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आईआईटी में एनसीसी कैडेट को जल संरक्षण के प्रति जागरुक किया
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में चल रही एनसीसी यूनिट के कैडेटों को वर्षा के जल संचयन के प्रति जागरूक किया गया। आईटीआई के प्राचार्य हरविंद्र सिंह ने बताया कि भूजल स्तर को ऊंचा उठाने और पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्षा के जल संचयन पर ध्यान देना होगा। हमें यह याद रखना चाहिए कि जल के स्त्रोत सीमित हैं। वैसे भी ज्यादातर जोहड़ या तो सूख गए हैं या लुप्त हो गए हैं। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए जल संरक्षण खासतौर पर वर्षा जल संचयन आवश्यक है।
एनसीसी प्रभारी कैप्टन वीरेंद्र सेकवाल ने कहा की हर साल जरा सी लापरवाही के कारण लाखों मिलियन गैलन पानी सड़कों और नालियों में व्यर्थ ही बह जाता है। थोड़े से प्रयासों से काफी पानी का संचयन हो सकता है। इसे लेकर बातें तो खूब होती हैं लेकिन इस पर अमल नहीं होता। हर सरकारी और निजी भवन पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था हो जाए तो स्थिति ही बदल जाएगी। उन्होंने बताया कि हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।
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नारनौल। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में चल रही एनसीसी यूनिट के कैडेटों को वर्षा के जल संचयन के प्रति जागरूक किया गया। आईटीआई के प्राचार्य हरविंद्र सिंह ने बताया कि भूजल स्तर को ऊंचा उठाने और पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्षा के जल संचयन पर ध्यान देना होगा। हमें यह याद रखना चाहिए कि जल के स्त्रोत सीमित हैं। वैसे भी ज्यादातर जोहड़ या तो सूख गए हैं या लुप्त हो गए हैं। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए जल संरक्षण खासतौर पर वर्षा जल संचयन आवश्यक है।
एनसीसी प्रभारी कैप्टन वीरेंद्र सेकवाल ने कहा की हर साल जरा सी लापरवाही के कारण लाखों मिलियन गैलन पानी सड़कों और नालियों में व्यर्थ ही बह जाता है। थोड़े से प्रयासों से काफी पानी का संचयन हो सकता है। इसे लेकर बातें तो खूब होती हैं लेकिन इस पर अमल नहीं होता। हर सरकारी और निजी भवन पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था हो जाए तो स्थिति ही बदल जाएगी। उन्होंने बताया कि हार्वेस्टिंग सिस्टम से भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।
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