के कारण अपने परिजनों को खो चुके हैं। कुुछ लोग चोटिल हो चुके हैं। पशुओं का आतंक अब भी कम नहीं हुआ। हाईवे से लेकर शहर की रिहायशी कालोनियों तक में पशुओं के झुंड नजर आते हैं। लोग इन गोवंश से बचकर निकलते हैं। सब्जी मंडी में छोटे बच्चे या बुजुर्ग अपने हाथ में सब्जी लेकर नहीं आ सकते। हाथ में सब्जी के थैले पर लावारिस पशु किसी ओर से भी धावा बोल सकते हैं।
सुरेश सैनी ने कहा लावारिस पशुओं का दर्द मेरे परिवार को पता है। हमने पिता को खोया है। लावारिस सांड़ों के कारण हमारे सिर से पिता का साया उठ गया। घर का मुखिया चले जाने के कारण पूरे परिवार को इसका दंश झेलना पड़ रहा है। लावारिस गोवंश को देखकर हम खौफ में है। हमारे पिता के चले जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई काम नहीं किया। एक भी लावारिस पशु को नहीं पकड़ा। अगर यह हादसा किसी बड़े अधिकारी या किसी बड़े नेता के परिवार के साथ हुआ होता तो लावारिस पशुओं को जब तक गोशाला भेज दिया जाता। शहर का ऐसा कोई कोना नहीं जहां लावारिस पशुओं का आतंक न हो।
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यदुवंशी स्कूल में प्रवक्ता मनोज कुमार ने बताया कि 29 मार्च की शाम करीब साढ़े 5 बजे घर पर थे। घर के पास ही बच्चे खेल रहे थे। एक बछड़ा बच्चों के पीछे दौड़ने लगा। जब मनोज बच्चों को बचाने के लिए एक छोटी सी डंडी लेकर बछड़े की ओर गए तो बछड़े ने उन पर हमला बोल दिया। एक दीवार के पास पटक दिया। लावारिस गोवंश दोबारा हमला करने ही वाला था कि इसी बची मनोज कुमार के बेटे नीतेश ने अपने बल्ले से मारकर गोवंश को भगाया। मनोज कुमार ने बताया कि उसे कुछ चोटें आई। यह लावारिस गोवंश पूरे एरिया में आतंक का प्रयाय बना है।
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धर्मबीर पटवारी ने अपनी पीड़ा सुनाते हुए बताया कि 20 जुलाई 2018 को महेंद्रगढ़ सब्जी मंडी में सीएम की रैली के लिए तैयारियों को जांच रहे थे, जिसमें एडीसी, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार भी शामिल थे। पीछे की ओर खड़े पटवारी धर्मबीर को लावारिस पशु ने सींगो पर उठाकर कई फीट ऊपर उछाल दिया। गनीमत रही कि वह एक गाड़ी के बोनट पर गिरते हुए नीचे पड़े। अगर सीधे जमीन पर आते तो कई हड्डियां टूट जाती। धर्मबीर पटवारी ने कहा कि गोवंश को लेकर देखकर अब पहले ही दूर हो जाता हूं।
सोमबीर ने बताया कि लावारिस पशु उसे चोटिल कर चुके हैं। पूरे शहर में लावारिस गोवंश का आतंक है। कहीं भी जाओ पशुओं का सामना करना ही पड़ेगा। अब कहां कहां बचेंगे। सोमबीर ने कहा कि गोवंश ने उसे सींग से मारा तो उसे कुछ चोट आई थी। उसे घाव तो भर गए लेकिन मन में हमेशा के लिए डर बैठ गया। अब घर से निकलते ही मन में डर रहता है। पता नहीं पशु कहां से आकर मार देगा।
बुचौली रोड निवासी निरंजन ने बताया कि लावारिस पशुओं के कारण चारों ओर खतरा रहता है। उसने बताया कि वह भी पशु की चपेट में आकर घायल हो चुका है। पशु की चोट के कारण कई दिन तक काम पर नहीं जा सका। नगर पालिका को लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए शिकायत भी दी थी। पालिका ने पशुओं को पकड़ने के लिए अभी कोई अभियान नहीं चलाया। अब आचार संहिता का हवाला दे रहे हैं।