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फैला डेंगू व मलेरिया नहीं हैं बचाव के संसाधन
Updated Sun, 01 Oct 2017 11:23 PM IST
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फैल रही मौसमी बीमारियां, बचाव के साधन नहीं
-दस में से अधिकतर मशीन हो चुकी हैं खराब, नारनौल नप के पास है केवल एक ही फॉगिंग मशीन, दो हैं खराब
फोटो नंबर चार व पांच
देवेंद्र यादव
नारनौल। इन दिनों जिले के अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। गांवों के साथ-साथ शहरों में भी डेंगू के मरीज अस्पतालों में जा रहे हैं। अक्टूबर में डेंगू के मरीज ज्यादा आते हैं। उधर, जिले में फॉगिंग के लिए प्रयुक्त की जाने वाली मशीनें खराब पड़ी हैं। नारनौल शहर के लिए एक फॉगिंग मशीन ही है, वह भी कई बार खराब रहती है। दो मशीनें खराब हैं।
गत वर्ष तक मच्छरों को मारने के लिए स्वास्थ्य विभाग शहर में फॉगिंग करवाता था। अब ऐसा नहीं है। शहर में फॉगिंग अब नगर परिषद या नगर पालिका अपने कर्मचारियों से करवा रही है। जिम्मेवारी हटने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 8 मशीनों को नगर पालिका व नगर परिषद में गत वर्ष भिजवा दिया गया था। इसमें 2 महेंद्रगढ़ नगर पालिका, 2 अटेली नगर पालिका, 2 कनीना नगर पालिका और 2 नारनौल नगर परिषद में दी गई है। नारनौल नप में गत वर्ष एक मशीन खराब हो गई। वहीं दूसरी मशीन इस बार एक दो जगह फॉगिंग कराने के बाद खराब हो गई है। इसके बाद एक नई मशीन खरीदी गई।
दो बड़े शहर, पांच कस्बे, 346 गांव: मशीन 10
जिला में दो बड़े शहर नारनौल व महेंद्रगढ़ हैं। इसके अलावा पांच बड़े कस्बे अटेली, कनीना, नांगल चौधरी, निजामपुर व सतनाली सहित 346 गांव हैं। इनकी आबादी करीब 9 लाख 46 हजार है। इसके लिए केवल दस फॉगिंग मशीनें ही स्वास्थ्य विभाग के पास थीं। इनको एक साल पूर्व नगर परिषद व पालिकाओं को सौंप दिया गया है।
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अस्पताल में अलग से बनाया वार्ड
पिछले वर्ष के मलेरिया व डेंगू के प्रकोप से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष अपने स्तर पर भी प्रयास किया है। जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में 10 बेड का एक वार्ड स्थापित कर दिया गया है। डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को सीधे नारनौल के नागरिक अस्पताल में लेकर आए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम इन दिनों जागरूकता अभियान भी चलाए हुए है। वहीं जहां डेंगू या मलेरिया होने की सूचना मिलती है, वहां विभाग की टीम घर-घर जाकर जांच करती है। उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम निजी कार्यालय व घरों में जाकर जांच कर रही है। इस जांच में टीम देख रही है कि किसी के घर या कार्यालय के कूलरों या टंकियों में लारवा तो नहीं पनप रहा। अगर कहीं लारवा पनपता मिलता है तो कार्रवाई की जाती है और लोगों को नोटिस दिया जाता है।
ये हैं मलेरिया का आंकड़ा
15-20 दिन पहले वायरल पीड़ितों की संख्या में इजाफा हुआ था, मगर अब डेंगू व मलेरिया के मरीज भी आने लग गए हैं। सितंबर अंत से अक्टूबर माह तक डेंगू व मलेरिया फैलने की आशंकाएं ज्यादा बनी रहती हैं। ऐसे में प्रशासन को इससे निपटने के लिए हर समय तैयार रहने की जरूरत है।
रविवार को अनेक जगह की गई फॉगिंग
नप ने रविवार को अनेक जगह फॉगिंग कराई। नप की चेयरपर्सन भारती सैनी ने बताया कि डेंगू व मलेरिया के मामले सामने आने के बाद अब पूरे शहर में फॉगिंग कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी शहर के कई वार्डों में फॉगिंग कराई गई थी। उन्होंने बताया कि रविवार को शहर के अनेक मोहल्लों में फॉगिंग कराई गई है।
वर्ष मामले
2011 360
2012 308
2013 153
2014 36
2015 32
2016 24
2017 20 सितंबर तक
डेंगू का आंकड़ा
वर्ष मामले
2014 02
2015 05
2016 03
2017 04 सितंबर तक
मलेरिया का आंकड़ा
मलेरिया के लक्षण
सर्दी व कंपन के साथ तेज बुखार।
उल्टियां व सिर दर्द।
