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वाटर सप्लाई के टैंक सूखे, शहर में होने लगा जल संकट
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहर में पेजयल आपूर्ति के लिए बनाए गए वाटर टैंक सूख गए हैं। वाटर टैंकों में अब एक दिन का पानी भी शेष नहीं है। वहीं, नहर आने में अभी तीन दिन शेष हैं। जिसके बाद टैंकों को भरने में भी एक से दो दिन लगेंगे। ऐसे में शहर में पेयजल किल्लत होने की संभावना बन गई हैं। वहीं शहर के अनेक मोहल्लों में अभी भी पानी की समस्या बनी हुई है। इसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहर नारनौल में पेयजल आपूर्ति नहरों पर आधारित है। इसके लिए शहर में दो जगह वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। नहरों में पानी आने पर इन वाटर टैंकरों को भर लिया जाता है। जिसके चलते शहर में करीब 900 लाख गैलन पानी विभिन्न टैंकों में एकत्र हो जाता है, जो शहर की एक लाख की आबादी के लिए 15 दिन पर्याप्त होता है। 15 दिन बाद नहर आने पर पुन: इन टैंकों को भरा जाता है, मगर इस बार मई में केवल 10 दिन ही नहर आई थी। इसके कारण नसीबपुर में बने वाटर टैंक करीब दो-दो फुट तक खाली रह गए थे। वहीं, चार जून को जाने के बाद 24 जून तक नहर नहीं आई है। जिसकी वजह से रेवाड़ी रोड व नसीबपुर में बने वाटर टैंक सूख गए हैं। इन टैंकों में अब एक दिन का पानी भी नहीं बचा है। वहीं नहर 27 जून से पहले आने की संभावना नहीं है। ऐसे में शहर में पेयजल संकट हो जाएगा।
यहां से होती है पानी की सप्लाई
शहर में पेयजल आपूर्ति करने के लिए रेवाड़ी रोड पर चार वाटर टैंक बनाए गए हैं। वहीं, नसीबपुर गांव में भी दो वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। रेवाड़ी रोड पर बने दो वाटर टैंकों में 40-40 लाख गैलन पानी तथा एक में 80 लाख व एक बड़े टैंक में 160 लाख गैलन पानी आता है। इस प्रकार तीनों टैंकों में 320 लाख गैलन पानी हो जाता है। वहीं, नसीबपुर में बने दो वाटर टैंकों में 286-286 लाख गैलन पानी की क्षमता है। इस हिसाब से करीब 900 लाख गैलन पानी 15 दिन के लिए शहरवासियों के लिए जमा हो जाता है।
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20 दिन से नहीं आई नहर, टैंक सूखे
जिला में 20 दिन से नहर नहीं आई है। जिसके कारण 15 दिन के लिए रखा गया पानी राशनिंग के बाद चल गया, मगर अब शहर के वाटर टैंकों में एक दिन का भी पानी शेष नहीं है। ऐसे में नहर जल्दी नहीं आई तो शहर के लोगों को भयंकर पेयजल किल्लत से सामना करना पड़ेगा।
तीन दिन में होता है एक बार पेयजल आपूर्ति
विभाग ने शहर में 115 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन पानी देने के हिसाब से तीन दिन में एक बार पेयजल आपूर्ति का शेड्यूल बनाया हुआ है। जिसके तहत अलग-अलग मोहल्लों के हिसाब से तीन दिन यानी एक दिन छोड़कर अगले दिन पानी आपूर्ति होता है।
अभी भी है कई जगह पेयजल संकट
शहर के मोहल्ला खड़खड़ी, नलापुर, चौधरियान, सब्जी मंडी, सलामपुरा, पुरानी मंडी समेत अनेक मोहल्लों में अभी भी पेयजल संकट बना हुआ है।
वर्जन
इस बार 15 दिन की बजाय 12 दिन ही नहरों में पानी चला था। जिसके कारण नसीबपुर स्थित जलघर में दो फुट पानी कम जमा हुआ। इससे कुछ जगह पानी की समस्या हुई, मगर राशनिंग कर इसका समाधान किया गया था।
- गोपाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल।
वर्जन
अभी नहर 27 तारीख को आने की संभावना है। नहर आने के बाद जलघरों में पानी भर दिया जाएगा।
