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वेतन नहीं मिला गोशाला छोड़कर भागे गो सेवक
Updated Sat, 16 Sep 2017 02:07 PM IST
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वेतन नहीं मिला, गोशाला छोड़कर भागे गो सेवक
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहर को घुमंतू पशुओं से मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए। मगर आज भी शहर घुमंतू पशुओं से मुक्त नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी ओर इन पशुओं के लिए खालड़ा की पहाडिय़ों में बनाई गई गोशाला भी अब राम भरोसे ही चल रही है। 40 लाख रुपये की लागत से बनाई गई यह गोशाला एक माह के अंदर ही बंद होने की कगार पर है। हालात यह है कि गायों के लिए यहां एक दिन का चारा नहीं बचा है। वहीं जो कर्मी यहां लगे थे, वे भी तनख्वाह नहीं मिलने के कारण भाग गए है। अब यहां 15 में से केवल पांच कर्मी ही बचे हैं, ये भी अपनी जेब से पैसा खर्च कर गायों की देखरेख कर रहे हैं।
शहर को घुमंतू पशुओं को मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन व नगर परिषद ने एक माह पूर्व अभियान चलाकर गायें व नंदी पकड़े थे। नप ने शहर में लगभग दो सौ से अधिक गायों व नंदी के पकड़कर गोपाल गोशाला में भिजवाया था। इसके बाद गोपाल गोशाला ने दो सौ गायों लेने के बाद जिला प्रशासन व नप को अन्य गायें लेने से मना कर दिया गया। गोपाला गोशाला कमेटी का कहना था कि पहले से ही उनकी पास काफी गायें है। इससे अधिक गायें लेने के लिए उनके पास पर्याप्त जगह नहीं है। इसके बाद भी शहर में अनेक घुमंतू पशु फिर नजर आने लगे। जिला प्रशासन ने नप को आदेश दिए कि इन घुमंतू पशुओं किसी ओर जगह का प्रबंध किया जाए, ताकि शहर में एक भी घुमंतू पशु ना रहे।
-गोपाल गोशाला में कम जगह पड़ी तो खालड़ा में बनाई गोशाला
गोपाल गोशाला में पशु रखने के लिए जगह कम पड़ी तो नप ने खालड़ा स्थित फायर रेंज के पास नप की खाली पड़ी जमीन पर 40 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया। जहां पर करीब 200 गायों को रखा गया है। नप की खाली जमीन में एक तरफ चारदीवारी की गई, वहीं बाकी तरफ तारों की सहायता से गोशाला को कवर किया गया है।
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-ठेकेदार को गाय व बछड़ा पकड़ने के लिए नप ने दिए 400 रुपए
जिला प्रशासन के आदेश मिलने के बाद नप ने शहर को घुमंतू पशुओं को पकड़ने के लिए ठेकेदार को 400 रुपये एक गाय व 400 रुपए एक बछड़ा पकड़ने का कार्य दिया। जिसके चलते ठेकेदार ने खालड़ा में स्थित बन रही गोशाला में लगभग दो सौ गाय व बछड़े पकड़कर उस गोशाला में भिजवाई। वहीं 200 गाय गोपाल गोशाला में भिजवाई। इस प्रकार ठेकेदार को नप ने एक लाख 60 हजार रुपये का भुगतान किया। इस कार्य को करने के लिए ठेकेदार ने राजस्थान से कुछ गाय व बछड़े पकड़ने वाले लोगों को बुलवाया।
-ठेकेदार ने नहीं दिए युवकों के रुपये, तब भाग गए युवक
ठेकेदार ने राजस्थान से गाय व बछड़े पकडने के राजस्थान के हनुमानगढ़ से कुछ लोगों को बुलवाया। इन लोगों ने ठेकेदारों के कहने पर शहर में गायों व बछड़ों को पकड़ने का कार्य शुरू कर दिया। इन लोगों कोअपनी एक टीम बनाकर शहर में गायों व बछड़ों को पकड़ने के बाद उसकी पहचान के लिए उनके कानों पर एक टैग लगाकर गोशाला में एकत्र किया। इसके बाद जैसे-जैसे कुछ समय बीता तो गाय पकड़ने वाले लोगों ने ठेकेदार से खर्चे के लिए कुछ रुपये मांगें तो ठेकेदार लोगों को रुपये देने से मना कर दिया तथा उनको गोशाला से चले जाने की बात कहने लगा। रुपये नहीं मिलने के कारण लोगों तो गोशाला छोड़कर चले गए तथा उनमें से कुछ लोगों वहां पर रुक गए।
-डीसी रेट का आश्वासन देकर ठेकेदार ने लगाएं थे लोग
