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गोशाला में गायों के मरने का सिलसिला जारी, दो दिन में फिर मरी नौ गायें

Tue, 03 Oct 2017 10:07 PM IST
Updated Tue, 03 Oct 2017 10:07 PM IST
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गोशाला में गायों के मरने का सिलसिला जारी, दो दिन में फिर मरी नौ गायें
-प्रबंधक कमेटी के दावों की खुली पोल, पशु चिकित्सक ने माना चारे के अभाव में हो रही है मौत
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फोटो नंबर 12 व 13
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। रेवाडी रोड पर स्थित श्री गोपाल गोशाला में चारे और उचित देखरेख के अभाव में हो रही गायों की मौत का सिलसिला रुक नहीं पा रहा है। पिछले दो दिनों में गोशाला में फिर एक साथ नौ गायों के मरने का आंकड़ा सामने आया है। हालांकि यहां की एडहॉक कमेटी मरने वाली गायों को गोशाला की नहीं मान रही है। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि मरने वाली वो गायें हैं जो पिछले दो तीन माह के दौरान बाहर से पकड़कर लाई गई थी और इन्होंने प्लास्टिक की थैली खाई हुई है। दूसरी तरफ गोशाला में गायों के उपचार के लिए तैनात किए चिकित्सक सुनील जाखड़ खुद ही मान रहे हैं कि गोशाला में चारे व उचित देखभाल के अभाव में गायों की मौत हो रही हैं। मृत गायों की तस्वीर, गोशाला के वेतनभोगी कर्मचारी और यहां के पशु चिकित्सक के बयान ना केवल गोशाला की मौजूदा एडहॉक कमेटी के दावों और कार्यशैली की पोल खोल रहे हैं बल्कि नारनौल के उन तथाकथित गो-भक्तों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह 27 सितंबर की शाम को जब गोशाला में एक साथ छह गायों की मरने की जानकारी उपायुक्त डॉ.गरिमा मित्तल लगी तो उन्होंने तुरंत इस पर संज्ञान लिया। अगले ही दिन नगर परिषद के ईओ, पशु विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने गोशाला का निरीक्षण किया। इसके बाद दोपहर में एसडीएम जगदीश शर्मा ने गोशाला का दौरा करने के बाद अपने कार्यालय में एडहॉक कमेटी की बैठक ली। इसमें एडहॉक कमेटी के सदस्यों ने गायों की मौत का कारण थैलियां बताकर मामले की लीपापोती कर दी। साथ ही बैठक में गोशाला में नियमित रूप से पशु चिकित्सक की नियुक्ति और चारा भरपूर मात्रा में देने का आश्वासन देकर प्रशासनिक अधिकारियों को संतुष्ट कर दिया गया।
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इधर गोशाला में धरातल पर चारा पानी व देखरेख के मामले में सब कुछ वैसा ही रहा। एक चिकित्सक जरूर लगाया गया, लेकिन चारे के अभाव में बिगड़ी गायों की हालत सुधरने की बजाय बिगड़ने का सिलसिला जारी रहा। सोमवार देर शाम एक गोभक्त की सूचना पर गोशाला जाकर देखा गया तो पिछले दो दिनों में नौ गायों के मरने का आंकड़ा सामने आया। मौके पर छह गाय मृत पड़ी थीं जबकि तीन गायों को सुबह उठाकर दफनाया जा चुका था।
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गत वर्ष जनवरी माह में मरी थी अनेक गाय
पिछले साल जनवरी 2016 में कड़ाके की ठंड के दौरान यहां गायों के मरने का सिलसिला शुरू हुआ तो शहर के अनेक तथाकथित गोभक्त गोशाला पहुंच गए थे। तत्कालीन गोशाला प्रबंधक कमेटी पर गंभीर आरोप लगाये गए थे। इसके चलते प्रबंधक कमेटी ने इस्तीफा दे दिया था और प्रशासन ने एक एडहॉक कमेटी बना दी थी। इसमें 14 सदस्यों के अलावा चार अधिकारी भी शामिल किए गए थे। अब एडहॉक कमेटी की हालत तो यह है कि इन सदस्यों की रोजाना गोशाला में आकर गायों की सेवा व देखरेख करना तो दूर इन लोगों की संख्या बैठक में पूरी नहीं होती है। यह बात खुद कमेटी के एक सदस्य मान रहे हैं। इतना ही नहीं इनका तो यहां तक कहना है कि 14 आदमियों में से एक सदस्य तो ऐसा है तो पिछले बीस माह के दौरान एक दिन भी यहां नहीं आया है। वहीं उस दौरान गोभक्त होने का दंभ भरने वाले तो इन दिनों गोशाला में मर रही गायों का कारण तक पूछने नहीं आ रहे हैं।
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सोमवार-मंगलवार को गोशाला में गायें मरी होने की कोई जानकारी नहीं हैं। इस बारे में पशु विभाग के निदेशक से बात कर जल्द कोई कार्रवाई की जाएगी।
-जगदीश कुमार, एसडीएम
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