गर्मी लगना और पसीने के साथ बुखार का उतरना।
बुखार हर रोज, एक दिन छोड़कर या फिर चौथे दिन आना।
कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।
- कैसे करें मरीज का उपचार
रोगी की रक्त पट्टिका बनाना और शीघ्र अति शीघ्र इसकी जांच करवाना।
रक्त पट्टिका बनाने के उपरांत क्लोरोक्वीन की गोलियां खिलाना।
मलेरिया घोषित होने पर रोगी को कूल उपचार देना।
क्या बरते एहतियात
घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने देना।
घर के अंदर व बाहर पानी सात दिन से अधिक न खड़ा होने दें। कारण, मादा मच्छर पानी में अंडे देती है।
सुबह शाम शरीर को कपड़ों से पूरी तरह ढककर रखें।
पानी के बर्तनों को अच्छी तरह से ढककर रखें।
सप्ताह में एक बार पानी के सभी बर्तनों जैसे कि टंकियां, घड़े, कूलर इत्यादि को खाली कर दें।
घरों की खिड़कियों और दरवाजों पर जालियां लगवाएं।
सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
कीटनाशक दवाई का छिड़काव घर के सभी कमरों में करवाएं।
----------
डेंगू के बारे में जानकारी/उपाय व सुझाव
डेंगू बुखार का लक्षण
छाती और ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे खराशें।
सिर से माथे की ओर तेज दर्द।
उल्टी आना।
स्वाद का पता न चलना और भूख न लगना।
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
अचानक तेज बुखार।
आंखों के पीछे दर्द और आंख के हिलने से दर्द में और तेजी।
डेंगू व मलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके तहत पंपलेट व पोस्टर भी बांटे गए हैं। जहां कहीं भी कोई केस सामने आता है तो उस गांव में दवाइयों का छिड़काव भी किया जाता है। अभी नागरिक अस्पताल में डेंगू का कोई मरीज इलाज नहीं करा रहा है।
-डॉ. धर्मेश सैनी, जिला मलेरिया अधिकारी।
नगर पालिका के पास फॉगिंग के लिए तीन मशीन हैं। इनमें से दो खराब हैं व एक सही है। शहर में फॉगिंग कराई जा रही है। कुछ दिन पहले और रविवार को भी शहर में फॉगिंग कराई गई। वहीं खराब मशीनों को ठीक कराने के लिए दिल्ली भेजा गया है।
-आनंद मलिक, एसआई, नगर परिषद नारनौल।
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-दस में से अधिकतर मशीन हो चुकी हैं खराब, नारनौल नप के पास है केवल एक ही फॉगिंग मशीन, दो हैं खराब
फोटो नंबर चार व पांच
देवेंद्र यादव
नारनौल। इन दिनों जिले के अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। गांवों के साथ-साथ शहरों में भी डेंगू के मरीज अस्पतालों में जा रहे हैं। अक्टूबर में डेंगू के मरीज ज्यादा आते हैं। उधर, जिले में फॉगिंग के लिए प्रयुक्त की जाने वाली मशीनें खराब पड़ी हैं। नारनौल शहर के लिए एक फॉगिंग मशीन ही है, वह भी कई बार खराब रहती है। दो मशीनें खराब हैं।
गत वर्ष तक मच्छरों को मारने के लिए स्वास्थ्य विभाग शहर में फॉगिंग करवाता था। अब ऐसा नहीं है। शहर में फॉगिंग अब नगर परिषद या नगर पालिका अपने कर्मचारियों से करवा रही है। जिम्मेवारी हटने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 8 मशीनों को नगर पालिका व नगर परिषद में गत वर्ष भिजवा दिया गया था। इसमें 2 महेंद्रगढ़ नगर पालिका, 2 अटेली नगर पालिका, 2 कनीना नगर पालिका और 2 नारनौल नगर परिषद में दी गई है। नारनौल नप में गत वर्ष एक मशीन खराब हो गई। वहीं दूसरी मशीन इस बार एक दो जगह फॉगिंग कराने के बाद खराब हो गई है। इसके बाद एक नई मशीन खरीदी गई।
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दो बड़े शहर, पांच कस्बे, 346 गांव: मशीन 10
जिला में दो बड़े शहर नारनौल व महेंद्रगढ़ हैं। इसके अलावा पांच बड़े कस्बे अटेली, कनीना, नांगल चौधरी, निजामपुर व सतनाली सहित 346 गांव हैं। इनकी आबादी करीब 9 लाख 46 हजार है। इसके लिए केवल दस फॉगिंग मशीनें ही स्वास्थ्य विभाग के पास थीं। इनको एक साल पूर्व नगर परिषद व पालिकाओं को सौंप दिया गया है।
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अस्पताल में अलग से बनाया वार्ड