ठेकेदार ने गोशाला में कार्य करवाने व गायों को पकड़ने के लिए ठेकेदार लोगों को डीसी रेट का आश्वासन देकर गोशाला में कार्य करवाना शुरू कर दिया। जैसे एक महीना बिता तो गोशाला में कार्य करने वाले लोगों ने ठेकेदार से वेतन देने की बात कही तो ठेकेदार ने उन लोगों को कोई आश्वासन नहीं दिया। जिस पर ये लोग वहां से भाग गए। अब वहां गायों की सेवा करने के लिए मात्र पांच लोग बचे हैं, जो गायों की देखरेख कर रहे हैं।
-नप अधिकारी व चेयरपर्सन के सामने आया मामला
इसके बाद यह मामला नप कार्यकारी अधिकारी व चेयरपर्सन के सामने आ पहुंचा। नप अधिकारी विजय पाल यादव ने गोशाला में कार्यरत लोगों को आश्वासन दिया कि अब उनका वेतन नप वहन करेगी। वहीं खाने व पानी का प्रबंध भी नप द्वारा किया जाएगा। इसके बाद कुछ समय तो गोशाला कार्य सुचारु रुप से चला, लेकिन नप कार्यकारी अधिकारी का तबादला होने के बाद अब फिर वही हाल हो गया।
-गायों के लिए चारा भी खत्म, धूप में रहती हैं बैठी
खालड़ा में बनी गोशाला में अब दो सौ गाय व बछड़े आ चुके हैं। लेकिन उनके चारे व पीने का कोई उचित प्रबंध नहीं है। उनके बैठे के लिए कोई छाया का प्रबंध भी नहीं है। जिसके कारण सारे दिन गाय व बछड़े धूप में बंधे रहते हैं। गायों की देखभाल करने वालों ने बताया कि यहां मात्र एक दिन का ही चारा बचा है।
-गायों के उपचार के लिए नहीं हैं दवाईयां
गोशाला में स्थित गायों के उपचार के लिए न तो दवाईयां उपलब्ध हैं व न ही उनके लिए नप की ओर से दवाईयां उपलब्ध करवाई जा रही। जिसके चलते गोशाला में काफी गाय व बछड़े डायरिया बीमारी की चपेट में आ चुके है। अगर समय रहते गोशाला गायों व बछड़ों को समय पर दवाईयां उपलब्ध नही हुई तो गोशाला में स्थित सभी गायों में बीमारी फेल जाएगी।
-ठेकेदार ने मंगाई लाखों की दवाईयां, पेमेंट नहीं आने से नहीं हो रहा प्रयोग
ठेकेदार ने जिला प्रशासन व नप के आदेशों के बिना ही गोशाला के लिए लाखों रुपये की दवाईयां मंगवा ली। नप ने उनके लिए बजट पास नहीं किया। अब वह दवाईयां गोशाला में पड़ी खराब हो रही हैं। जिनका कोई उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। वहां पर स्थित कर्मचारियों कहना था कि जब तक इन दवाईयों को बिल व पेमेंट भुगतान नहीं होता तब तक इन दवाईयों को हाथ भी नहीं लगा सकते।
-दो चिकित्सक व तीन कर्मचारियों के भरोसे चल रही है गोशाला
ठेकेदार ने डीसी रेट का आश्वासन देकर लगभग गोशाला में 15 कर्मचारियों की भर्ती की थी। अब कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला तो कुछ कर्मचारी गोशाला छोड़कर चले गए। जिसके बाद कर्मचारियों में दो चिकित्सक व तीन कर्मचारी गोशाला में कार्य कर रहे है। गोशाला में स्थित कर्मचारियों का कहना था कि ना तो जिला प्रशासन व नप से कोई सहायता नहीं मिल रही व न ही गोशाला में आकर जिला प्रशासन का अधिकारी सुध ले रहा।
-ना कोई चंदा ना कोई दान
गोशाला कर्मचारियों का कहना था कि शहर से काफी दूर होने के कारण यहां पर आम लोग नहीं आ पाते। न ही कोई गोशाला के चंदा न ही कोई दान आ रहा। जिसके चलते गायों का खाना व पीने का प्रबंध रामभरोसे से ही।
-नप उपप्रधान ने किया कर्मचारियों का खाने व पीने का प्रबंध
गोशाला में स्थित कर्मचारियों व चिकित्सकों कहना था कि उनके खाने व पीने का प्रबंध नप उपप्रधान मनोज जांगड़ा द्वारा वहन किया जा रहा है। उनका कहना था कि वे सिर्फ नप के उपप्रधान के आश्वासन पर गोशाला में कार्य कर रहे हैं।
‘गायों के लिए नप की ओर से 40 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण किया गया। इसको सुचारु रूप से चलाने के लिए उपायुक्त, एसडीएम व नप के अधिकारियों तथा पार्षदों व शहर के गणमान्य लोगों की एक कमेटी बनाई जाएगी, जो गोशाला की देखरेख करेगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।’----भारती सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल।
