{"_id":"5cdf07e7bdec22077b4585e6","slug":"181558120423-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के टॉपर बनना चाहते है आईएएस और डॉक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के टॉपर बनना चाहते है आईएएस और डॉक्टर
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आईएएस बनना चाहती है- छवि
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल भुंगारका की छवि ने 487 अंक लेकर जिले में टॉप-10 में पांचवां स्थान बनाया है। छवि ने कहा कि परीक्षा के दौरान रात 12 बजे तक पढ़ाई करती थी। पढ़ाई के दौरान अगर उन्हें कुछ दिक्कत आती थी तो पिता टीचर वेदप्रकाश सहयोग करते थे। छवि का कहना है कि फोन व टीवी से दूर रहती थी। जब कभी पढ़ाई से मन नहीं लगता तो बैडमिंटन खेलती थी। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए अध्यापकों व पिता का पूरा सहयोग रहा। उनका सपना आईएएस बनकर देश सेवा करना व पिता का नाम रोशन करना है। अगर हम जीवन में कड़ी मेहनत करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी जिसका परिणाम आज सबके सामने है। 12वीं में साइंस ग्रुप लेगी।
आईएएस बनना चाहती है - आरती
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की आरती ने 486 अंक हासिल कर जिला टॉप-10 में 6वां स्थान बनाया हैँ। बचपन में ही पिता का साया उठने के बाद नाना के घर जाकर आरती ने पढ़ाई शुरू की। आरती ने कहा कि पढ़ाई के दौरान नाना साधुराम ने उनका पूरा सहयोग किया। घर पर रात 11 बजे पढ़ाई करती थी। पढ़ाई के दौरान वह केवल स्कूल का होमवर्क ही अच्छी तरह से तैयार करती थी। अगर किसी विषय में कुछ समझ में नहीं आता तो अगले दिन अध्यापकों से समझ लेती थी। उसका सपना आईएएस बनने का है। आरती ने दूसरे बच्चे से आह्वान किया बाकी सभी दूसरी अन्य चीजों को छोड़कर अपनी पढ़ाई तथा मंजिल पर फोकस कर भविष्य को उज्जवल बनाए तथा अपने देश व माता-पिता का नाम रोशन करे। उन्होंने कहा कि लक्ष्य पाने के लिए मोबाइल से दूर रहना होगा। 12वीं में साइंस ग्रुप से पढ़ाई करेगी।
दुकानदार की बेटी रितू बनना चाहती है आईएएस
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की जिला टॉपर रितू ने 484 अंक हासिल कर जिला टॉप-10 में आठवां स्थान बनाया हैं। पिता सत्यानंद गांव में ही खल-बिनौले की दुकान चलाते है। रितू ने बताया कि दादा अध्यापक रामौतार घर पर पढ़ाई में सहयोग करते हैं। स्कूल से आने के बाद पांच घंटे पढ़ाई करती थी। किसी विषय में कुछ समझ में नही आता तो दादा की मदद लेकर उसे हल कर लेती थी। घर पर मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं किया और टीवी से हमेशा दूर रही। उनका सपना आईएएस बनकर माता-पिता व क्षेत्र का नाम रोशन करना है। इसके लिए मैं अभी से ही कड़ी मेहनत कर रही हूं। रितू ने अपने अच्छे परिणाम का श्रेय दादा रामौतार को दिया।
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इंजिनियर बनना चाहता है - हिमांशु
टैगोर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हिमांशु ने 482 अंक हासिल कर जिला टॉप-10 में नौंवा स्थान बनाया है। हिमांशु के पिता धर्मेश कुमार खेती बाड़ी का काम करते है। जबकि मां टैगोर स्कूल में हिंदी टीचर है। हिमांशु ने बताया कि पिता दिन-रात खेती बाड़ी में व्यस्त होने के कारण घर पर मां घर पर पढ़ाई करवाती थी। रात को मां 11 बजे तक मां उसके पास बैठी रहती थी। उनकी दिनचर्या में हर रोज स्कूल से आने के बाद एक घंटा क्रिकेट खेलते है। उनकी क्रिकेट में काफी रुचि थी। उन्होंने आगे की पढ़ाई में नॉन मेडिकल लेकर इंजीनियर बनना है। हिमांशु ने बताया कि वह मोबाइल व टीवी से हमेशा दूर रहा।
डॉक्टर बनना चाहते है - नमन
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के नमन ने 481 अंक हासिल कर जिला टॉप -10 में 10वां स्थान बनाया है। नमन के पिता सरकारी स्कूल में अध्यापक है। नमन ने बताया कि घर पर छह से सात घंटे पढ़ाई करते थे। स्कूल होम वर्क के अलावा भी पढ़ाई करते थे। डॉक्टर बनकर देश सेवा करना है। पढ़ाई में जब मन नहीं लगता तो वे बैडमिंटन खेलते थे। उन्होंने कभी ट्यूशन नहीं किया। स्कूल में जो पढ़ाया जाता था उसे रात 11 बजे तक दोहराता था। इस उपलब्धि को हासिल करने में पिता अध्यापक पवन कुमार व अध्यापकों का अहम रोल है। वह हमेशा फोन व टीवी से दूर रहते थे।
