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अटेली नपा के पांच पार्षदों की सदस्यता पर खतरा
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मंडी अटेली। अटेली नगरपालिका ऐसी नगरपालिका है, जिसका प्रधान व उप प्रधान का चुनाव 13 महीने बीतने के बाद भी नहीं हो पाया। अब नगरपालिका का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। पांच पार्षदों की सदस्यता रद्द होने का खतरा मंडारा रहा है, क्योंकि म्यूनिसिपल एक्ट 1973 सेक्शन 14-एक सी के तहत अगर मेंबर लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो उसे मेंबर पद से हटाने का प्रावधान है। यही तर्क लेकर नगर के पूर्व पार्षद अनिल गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई है। याचिका में पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है जो चुनावी बैठक में नहीं पहुंचे। उनके कारण नगर पालिका प्रधान व उप प्रधान का चुनाव नहीं हो सका। प्रधान का चुनाव न होने से नगरपालिका का विकास रूका पड़ा है। हाईकोर्ट में याचिका डालने वाले पूर्व पार्षद अनिल गुप्ता ने सभी 11 पार्षदों सहित एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, म्यूनिसिपल सेक्रेटरी, स्टेट इलेक्शन कमेटी, जिला उपायुक्त, एसडीएम, सचिव नगरपालिका को पार्टी बनाया है। नौ जुलाई को याचिका पर सुनवाई होनी है।
बता दें कि है कि अटेली नगरपालिका की आठ चुनावी बैठक हो चुकी है। पांच पार्षद लगातार तीन से अधिक बैठकों में नहीं पहुंचे। नगरपालिका का 13 मई 2018 को चुनाव हुए थे। 13 महीने होने को है लेकिन प्रधान व उप प्रधान का चुनाव नहीं हो पाया है। चुनावी पहली बैठक 14 जून 2018 को हुई। जिसमें कोई नहीं पहुंचा जिससे बैठक रद्द करनी पड़ी। दूसरी बैठक 22 जून 2018 को हुई। इसके बाद 23 जुलाई, 15 सितंबर, तीन अक्टूबर, दो नवंबर, 12 दिसंबर,12 जनवरी 2019 को चुनावी बैठक हुई। अनिल गुप्ता ने बताया कि 20 मार्च को चुनावी बैठक में न पहुंचने वाले पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की शिकायत अधिकारियों से की लेकिन अधिकारियों ने कुछ नहीं किया। तब कोर्ट का सहारा लेना पड़ा है।
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बता दें कि है कि अटेली नगरपालिका की आठ चुनावी बैठक हो चुकी है। पांच पार्षद लगातार तीन से अधिक बैठकों में नहीं पहुंचे। नगरपालिका का 13 मई 2018 को चुनाव हुए थे। 13 महीने होने को है लेकिन प्रधान व उप प्रधान का चुनाव नहीं हो पाया है। चुनावी पहली बैठक 14 जून 2018 को हुई। जिसमें कोई नहीं पहुंचा जिससे बैठक रद्द करनी पड़ी। दूसरी बैठक 22 जून 2018 को हुई। इसके बाद 23 जुलाई, 15 सितंबर, तीन अक्टूबर, दो नवंबर, 12 दिसंबर,12 जनवरी 2019 को चुनावी बैठक हुई। अनिल गुप्ता ने बताया कि 20 मार्च को चुनावी बैठक में न पहुंचने वाले पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की शिकायत अधिकारियों से की लेकिन अधिकारियों ने कुछ नहीं किया। तब कोर्ट का सहारा लेना पड़ा है।
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