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श्रीमद् भागवत कथा

Sun, 17 Sep 2017 01:15 AM IST
Updated Sun, 17 Sep 2017 01:15 AM IST
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श्रीमद् भागवत कथा
अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। भारत वर्ष ऋषि मुनियों और संतों का देश है, देवताओं ने भी समय-समय पर महापुरुषों की शरण ली है। इतिहास और हमारे ग्रंथ इस बात के गवाह हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमने ऐसे देश में जन्म लिया है।

यह बात शुक्रवार की शाम को बाबा जयरामदास धर्मशाला में भागवत कथा के दौरान वृंदावन से पधारे स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने व्यक्त किए। कार्यक्रम के आयोजक श्री सतगुरु सेवा समिति महेंद्रगढ़ के प्रधान सुरेश राजस्थानी और वरिष्ठ कार्यकर्ता दलीप शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि इस वर्ष भी श्रीमद् भागवत कथा एक सप्ताह तक चलेगी। इसका समापन आगामी 19 सितंबर को यज्ञ और भंडारे के साथ होगा। स्वामी ने कृष्ण जन्म का संजीव वृतांत सुनाया। उन्होंने बताया कि देवताओं ने भी दु:ख भोगा है। भगवान रामचंद्र और वासुदेव इसके उदाहरण हैं। इसलिए सुख-दुख जीवन का अभिन्न हिस्सा है। प्रत्येक स्थिति में हमें प्रभु का स्मरण करना चाहिये। स्वामी ने युवाओं से कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन अहंकार है, इसलिए कभी अहंकार न करें। इस मौके पर प्रस्तुत झांकी ने सभी का मन मोह लिया। भजन ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की...’ पर श्राद्धलु झूम उठे। इस अवसर पर किशन चंद बोहरा, अमित गोयल, प्रेम पाल वाले, रामप्रताप शर्मा, हनुमान प्रसाद, किशन मस्ताना, कुसुम अहरोदिया, राजेश देवी, प्रमेश्वरी देवी, सरपंच रामनिवास, मनोज जेरपुरिया, नरेश शर्मा आदि उपस्थित थे।
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