- सुरेश कुमार यादव, एसई, नहर विभाग।
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नारनौल। शहर में पेजयल आपूर्ति के लिए बनाए गए वाटर टैंक सूख गए हैं। वाटर टैंकों में अब एक दिन का पानी भी शेष नहीं है। वहीं, नहर आने में अभी तीन दिन शेष हैं। जिसके बाद टैंकों को भरने में भी एक से दो दिन लगेंगे। ऐसे में शहर में पेयजल किल्लत होने की संभावना बन गई हैं। वहीं शहर के अनेक मोहल्लों में अभी भी पानी की समस्या बनी हुई है। इसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहर नारनौल में पेयजल आपूर्ति नहरों पर आधारित है। इसके लिए शहर में दो जगह वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। नहरों में पानी आने पर इन वाटर टैंकरों को भर लिया जाता है। जिसके चलते शहर में करीब 900 लाख गैलन पानी विभिन्न टैंकों में एकत्र हो जाता है, जो शहर की एक लाख की आबादी के लिए 15 दिन पर्याप्त होता है। 15 दिन बाद नहर आने पर पुन: इन टैंकों को भरा जाता है, मगर इस बार मई में केवल 10 दिन ही नहर आई थी। इसके कारण नसीबपुर में बने वाटर टैंक करीब दो-दो फुट तक खाली रह गए थे। वहीं, चार जून को जाने के बाद 24 जून तक नहर नहीं आई है। जिसकी वजह से रेवाड़ी रोड व नसीबपुर में बने वाटर टैंक सूख गए हैं। इन टैंकों में अब एक दिन का पानी भी नहीं बचा है। वहीं नहर 27 जून से पहले आने की संभावना नहीं है। ऐसे में शहर में पेयजल संकट हो जाएगा।
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यहां से होती है पानी की सप्लाई
शहर में पेयजल आपूर्ति करने के लिए रेवाड़ी रोड पर चार वाटर टैंक बनाए गए हैं। वहीं, नसीबपुर गांव में भी दो वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। रेवाड़ी रोड पर बने दो वाटर टैंकों में 40-40 लाख गैलन पानी तथा एक में 80 लाख व एक बड़े टैंक में 160 लाख गैलन पानी आता है। इस प्रकार तीनों टैंकों में 320 लाख गैलन पानी हो जाता है। वहीं, नसीबपुर में बने दो वाटर टैंकों में 286-286 लाख गैलन पानी की क्षमता है। इस हिसाब से करीब 900 लाख गैलन पानी 15 दिन के लिए शहरवासियों के लिए जमा हो जाता है।
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20 दिन से नहीं आई नहर, टैंक सूखे
जिला में 20 दिन से नहर नहीं आई है। जिसके कारण 15 दिन के लिए रखा गया पानी राशनिंग के बाद चल गया, मगर अब शहर के वाटर टैंकों में एक दिन का भी पानी शेष नहीं है। ऐसे में नहर जल्दी नहीं आई तो शहर के लोगों को भयंकर पेयजल किल्लत से सामना करना पड़ेगा।
तीन दिन में होता है एक बार पेयजल आपूर्ति
विभाग ने शहर में 115 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन पानी देने के हिसाब से तीन दिन में एक बार पेयजल आपूर्ति का शेड्यूल बनाया हुआ है। जिसके तहत अलग-अलग मोहल्लों के हिसाब से तीन दिन यानी एक दिन छोड़कर अगले दिन पानी आपूर्ति होता है।
अभी भी है कई जगह पेयजल संकट
शहर के मोहल्ला खड़खड़ी, नलापुर, चौधरियान, सब्जी मंडी, सलामपुरा, पुरानी मंडी समेत अनेक मोहल्लों में अभी भी पेयजल संकट बना हुआ है।
वर्जन
इस बार 15 दिन की बजाय 12 दिन ही नहरों में पानी चला था। जिसके कारण नसीबपुर स्थित जलघर में दो फुट पानी कम जमा हुआ। इससे कुछ जगह पानी की समस्या हुई, मगर राशनिंग कर इसका समाधान किया गया था।
- गोपाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल।
वर्जन
अभी नहर 27 तारीख को आने की संभावना है। नहर आने के बाद जलघरों में पानी भर दिया जाएगा।
- सुरेश कुमार यादव, एसई, नहर विभाग।