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134-ए के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार
Updated Tue, 22 May 2018 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
शिक्षा अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई व अन्य सुविधाओं के साथ किए जा रहे भेदभाव का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इस भेदभाव को लेकर बच्चों के अभिभावकों ने शिक्षा अधिकारी से शिक्षा मंत्री तक मिल चुके हैं, लेकिन निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी करने पर उतारू है। वे अधिकारियों व सरकार के नियमों को धता बताकर शिक्षा अधिनियम 134ए के तहत स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के साथ भेदभाव कर रहे है। सोमवार को एक बार फिर से जन मुद्दे आंदोलन के प्रधान सतीश बड़गुर्जर व रोहताश सिंहमार के नेतृत्व में अभिभावक अपने बच्चों के साथ डीसी डॉ. गरिमा मित्तल से मिलकर उक्त स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
इससे पूर्व अभिभावक व बच्चे रेस्ट हाउस के नजदीक चितवन वाटिका में एकत्रित हुए। जहां उन्होंने विचार-विमर्श कर निजी स्कूल संचालक के खिलाफ चितवन वाटिका से प्रदर्शन करते हुए महावीर चौक से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर पहले एसडीएम जगदीश शर्मा व उसके बाद डीसी डॉ. गरिमा मित्तल के सामने बच्चों की समस्याओं को रखा। इस पर डीसी डॉ. गरिमा मित्तल ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित में जवाब देने को लिखा है। उपायुक्त ने अभिभावकों व बच्चों को डीईओ द्वारा लिखित में जवाब देने के बाद उक्त स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
अभिभावकों ने जड़े आरोप
इस दौरान डीसी से मिले अभिभावकों में सुरेंद्र, अशोक, सतीश, विजय लक्ष्मी, सरोज, संतलाल, मोहन सिंह, कुलदीप, नरेश व सीमा आदि ने बताया कि निजी स्कूल संचालक उनके बच्चों को उनकी कक्षा के बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाने की बजाय अलग कक्षा में सभी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ा रहे हैं। वहीं, एक महीने बाद भी बच्चों को स्कूल शिक्षकों द्वारा एक बार भी होमवर्क नहीं दिया गया और न ही कापी चेक की गई। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट किराया देने के बावजूद भी निजी स्कूल संचालक बच्चों को स्कूल वाहनों में बैठाने को तैयार नहीं हैं। बच्चों के साथ स्कूल में हो रहे इस भेदभाव को लेकर अभिभावकों में भारी रोष है। इससे उनके बच्चों में हीन भावना पैदा होने लगी है तथा बच्चे डिप्रेशन में भी आने लगे हैं।
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डीईओ ने स्कूल प्रधानाचार्यों को किया था तलब
निजी स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों के साथ किए जा रहे भेदभाव को लेकर गत 17 मई को भी अभिभावक एसडीएम से मिलकर कार्रवाई करने की गुहार लगाई थी। इस पर एसडीएम ने डीईओ को निर्देश दिए थे। इसके बाद डीईओ ने उक्त सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को अपने कार्यालय में तलब कर सख्त निर्देश दिए थे। साथ ही डीईओ ने संबंधित निजी स्कूलों पर नजर रखने के लिए बीईओ राजेंद्र यादव व सुनील दत्त यादव को जिम्मेवारी सौंपी थी। इसके बावजूद भी निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी करने से नहीं मान रहे है।
अभिभावक शिक्षा मंत्री से भी कर चुके हैं शिकायत
अभिभावकों ने बताया कि इसकी शिकायत सात मई को शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा से भी की थी। मंत्री ने डीईओ को मामले में जल्द उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निजी स्कूल संचालकों के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है।
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नारनौल।
शिक्षा अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ पढ़ाई व अन्य सुविधाओं के साथ किए जा रहे भेदभाव का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इस भेदभाव को लेकर बच्चों के अभिभावकों ने शिक्षा अधिकारी से शिक्षा मंत्री तक मिल चुके हैं, लेकिन निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी करने पर उतारू है। वे अधिकारियों व सरकार के नियमों को धता बताकर शिक्षा अधिनियम 134ए के तहत स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के साथ भेदभाव कर रहे है। सोमवार को एक बार फिर से जन मुद्दे आंदोलन के प्रधान सतीश बड़गुर्जर व रोहताश सिंहमार के नेतृत्व में अभिभावक अपने बच्चों के साथ डीसी डॉ. गरिमा मित्तल से मिलकर उक्त स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
इससे पूर्व अभिभावक व बच्चे रेस्ट हाउस के नजदीक चितवन वाटिका में एकत्रित हुए। जहां उन्होंने विचार-विमर्श कर निजी स्कूल संचालक के खिलाफ चितवन वाटिका से प्रदर्शन करते हुए महावीर चौक से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर पहले एसडीएम जगदीश शर्मा व उसके बाद डीसी डॉ. गरिमा मित्तल के सामने बच्चों की समस्याओं को रखा। इस पर डीसी डॉ. गरिमा मित्तल ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित में जवाब देने को लिखा है। उपायुक्त ने अभिभावकों व बच्चों को डीईओ द्वारा लिखित में जवाब देने के बाद उक्त स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
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अभिभावकों ने जड़े आरोप
इस दौरान डीसी से मिले अभिभावकों में सुरेंद्र, अशोक, सतीश, विजय लक्ष्मी, सरोज, संतलाल, मोहन सिंह, कुलदीप, नरेश व सीमा आदि ने बताया कि निजी स्कूल संचालक उनके बच्चों को उनकी कक्षा के बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाने की बजाय अलग कक्षा में सभी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ा रहे हैं। वहीं, एक महीने बाद भी बच्चों को स्कूल शिक्षकों द्वारा एक बार भी होमवर्क नहीं दिया गया और न ही कापी चेक की गई। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट किराया देने के बावजूद भी निजी स्कूल संचालक बच्चों को स्कूल वाहनों में बैठाने को तैयार नहीं हैं। बच्चों के साथ स्कूल में हो रहे इस भेदभाव को लेकर अभिभावकों में भारी रोष है। इससे उनके बच्चों में हीन भावना पैदा होने लगी है तथा बच्चे डिप्रेशन में भी आने लगे हैं।
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डीईओ ने स्कूल प्रधानाचार्यों को किया था तलब
निजी स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों के साथ किए जा रहे भेदभाव को लेकर गत 17 मई को भी अभिभावक एसडीएम से मिलकर कार्रवाई करने की गुहार लगाई थी। इस पर एसडीएम ने डीईओ को निर्देश दिए थे। इसके बाद डीईओ ने उक्त सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को अपने कार्यालय में तलब कर सख्त निर्देश दिए थे। साथ ही डीईओ ने संबंधित निजी स्कूलों पर नजर रखने के लिए बीईओ राजेंद्र यादव व सुनील दत्त यादव को जिम्मेवारी सौंपी थी। इसके बावजूद भी निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी करने से नहीं मान रहे है।
अभिभावक शिक्षा मंत्री से भी कर चुके हैं शिकायत
अभिभावकों ने बताया कि इसकी शिकायत सात मई को शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा से भी की थी। मंत्री ने डीईओ को मामले में जल्द उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निजी स्कूल संचालकों के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है।