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डायरिया नियंत्रित होने पर भी पीड़ित को 14 दिनों तक दवाई लेनी जरूरी
Updated Wed, 13 Sep 2017 12:56 AM IST
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डायरिया नियंत्रित होने पर भी पीड़ित को 14 दिनों तक दवाई लेनी जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। डायरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इसके लिए सीएचसी के इंचार्ज डॉ. मनीष यादव मंगलवार को मरीजों को जरूरी बातें बताईं। साथ ही कहा कि डायरिया सही होने के बाद भी पीड़ित को 14 दिन तक दवाई लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को स्वच्छता की जानकारी नहीं होती। वे दूषित पदार्थों को खा लेते हैं। कई बार बिना हाथ साफ किए खाना खा लेते है। इससे उनकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। सा थ ही उसे उल्टी-दस्त की समस्या होने लगती है। अधिकांश माता-पिता शुरुआती दौर में उल्टी-दस्तों को गंभीरता से नहीं लेते। नाजुक हालात होने पर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। तब तक पीड़ित के शरीर में पानी और जिंक की कमी हो जाती है। इससे उसकी जान को खतरा हो जाता है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में डायरिया के बैक्टिरिया तेजी से फैलते हैं। समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग डायरिया रोकथाम अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान आशा वर्कर घर-घर जाकर 0-5 साल के बच्चों की सूची बनाएंगी। उन्होंने बताया कि कई माता-पिता थोड़ी राहत मिलते ही बच्चे की दवाई बंद कर देते हैं। इससे दोबारा बैक्टिरिया प्रभावी होने की संभावना रहती है। इसलिए बच्चे को 14 दिनों तक नियमित रूप से जिंक और ओआरएस घोल देते रहें। साथ ही माता का दूध पिलाना भी जरूरी है। सीएचसी के इंचार्ज डा. मनीष ने कहा कि दिन में चार बार से अधिक दस्त होने पर पीड़ित को नजदीकी अस्पताल में रेफर कर दें।
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अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। डायरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इसके लिए सीएचसी के इंचार्ज डॉ. मनीष यादव मंगलवार को मरीजों को जरूरी बातें बताईं। साथ ही कहा कि डायरिया सही होने के बाद भी पीड़ित को 14 दिन तक दवाई लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को स्वच्छता की जानकारी नहीं होती। वे दूषित पदार्थों को खा लेते हैं। कई बार बिना हाथ साफ किए खाना खा लेते है। इससे उनकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। सा थ ही उसे उल्टी-दस्त की समस्या होने लगती है। अधिकांश माता-पिता शुरुआती दौर में उल्टी-दस्तों को गंभीरता से नहीं लेते। नाजुक हालात होने पर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। तब तक पीड़ित के शरीर में पानी और जिंक की कमी हो जाती है। इससे उसकी जान को खतरा हो जाता है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में डायरिया के बैक्टिरिया तेजी से फैलते हैं। समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग डायरिया रोकथाम अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान आशा वर्कर घर-घर जाकर 0-5 साल के बच्चों की सूची बनाएंगी। उन्होंने बताया कि कई माता-पिता थोड़ी राहत मिलते ही बच्चे की दवाई बंद कर देते हैं। इससे दोबारा बैक्टिरिया प्रभावी होने की संभावना रहती है। इसलिए बच्चे को 14 दिनों तक नियमित रूप से जिंक और ओआरएस घोल देते रहें। साथ ही माता का दूध पिलाना भी जरूरी है। सीएचसी के इंचार्ज डा. मनीष ने कहा कि दिन में चार बार से अधिक दस्त होने पर पीड़ित को नजदीकी अस्पताल में रेफर कर दें।
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