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भारत साक्षरता अभियान के तहत बुजुर्गों ने दी परीक्षा
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:24 AM IST
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भारत साक्षरता अभियान के तहत बुजुर्गों ने दी परीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। गांव जैलाफ के रावमा विद्यालय में भारत साक्षरता मिशन के तहत शनिवार को गांव के लगभग 20 बुजुर्गों ने परीक्षा दी। इनमें 10 महिलाएं और 10 पुरुष थे। परीक्षा के दौरान नियुक्त पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह अंग्रेजी प्रवक्ता और प्रिंसिपल ललित स्वामी आदि उपस्थित रहे। परीक्षा के बाद कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें पहले तो पढ़ाई में रुचि नहीं थी, लेकिन अब बच्चों को पढ़ते देखकर उन्हें भी पढ़ने की इच्छा हुई है। गांव में भारत साक्षरता मिशन के तहत इस तरह का वातावरण पैदा हो गया है। वे अपने बच्चों से ही सीखने का प्रयास करती हैं। इस अवसर पर महिलाएं पर्दे में थीं, लेकिन पर्दे में भी वे पुरुषों से ज्यादा रुचि लेती दिखाई दे रही थी। इस अवसर पर सरपंच सुरेश कुमार, छाजुराम समाजसेवी, श्रीचंद महाशय, धर्मपाल, बंशीलाल, लीलाराम, छीतरमल नंबरदार और अनेक महिलाएं उपस्थित थीं।
गांव में बुजुर्गों के प्रति शिक्षा को रुझान काफी वर्षों से है। इससे पहले 1993 में गांव को एक आदर्श गांव घोषित किया था। उस समय गांव में साक्षरता के प्रति बुजुर्गों का रुझान देखकर तत्कालीन उपायुक्त जयवंती श्योकंद ने गांव को 15 लाख रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप दी थी।
रितु भरगड़ ने शिक्षा के क्षेत्र में नया परचम लहराया
गत 15 अगस्त को गांव की बेटी रीतु भरगड़ ने शिक्षा के क्षेत्र में नया परचम लहराते हुए स्कूल में ध्वजारोहण किया था। रितु आज एक निजी कंपनी में प्रति महिने दो लाख रुपये का वेतन ले रही हैं। वह गांव की बालिकाओं को आगे बढ़ने का संदेश दे रही हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। गांव जैलाफ के रावमा विद्यालय में भारत साक्षरता मिशन के तहत शनिवार को गांव के लगभग 20 बुजुर्गों ने परीक्षा दी। इनमें 10 महिलाएं और 10 पुरुष थे। परीक्षा के दौरान नियुक्त पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह अंग्रेजी प्रवक्ता और प्रिंसिपल ललित स्वामी आदि उपस्थित रहे। परीक्षा के बाद कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें पहले तो पढ़ाई में रुचि नहीं थी, लेकिन अब बच्चों को पढ़ते देखकर उन्हें भी पढ़ने की इच्छा हुई है। गांव में भारत साक्षरता मिशन के तहत इस तरह का वातावरण पैदा हो गया है। वे अपने बच्चों से ही सीखने का प्रयास करती हैं। इस अवसर पर महिलाएं पर्दे में थीं, लेकिन पर्दे में भी वे पुरुषों से ज्यादा रुचि लेती दिखाई दे रही थी। इस अवसर पर सरपंच सुरेश कुमार, छाजुराम समाजसेवी, श्रीचंद महाशय, धर्मपाल, बंशीलाल, लीलाराम, छीतरमल नंबरदार और अनेक महिलाएं उपस्थित थीं।
गांव में बुजुर्गों के प्रति शिक्षा को रुझान काफी वर्षों से है। इससे पहले 1993 में गांव को एक आदर्श गांव घोषित किया था। उस समय गांव में साक्षरता के प्रति बुजुर्गों का रुझान देखकर तत्कालीन उपायुक्त जयवंती श्योकंद ने गांव को 15 लाख रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप दी थी।
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रितु भरगड़ ने शिक्षा के क्षेत्र में नया परचम लहराया
गत 15 अगस्त को गांव की बेटी रीतु भरगड़ ने शिक्षा के क्षेत्र में नया परचम लहराते हुए स्कूल में ध्वजारोहण किया था। रितु आज एक निजी कंपनी में प्रति महिने दो लाख रुपये का वेतन ले रही हैं। वह गांव की बालिकाओं को आगे बढ़ने का संदेश दे रही हैं।
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