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सरसों की सरकारी खरीद में हैफेड अधिकारियों की मनमानी
Updated Sat, 31 Mar 2018 01:39 AM IST
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सरसों की सरकारी खरीद में हैफेड अधिकारियों की मनमानी का आरोप, हंगामा
नारनौल। यहां के नांगल चौधरी रोड पर चल रही सरसों की सरकारी खरीद में किसानों ने हैफेड अधिकारियों पर मनमानी करने के साथ ही कई गंभीर आरोप लगाए है। अधिकारियों की इस मनमानी के चलते दोपहर को किसानों ने हंगामा मचा दिया। बाद में करीब तीन बजे मौके पर पहुंचे मार्केट कमेटी के चेयरमैन जेपी सैनी ने किसानों की बातें सुनी और हैफेड के अधिकारियों की कारगुजारी प्रशासन व सरकार के पास पहुंचाने का आश्वासन दिया तब कही जाकर किसान शांत हुए।
किसान विक्रम यादव मांदी, प्रभातीलाल जोरासी, लाल सिंह मंढाणा, विकास मंढाणा, यशपाल जोरासी, सपन कुमार जोरासी व रामेश्वर दयाल कोरियवास आदि गांवों के किसानों ने बताया हैफेड के अधिकारी जान बूझकर किसानों को परेशान कर रहे हैं। इनका आरोप था कि ये अधिकारी आम किसानों की सरसों में कई कमियां बताकर उसे खरीदने में आनाकानी कर रहे हैं और अप्रोच वाले लोगों की सरसों सीधे ही ट्रैक्टर ट्राली में सलेक्ट कर रहे हैं। इसके अलावा जिन किसानों की सरसों सलेक्ट करके खरीदी जा रही है उसमें तुलाई के समय एक बोरी में धड़े के अलावा करीब 300 ग्राम सरसों प्रति बोरी फालतू ली जा रही है।
किसानों का यह भी आरोप है कि सरसों बेचने के लिए किसानों को जमीन की फर्द की प्रति सबसे जरूरी है। इसके लिए जिला प्रशासन की सख्त हिदायत है कि पटवारी मौके पर ही किसानों को फर्द उपलब्ध करवाये। किसानों ने बताया कि पटवारी दोपहर करीब तीन बजे बाद मौके से नदारद हो जाते हैं। इतना ही नहीं जब पटवारी कुछ घंटों के लिए मंडी में खरीद स्थल पर बैठकर नकल देते हैं तो सुविधा शुल्क के चक्कर में रहते हैं।
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जब दोपहर तीन बजे मंडी में पहुंचे तो वहां कोई पटवारी नहीं था। इसकी सूचना उन्होंने तहसीलदार को तुरंत दे दी थी। दूसरी तरफ हैफेड के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए है कि यदि किसानों के आरोप सही पाये गए तो वे इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को भेजेंगे। चेयरमैन सैनी ने कहा कि सरकार ईमानदारी से किसानों की सरसों खरीदने को प्रतिबद्ध है। सरसों की सरकारी खरीद में यदि कोई अधिकारी सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास करेगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जेपी सैनी चेयरमैन मार्केट कमेटी
उन्होंने कहा कि नियमानुसार किसानों की सरसों खरीदी जा रही है। तुलाई मामले में किसानों को कुछ गलतफहमी हो गई है जो दूर कर दी जाएगी। खरीद मामले में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
रामकुमार, जिला प्रबंधक, हैफेड
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नारनौल। यहां के नांगल चौधरी रोड पर चल रही सरसों की सरकारी खरीद में किसानों ने हैफेड अधिकारियों पर मनमानी करने के साथ ही कई गंभीर आरोप लगाए है। अधिकारियों की इस मनमानी के चलते दोपहर को किसानों ने हंगामा मचा दिया। बाद में करीब तीन बजे मौके पर पहुंचे मार्केट कमेटी के चेयरमैन जेपी सैनी ने किसानों की बातें सुनी और हैफेड के अधिकारियों की कारगुजारी प्रशासन व सरकार के पास पहुंचाने का आश्वासन दिया तब कही जाकर किसान शांत हुए।
किसान विक्रम यादव मांदी, प्रभातीलाल जोरासी, लाल सिंह मंढाणा, विकास मंढाणा, यशपाल जोरासी, सपन कुमार जोरासी व रामेश्वर दयाल कोरियवास आदि गांवों के किसानों ने बताया हैफेड के अधिकारी जान बूझकर किसानों को परेशान कर रहे हैं। इनका आरोप था कि ये अधिकारी आम किसानों की सरसों में कई कमियां बताकर उसे खरीदने में आनाकानी कर रहे हैं और अप्रोच वाले लोगों की सरसों सीधे ही ट्रैक्टर ट्राली में सलेक्ट कर रहे हैं। इसके अलावा जिन किसानों की सरसों सलेक्ट करके खरीदी जा रही है उसमें तुलाई के समय एक बोरी में धड़े के अलावा करीब 300 ग्राम सरसों प्रति बोरी फालतू ली जा रही है।
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किसानों का यह भी आरोप है कि सरसों बेचने के लिए किसानों को जमीन की फर्द की प्रति सबसे जरूरी है। इसके लिए जिला प्रशासन की सख्त हिदायत है कि पटवारी मौके पर ही किसानों को फर्द उपलब्ध करवाये। किसानों ने बताया कि पटवारी दोपहर करीब तीन बजे बाद मौके से नदारद हो जाते हैं। इतना ही नहीं जब पटवारी कुछ घंटों के लिए मंडी में खरीद स्थल पर बैठकर नकल देते हैं तो सुविधा शुल्क के चक्कर में रहते हैं।
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जब दोपहर तीन बजे मंडी में पहुंचे तो वहां कोई पटवारी नहीं था। इसकी सूचना उन्होंने तहसीलदार को तुरंत दे दी थी। दूसरी तरफ हैफेड के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए है कि यदि किसानों के आरोप सही पाये गए तो वे इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को भेजेंगे। चेयरमैन सैनी ने कहा कि सरकार ईमानदारी से किसानों की सरसों खरीदने को प्रतिबद्ध है। सरसों की सरकारी खरीद में यदि कोई अधिकारी सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास करेगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जेपी सैनी चेयरमैन मार्केट कमेटी
उन्होंने कहा कि नियमानुसार किसानों की सरसों खरीदी जा रही है। तुलाई मामले में किसानों को कुछ गलतफहमी हो गई है जो दूर कर दी जाएगी। खरीद मामले में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
रामकुमार, जिला प्रबंधक, हैफेड