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एडीआर सेंटर में महिला एवं बाल सशक्तिकरण विषय पर वर्कशाप आयोजित
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। न्यायालय परिसर में स्थित एडीआर सेंटर में बुधवार को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय जाट पाली के कानून विषय के छात्रों के लिए महिला एवं बाल सशक्तीकरण विषय पर एक वर्कशाप का आयोजन किया। कार्यक्रम के अंत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया ने छात्रों को सर्टिफिकेट वितरित किए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विवेक यादव ने कहा कि इस तरह की वर्कशाप अंतिम आदमी को न्याय देने में सहायक होती हैं। इन छात्रों को भविष्य में किसी न किसी रूप में न्यायिक प्रणाली में शामिल होना है। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम जरूरी हैं ताकि बच्चों और महिलाओं को न्याय दिलाने में ये छात्र अपनी अहम भूमिका निभा सकें।
केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. प्रदीप ने कहा कि जिन लोगों के पास वकील तक जाने की हैसियत नहीं है। उन लोगों को न्याय देने के लिए नालसा एक्ट बनाया गया है। गर्व की बात है कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा सबसे पहले पूर्व वैवाहिक परामर्श केंद्र की शुरुआत इस जिले से हुई। डॉ. प्रदीप ने विभिन्न संस्थाओं के आंकड़ों से महिलाओं व बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराध को रखा और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कानून बनाने से कुछ नहीं होता। इसके लिए सभी को जागरूक होना होगा। केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. अंजू घरेलू हिंसा, कार्य स्थल पर यौन अपराध व लैंगिक भेदभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस मौके पर डॉ. मीना यादव व शुभम जिंदल ने भी छात्रों को संबोधित किया।
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नारनौल। न्यायालय परिसर में स्थित एडीआर सेंटर में बुधवार को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय जाट पाली के कानून विषय के छात्रों के लिए महिला एवं बाल सशक्तीकरण विषय पर एक वर्कशाप का आयोजन किया। कार्यक्रम के अंत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया ने छात्रों को सर्टिफिकेट वितरित किए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विवेक यादव ने कहा कि इस तरह की वर्कशाप अंतिम आदमी को न्याय देने में सहायक होती हैं। इन छात्रों को भविष्य में किसी न किसी रूप में न्यायिक प्रणाली में शामिल होना है। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम जरूरी हैं ताकि बच्चों और महिलाओं को न्याय दिलाने में ये छात्र अपनी अहम भूमिका निभा सकें।
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केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. प्रदीप ने कहा कि जिन लोगों के पास वकील तक जाने की हैसियत नहीं है। उन लोगों को न्याय देने के लिए नालसा एक्ट बनाया गया है। गर्व की बात है कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा सबसे पहले पूर्व वैवाहिक परामर्श केंद्र की शुरुआत इस जिले से हुई। डॉ. प्रदीप ने विभिन्न संस्थाओं के आंकड़ों से महिलाओं व बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराध को रखा और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कानून बनाने से कुछ नहीं होता। इसके लिए सभी को जागरूक होना होगा। केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. अंजू घरेलू हिंसा, कार्य स्थल पर यौन अपराध व लैंगिक भेदभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस मौके पर डॉ. मीना यादव व शुभम जिंदल ने भी छात्रों को संबोधित किया।
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