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल भुंगारका की छवि ने 487 अंक लेकर जिले में टॉप-10 में पांचवां स्थान बनाया है। छवि ने कहा कि परीक्षा के दौरान रात 12 बजे तक पढ़ाई करती थी। पढ़ाई के दौरान अगर उन्हें कुछ दिक्कत आती थी तो पिता टीचर वेदप्रकाश सहयोग करते थे। छवि का कहना है कि फोन व टीवी से दूर रहती थी। जब कभी पढ़ाई से मन नहीं लगता तो बैडमिंटन खेलती थी। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए अध्यापकों व पिता का पूरा सहयोग रहा। उनका सपना आईएएस बनकर देश सेवा करना व पिता का नाम रोशन करना है। अगर हम जीवन में कड़ी मेहनत करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी जिसका परिणाम आज सबके सामने है। 12वीं में साइंस ग्रुप लेगी।
आईएएस बनना चाहती है - आरती
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की आरती ने 486 अंक हासिल कर जिला टॉप-10 में 6वां स्थान बनाया हैँ। बचपन में ही पिता का साया उठने के बाद नाना के घर जाकर आरती ने पढ़ाई शुरू की। आरती ने कहा कि पढ़ाई के दौरान नाना साधुराम ने उनका पूरा सहयोग किया। घर पर रात 11 बजे पढ़ाई करती थी। पढ़ाई के दौरान वह केवल स्कूल का होमवर्क ही अच्छी तरह से तैयार करती थी। अगर किसी विषय में कुछ समझ में नहीं आता तो अगले दिन अध्यापकों से समझ लेती थी। उसका सपना आईएएस बनने का है। आरती ने दूसरे बच्चे से आह्वान किया बाकी सभी दूसरी अन्य चीजों को छोड़कर अपनी पढ़ाई तथा मंजिल पर फोकस कर भविष्य को उज्जवल बनाए तथा अपने देश व माता-पिता का नाम रोशन करे। उन्होंने कहा कि लक्ष्य पाने के लिए मोबाइल से दूर रहना होगा। 12वीं में साइंस ग्रुप से पढ़ाई करेगी।
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दुकानदार की बेटी रितू बनना चाहती है आईएएस
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की जिला टॉपर रितू ने 484 अंक हासिल कर जिला टॉप-10 में आठवां स्थान बनाया हैं। पिता सत्यानंद गांव में ही खल-बिनौले की दुकान चलाते है। रितू ने बताया कि दादा अध्यापक रामौतार घर पर पढ़ाई में सहयोग करते हैं। स्कूल से आने के बाद पांच घंटे पढ़ाई करती थी। किसी विषय में कुछ समझ में नही आता तो दादा की मदद लेकर उसे हल कर लेती थी। घर पर मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं किया और टीवी से हमेशा दूर रही। उनका सपना आईएएस बनकर माता-पिता व क्षेत्र का नाम रोशन करना है। इसके लिए मैं अभी से ही कड़ी मेहनत कर रही हूं। रितू ने अपने अच्छे परिणाम का श्रेय दादा रामौतार को दिया।
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इंजिनियर बनना चाहता है - हिमांशु
टैगोर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हिमांशु ने 482 अंक हासिल कर जिला टॉप-10 में नौंवा स्थान बनाया है। हिमांशु के पिता धर्मेश कुमार खेती बाड़ी का काम करते है। जबकि मां टैगोर स्कूल में हिंदी टीचर है। हिमांशु ने बताया कि पिता दिन-रात खेती बाड़ी में व्यस्त होने के कारण घर पर मां घर पर पढ़ाई करवाती थी। रात को मां 11 बजे तक मां उसके पास बैठी रहती थी। उनकी दिनचर्या में हर रोज स्कूल से आने के बाद एक घंटा क्रिकेट खेलते है। उनकी क्रिकेट में काफी रुचि थी। उन्होंने आगे की पढ़ाई में नॉन मेडिकल लेकर इंजीनियर बनना है। हिमांशु ने बताया कि वह मोबाइल व टीवी से हमेशा दूर रहा।
डॉक्टर बनना चाहते है - नमन
बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के नमन ने 481 अंक हासिल कर जिला टॉप -10 में 10वां स्थान बनाया है। नमन के पिता सरकारी स्कूल में अध्यापक है। नमन ने बताया कि घर पर छह से सात घंटे पढ़ाई करते थे। स्कूल होम वर्क के अलावा भी पढ़ाई करते थे। डॉक्टर बनकर देश सेवा करना है। पढ़ाई में जब मन नहीं लगता तो वे बैडमिंटन खेलते थे। उन्होंने कभी ट्यूशन नहीं किया। स्कूल में जो पढ़ाया जाता था उसे रात 11 बजे तक दोहराता था। इस उपलब्धि को हासिल करने में पिता अध्यापक पवन कुमार व अध्यापकों का अहम रोल है। वह हमेशा फोन व टीवी से दूर रहते थे।