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मानसेर की आईएमटी पहले फेज में 1220 एकड़ में बन सकती है तो महेंद्रगढ़ में क्यों नहीं: संदीप मालड़ा

Sun, 20 Jan 2019 12:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jan 2019 12:51 AM IST
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मानसेर की आईएमटी पहले फेज में 1220 एकड़ में बन सकती है तो महेंद्रगढ़ में क्यों नहीं: संदीप मालड़ा
पहले फेज में मानेसर की आईएमटी 1220 एकड़ में बन सकती है तो महेंद्रगढ़ में क्यों नहीं : संदीप मालड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। सुंडा राम ट्रस्ट के प्रधान संदीप मालडा ने जिला प्रशासन की ओर से आईएमटी के लिए भेजी गई रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि 1995 में मानेसर में पहले फेज में 1220 एकड़ भूमि पर आईएमटी स्थापित की गई थी। उनके पास भी 1500 एकड़ भूूमि नहीं थीं। जब मानेसर आईएमटी स्थापित हो सकती है तो महेंद्रगढ़ के गांव खुडाना में स्थापित क्यों नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि सीनियर टाउन प्लानर की ओर से सर्वे रिपोर्ट में 1500 एकड़ जमीन का ओब्जेक्शन लगाकर भेजना गलत है। मालड़ा शनिवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के अधिकारियों की गड़बड़ी और लापरवाही की वजह से यह योजना ढिलाई में पड़ गई है। उन्होंने बताया कि आईएमटी की सर्वे रिपोर्ट बनाने में लगभग आठ से दस दिन लग जाते हैं लेकिन यहां अधिकारियों ने एक ही दिन में पूरी रिपोर्ट तैयार कर ली। उन्होंने कहा कि खुडाना गांव में जमीन की कमी नहीं है। बहुत सी जमीन वन विभाग की है। इस प्रकार के बड़े प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार को डी रिजर्वेशन के लिए लिख सकती है। यहां नेशनल पार्क या नेशनल सेंचुरी जैसी चीज नहीं होने के कारण सेंटर से अनुमति आराम से मिल सकती है।
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संदीप मालड़ा ने कहा कि इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप और इंडस्ट्रीयल एरिया में काफी भिन्नताएं तथा सुविधाएं का भी फर्क है। उन्होंने बताया कि आईएमटी में एचएसआईआईडीसी आईए की तुलना में बढ़िया इंफ्रास्ट्रेक्चर उपलब्ध करवाती है। आईए में प्लॉट छोटे काटे जाते हैं जिस कारण वहां लघु तथा सीमांत उद्योग ही स्थापित हो सकतें हैं। छोटे प्लॉट होने के कारण कोई भी बड़ी कंपनी यहां नहीं आ पाएगी। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि इसे बाद में आईएमटी बना दिया जाएगा। जब प्लॉट छोटे हैं तो बड़े उद्योग कैसे स्थापित होंगे।
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उन्होंने शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा से भी निवेदन किया है कि वो उपायुक्त को निर्देश दें कि रिपोर्ट दोबारा बनाई जाए, उस रिपोर्ट में कोई कमी न रह जाएगा। ऊपर की पैरवी वो मंत्री खुद कर लेंगे। उन्होंने बताया कि जिला एचएसआईआईडीसी विभाग केवल बिंदुओं को उल्लेख करें। आईएमटी कहां बननी है या नहीं बननी, ये तो चीफ टाउन प्लानर, शिक्षामंत्री और मुख्यमंत्री देख लेंगे।
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