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जिले में 1201 आंगनबाड़ी सेंटरों में से 796 पर लटके ताले,23097 बच्चों को उठानी पड़ रही है परेशानी

Sat, 02 Mar 2019 12:26 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 02 Mar 2019 12:26 AM IST
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जिले में 1201 आंगनबाड़ी सेंटरों में से 796 पर लटके ताले,23097 बच्चों को उठानी पड़ रही है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। जिले में आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। इससे जिले में 1201 सेंटरों में से करीब 796 सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। नतीजतन जिले में सेंटरों पर बच्चों को नियमित पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा है। जिले में 23097 बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जिले में आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स अपनी मांगों को लेकर 22 फरवरी से हड़ताल पर चल रही है। इससे आंगनबाड़ी सेंटरों पर चलाई जा रही योजनाएं ठप है। रोजाना बच्चों व गर्भवती महिलाओं को सेंटर से वापस लौटना पड़ रहा है। महिलाएं बच्चों को लेकर सेंटर पर आती है कि लेकिन कई सेंटरों पर ताला बंद होने के कारण लौटना पड़ रहा है। इस सेंटरों पर बच्चों को शिक्षा देने के साथ कन्या के जन्म पर कुआं पूजन कराना, बच्चों व गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों को खाना उपलब्ध कराने जैसे कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर करती हैं। प्रधानमंत्री कन्या जन्म के फार्म भरवाने का कार्य भी होता है। हड़ताल से यह कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिका यूनियन ने 14 फरवरी से सांकेतिक धरना शुरू किया था। इस दौरान सेंटर चल रहे थे। 22 फरवरी से आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स हड़ताल पर चले गए। ऐसे में जिले के सभी सेंटर नियमित नहीं खुल रहे हैं।
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शून्य से छह साल के बच्चों के लिए आहार की सुविधा
आंगनबाड़ी सेंटरों पर शून्य से छह माह के बच्चों के लिए सेंटरों पर पौष्टिक आहार दिया जाता है। जिले में शून्य से छह माह तक 6075 बच्चे और छह माह से तीन साल के 17022 बच्चे हैं। जिले में कुल 23097 बच्चे आंगनबाड़ी सेंटरों पर पंजीकृत हैं। जिले में कुल 1201 सेंटर है। इसमें 1201 आंगनबाड़ी वर्कर्स और 1195 हेल्पर्स कार्यरत है। इसके अलावा इनमें नर्सरियों में पढ़ने वाले बच्चे भी है।

ये मिलते है पौष्टिक आहार
महिला व बाल विकास विभाग के अनुसार बच्चों को दलिया, आलू-पूरी, मीठे चावल, परांठे, पुलाव, पंजीरी व अन्य सामान देने का प्रावधान है।

ये हो रहा है असर
बच्चे और गर्भवती महिलाओं की सेहत सुधार की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स की होती है। इसके लिए बच्चों को कई प्रकार के पौष्टिक आहार दिए जाते हैं। इस पर सरकार करोड़ रुपये खर्च करती है। हड़ताल के कारण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हड़ताल से पूरे समय सेंटर नहीं चल रहे है।

वर्जन
कार्य पर न जाने वाली आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स को नोटिस जारी किया था। सभी ने सामूहिक रुप से जवाब दिया है। शुक्रवार को 796 वर्कर्स और 800 हेल्पर्स हड़ताल पर रही। इससे सेंटरों पर बच्चों समेत अन्य को परेशानी हो रही है। सभी 14 फरवरी से हड़ताल पर चल रही है। जबकि कारण बताओ नोटिस में 22 फरवरी से हड़ताल पर जाने की बात कहीं है। उनके जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं हैं। कार्रवाही करने के लिए विभाग से राय ली जाएगी।

- आशा शर्मा, जिला महिला एवं बाल अधिकारी।

वर्जन
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पहले सांकेतिक धरना देकर सरकार को चेताया था। इसके बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। सेंटरों पर बच्चों व महिलाओं को हो रही असुविधा के लिए सरकार जिम्मेदार है। अधिकारियों के दबाव के बाद भी काफी कार्यकर्ता हड़ताल पर चल रही है।
- कृष्णा देवी, जिला प्रधान, आंगनबाड़ी यूनियन।
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