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एक बनने से समाज और राष्ट्र की होती है उन्नति : विज्ञानानंद महाराज
Updated Fri, 01 Sep 2017 01:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। बाबा जयरामदास धर्मशाला में श्री गीता विज्ञान प्रचार समिति के तत्वावधान में चल रही भागवत कथा के दौरान विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि एक बनो, नेक बनो। एक बनने से समाज और राष्ट्र की उन्नति होती है। नेक बनने से भगवत प्राप्ति होती है।
उन्हाेंने कहा कि हम जैसा विचार, चिंतन और कार्य करते हैं। उसका प्रभाव समाज पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमें क्षेत्रवाद, भाषावाद आदि वाद-विवादों को भुलाकर एक बनना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि परमात्मा के नाम से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने अजामील, गणिका, गज का प्रसंग सुनाया। कहा कि गरुड़जी भगवान को ढोते रहते हैं, लेकिन जब उन्होंने काकभुसंडी से भगवान की मंगलमयी कथा सुनी तो उनका अज्ञान दूर हुआ। अहिल्या आदि का भगवान ने स्वयं उद्धार किया। परमात्मा के नाम जपने, पढ़ने और सुनने से कल्याण होता है। इस अवसर पर श्रीकिशन मस्ताना, जगदीश, किशन सोनी, हरियाणा गोसेवा आयोग के सदस्य दयाशंकर तिवाड़ी, मूलचंद शर्मा, शिवचरण गुप्ता, हरिराम मेहता, पवन नांगलिया, रामू, मास्टर जयदयाल वर्मा, शकुंतला, अनिल, सुनील आदि मौजूद रहे।
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महेंद्रगढ़। बाबा जयरामदास धर्मशाला में श्री गीता विज्ञान प्रचार समिति के तत्वावधान में चल रही भागवत कथा के दौरान विज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि एक बनो, नेक बनो। एक बनने से समाज और राष्ट्र की उन्नति होती है। नेक बनने से भगवत प्राप्ति होती है।
उन्हाेंने कहा कि हम जैसा विचार, चिंतन और कार्य करते हैं। उसका प्रभाव समाज पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमें क्षेत्रवाद, भाषावाद आदि वाद-विवादों को भुलाकर एक बनना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि परमात्मा के नाम से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने अजामील, गणिका, गज का प्रसंग सुनाया। कहा कि गरुड़जी भगवान को ढोते रहते हैं, लेकिन जब उन्होंने काकभुसंडी से भगवान की मंगलमयी कथा सुनी तो उनका अज्ञान दूर हुआ। अहिल्या आदि का भगवान ने स्वयं उद्धार किया। परमात्मा के नाम जपने, पढ़ने और सुनने से कल्याण होता है। इस अवसर पर श्रीकिशन मस्ताना, जगदीश, किशन सोनी, हरियाणा गोसेवा आयोग के सदस्य दयाशंकर तिवाड़ी, मूलचंद शर्मा, शिवचरण गुप्ता, हरिराम मेहता, पवन नांगलिया, रामू, मास्टर जयदयाल वर्मा, शकुंतला, अनिल, सुनील आदि मौजूद रहे।
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