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कथा में कृष्ण और रूकमणी विवाह का प्रसंग सुनाया
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:59 PM IST
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कथा में कृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। सत्यनारायण भगवान मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को कथा वाचक नवीन कौशिक ने श्रद्धालुओं को बताया कि एकादशी व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ है। एकादशी का सारा दिन प्रभु के भजनों में बिताए और रात को परिवार के साथ हरिनाम संकीर्तन करे। कथा व्यास ने बताया कि जब श्री कृष्ण अपनी बांसुरी बजाते तो गोपियां अपनी सुध-बुध भूल कर कृष्ण के पास दौड़ी चली जाती। कथा वाचक ने बताया कि भगवान कृष्ण को केवल विशुद्ध प्रेम से पाया जा सकता है। भक्ति रहित ज्ञान अभिमानी बनाता है। इसलिए ज्ञान के साथ प्रभु भक्ति भी होनी चाहिए। कथा व्यास ने कृष्ण और रूकमणी विवाह का प्रसंग सुनाया। इस अवसर पर नरेश वर्मा, छोटे लाल, राजेंद्र कौशिक, गोपाल कृष्ण, विवेक शर्मा व अनूप शर्मा आदि श्रद्धालु मौजूद थे। इस दौरान श्री कृष्ण और रूकमणी की झांकी दर्शाई गई।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। सत्यनारायण भगवान मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को कथा वाचक नवीन कौशिक ने श्रद्धालुओं को बताया कि एकादशी व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ है। एकादशी का सारा दिन प्रभु के भजनों में बिताए और रात को परिवार के साथ हरिनाम संकीर्तन करे। कथा व्यास ने बताया कि जब श्री कृष्ण अपनी बांसुरी बजाते तो गोपियां अपनी सुध-बुध भूल कर कृष्ण के पास दौड़ी चली जाती। कथा वाचक ने बताया कि भगवान कृष्ण को केवल विशुद्ध प्रेम से पाया जा सकता है। भक्ति रहित ज्ञान अभिमानी बनाता है। इसलिए ज्ञान के साथ प्रभु भक्ति भी होनी चाहिए। कथा व्यास ने कृष्ण और रूकमणी विवाह का प्रसंग सुनाया। इस अवसर पर नरेश वर्मा, छोटे लाल, राजेंद्र कौशिक, गोपाल कृष्ण, विवेक शर्मा व अनूप शर्मा आदि श्रद्धालु मौजूद थे। इस दौरान श्री कृष्ण और रूकमणी की झांकी दर्शाई गई।