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मौसम का बदला रुख, किसानों के माथे झलकी चिंता की लकीरे
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल/ महेंद्रगढ़। करीब एक सप्ताह से अचानक मौसम का रुख बदलने से किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। क्योंकि इस समय किसानों को ओलावृष्टि का भय सताएं जा रहे है। किसानों की सरसों की फसल लगभग पकाव पर है। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही है, कहीं उनकी मेहनत पर पानी न फिर जाये।
पिछले सप्ताह में हुई बारिश से अटेली क्षेत्र के कई गांवों में ओलावृष्टि होने से फसलों में 25 से 30 प्रतिशत नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। दो दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बुधवार को पूरे दिन तेज हवाओं के साथ आसमान में बादल छाएं रहे। जिससे कई जगहों पर दिन में बूंदाबांदी भी हुई है। दूसरी ओर ठंडी हवाओं के चलने से लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गई है। वहीं सूर्य देव ने भी दर्शन नहीं दिए। इससे फरवरी के दूसरे पखवाड़े के बाद भी लोगों को सर्दी का अहसास रहा।
वहीं, बदलता मौसम कई फसलों के लिए सही भी नहीं बताया जा रहा है। इस बार फरवरी माह में मौसम परिवर्तनशील रहा है। कई बार मौसम ने करवट बदली है। जिसके कारण मौसम में फरवरी माह के दूसरे पखवाड़े के बाद भी लोगों को सर्दी का अहसास हो रहा है। बुधवार को भी दिनभर बादल छाये रहे। सुबह के समय कोहरा भी पड़ा। दिनभर बादल छाने के बाद बूंदाबांदी भी हुई। जहां यह मौसम गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है, वहीं चने की फसल खराब होने लगी है। धूप न निकलने के कारण चने को फूल नहीं आ रहा। इससे फली नहीं बन पा रही है। वहीं सरसों की फसल भी बदलते मौसम के कारण खराब हो सकती है।
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नारनौल/ महेंद्रगढ़। करीब एक सप्ताह से अचानक मौसम का रुख बदलने से किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। क्योंकि इस समय किसानों को ओलावृष्टि का भय सताएं जा रहे है। किसानों की सरसों की फसल लगभग पकाव पर है। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही है, कहीं उनकी मेहनत पर पानी न फिर जाये।
पिछले सप्ताह में हुई बारिश से अटेली क्षेत्र के कई गांवों में ओलावृष्टि होने से फसलों में 25 से 30 प्रतिशत नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। दो दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बुधवार को पूरे दिन तेज हवाओं के साथ आसमान में बादल छाएं रहे। जिससे कई जगहों पर दिन में बूंदाबांदी भी हुई है। दूसरी ओर ठंडी हवाओं के चलने से लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गई है। वहीं सूर्य देव ने भी दर्शन नहीं दिए। इससे फरवरी के दूसरे पखवाड़े के बाद भी लोगों को सर्दी का अहसास रहा।
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वहीं, बदलता मौसम कई फसलों के लिए सही भी नहीं बताया जा रहा है। इस बार फरवरी माह में मौसम परिवर्तनशील रहा है। कई बार मौसम ने करवट बदली है। जिसके कारण मौसम में फरवरी माह के दूसरे पखवाड़े के बाद भी लोगों को सर्दी का अहसास हो रहा है। बुधवार को भी दिनभर बादल छाये रहे। सुबह के समय कोहरा भी पड़ा। दिनभर बादल छाने के बाद बूंदाबांदी भी हुई। जहां यह मौसम गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है, वहीं चने की फसल खराब होने लगी है। धूप न निकलने के कारण चने को फूल नहीं आ रहा। इससे फली नहीं बन पा रही है। वहीं सरसों की फसल भी बदलते मौसम के कारण खराब हो सकती है।
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