पिछले वर्ष के मलेरिया व डेंगू के प्रकोप से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष अपने स्तर पर भी प्रयास किया है। जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में 10 बेड का एक वार्ड स्थापित कर दिया गया है। डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को सीधे नारनौल के नागरिक अस्पताल में लेकर आए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम इन दिनों जागरूकता अभियान भी चलाए हुए है। वहीं जहां डेंगू या मलेरिया होने की सूचना मिलती है, वहां विभाग की टीम घर-घर जाकर जांच करती है। उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम निजी कार्यालय व घरों में जाकर जांच कर रही है। इस जांच में टीम देख रही है कि किसी के घर या कार्यालय के कूलरों या टंकियों में लारवा तो नहीं पनप रहा। अगर कहीं लारवा पनपता मिलता है तो कार्रवाई की जाती है और लोगों को नोटिस दिया जाता है।
ये हैं मलेरिया का आंकड़ा
15-20 दिन पहले वायरल पीड़ितों की संख्या में इजाफा हुआ था, मगर अब डेंगू व मलेरिया के मरीज भी आने लग गए हैं। सितंबर अंत से अक्टूबर माह तक डेंगू व मलेरिया फैलने की आशंकाएं ज्यादा बनी रहती हैं। ऐसे में प्रशासन को इससे निपटने के लिए हर समय तैयार रहने की जरूरत है।
रविवार को अनेक जगह की गई फॉगिंग
नप ने रविवार को अनेक जगह फॉगिंग कराई। नप की चेयरपर्सन भारती सैनी ने बताया कि डेंगू व मलेरिया के मामले सामने आने के बाद अब पूरे शहर में फॉगिंग कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी शहर के कई वार्डों में फॉगिंग कराई गई थी। उन्होंने बताया कि रविवार को शहर के अनेक मोहल्लों में फॉगिंग कराई गई है।
वर्ष मामले
2011 360
2012 308
2013 153
2014 36
2015 32
2016 24
2017 20 सितंबर तक
डेंगू का आंकड़ा
वर्ष मामले
2014 02
2015 05
2016 03
2017 04 सितंबर तक
मलेरिया का आंकड़ा
मलेरिया के लक्षण
सर्दी व कंपन के साथ तेज बुखार।
उल्टियां व सिर दर्द।
गर्मी लगना और पसीने के साथ बुखार का उतरना।
बुखार हर रोज, एक दिन छोड़कर या फिर चौथे दिन आना।
कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।
- कैसे करें मरीज का उपचार
रोगी की रक्त पट्टिका बनाना और शीघ्र अति शीघ्र इसकी जांच करवाना।
रक्त पट्टिका बनाने के उपरांत क्लोरोक्वीन की गोलियां खिलाना।
मलेरिया घोषित होने पर रोगी को कूल उपचार देना।
क्या बरते एहतियात
घर के आसपास पानी इकट्ठा न होने देना।
घर के अंदर व बाहर पानी सात दिन से अधिक न खड़ा होने दें। कारण, मादा मच्छर पानी में अंडे देती है।
सुबह शाम शरीर को कपड़ों से पूरी तरह ढककर रखें।
पानी के बर्तनों को अच्छी तरह से ढककर रखें।
सप्ताह में एक बार पानी के सभी बर्तनों जैसे कि टंकियां, घड़े, कूलर इत्यादि को खाली कर दें।
घरों की खिड़कियों और दरवाजों पर जालियां लगवाएं।
सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
कीटनाशक दवाई का छिड़काव घर के सभी कमरों में करवाएं।
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डेंगू के बारे में जानकारी/उपाय व सुझाव
डेंगू बुखार का लक्षण
छाती और ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे खराशें।
सिर से माथे की ओर तेज दर्द।
उल्टी आना।
स्वाद का पता न चलना और भूख न लगना।
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
अचानक तेज बुखार।
आंखों के पीछे दर्द और आंख के हिलने से दर्द में और तेजी।
डेंगू व मलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके तहत पंपलेट व पोस्टर भी बांटे गए हैं। जहां कहीं भी कोई केस सामने आता है तो उस गांव में दवाइयों का छिड़काव भी किया जाता है। अभी नागरिक अस्पताल में डेंगू का कोई मरीज इलाज नहीं करा रहा है।
-डॉ. धर्मेश सैनी, जिला मलेरिया अधिकारी।
नगर पालिका के पास फॉगिंग के लिए तीन मशीन हैं। इनमें से दो खराब हैं व एक सही है। शहर में फॉगिंग कराई जा रही है। कुछ दिन पहले और रविवार को भी शहर में फॉगिंग कराई गई। वहीं खराब मशीनों को ठीक कराने के लिए दिल्ली भेजा गया है।
-आनंद मलिक, एसआई, नगर परिषद नारनौल।