-----------राजकुमार, देवेंद्र
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहर को घुमंतू पशुओं से मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए। मगर आज भी शहर घुमंतू पशुओं से मुक्त नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी ओर इन पशुओं के लिए खालड़ा की पहाडिय़ों में बनाई गई गोशाला भी अब राम भरोसे ही चल रही है। 40 लाख रुपये की लागत से बनाई गई यह गोशाला एक माह के अंदर ही बंद होने की कगार पर है। हालात यह है कि गायों के लिए यहां एक दिन का चारा नहीं बचा है। वहीं जो कर्मी यहां लगे थे, वे भी तनख्वाह नहीं मिलने के कारण भाग गए है। अब यहां 15 में से केवल पांच कर्मी ही बचे हैं, ये भी अपनी जेब से पैसा खर्च कर गायों की देखरेख कर रहे हैं।
शहर को घुमंतू पशुओं को मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन व नगर परिषद ने एक माह पूर्व अभियान चलाकर गायें व नंदी पकड़े थे। नप ने शहर में लगभग दो सौ से अधिक गायों व नंदी के पकड़कर गोपाल गोशाला में भिजवाया था। इसके बाद गोपाल गोशाला ने दो सौ गायों लेने के बाद जिला प्रशासन व नप को अन्य गायें लेने से मना कर दिया गया। गोपाला गोशाला कमेटी का कहना था कि पहले से ही उनकी पास काफी गायें है। इससे अधिक गायें लेने के लिए उनके पास पर्याप्त जगह नहीं है। इसके बाद भी शहर में अनेक घुमंतू पशु फिर नजर आने लगे। जिला प्रशासन ने नप को आदेश दिए कि इन घुमंतू पशुओं किसी ओर जगह का प्रबंध किया जाए, ताकि शहर में एक भी घुमंतू पशु ना रहे।
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-गोपाल गोशाला में कम जगह पड़ी तो खालड़ा में बनाई गोशाला
गोपाल गोशाला में पशु रखने के लिए जगह कम पड़ी तो नप ने खालड़ा स्थित फायर रेंज के पास नप की खाली पड़ी जमीन पर 40 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया। जहां पर करीब 200 गायों को रखा गया है। नप की खाली जमीन में एक तरफ चारदीवारी की गई, वहीं बाकी तरफ तारों की सहायता से गोशाला को कवर किया गया है।
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-ठेकेदार को गाय व बछड़ा पकड़ने के लिए नप ने दिए 400 रुपए
जिला प्रशासन के आदेश मिलने के बाद नप ने शहर को घुमंतू पशुओं को पकड़ने के लिए ठेकेदार को 400 रुपये एक गाय व 400 रुपए एक बछड़ा पकड़ने का कार्य दिया। जिसके चलते ठेकेदार ने खालड़ा में स्थित बन रही गोशाला में लगभग दो सौ गाय व बछड़े पकड़कर उस गोशाला में भिजवाई। वहीं 200 गाय गोपाल गोशाला में भिजवाई। इस प्रकार ठेकेदार को नप ने एक लाख 60 हजार रुपये का भुगतान किया। इस कार्य को करने के लिए ठेकेदार ने राजस्थान से कुछ गाय व बछड़े पकड़ने वाले लोगों को बुलवाया।
-ठेकेदार ने नहीं दिए युवकों के रुपये, तब भाग गए युवक
ठेकेदार ने राजस्थान से गाय व बछड़े पकडने के राजस्थान के हनुमानगढ़ से कुछ लोगों को बुलवाया। इन लोगों ने ठेकेदारों के कहने पर शहर में गायों व बछड़ों को पकड़ने का कार्य शुरू कर दिया। इन लोगों कोअपनी एक टीम बनाकर शहर में गायों व बछड़ों को पकड़ने के बाद उसकी पहचान के लिए उनके कानों पर एक टैग लगाकर गोशाला में एकत्र किया। इसके बाद जैसे-जैसे कुछ समय बीता तो गाय पकड़ने वाले लोगों ने ठेकेदार से खर्चे के लिए कुछ रुपये मांगें तो ठेकेदार लोगों को रुपये देने से मना कर दिया तथा उनको गोशाला से चले जाने की बात कहने लगा। रुपये नहीं मिलने के कारण लोगों तो गोशाला छोड़कर चले गए तथा उनमें से कुछ लोगों वहां पर रुक गए।
-डीसी रेट का आश्वासन देकर ठेकेदार ने लगाएं थे लोग
ठेकेदार ने गोशाला में कार्य करवाने व गायों को पकड़ने के लिए ठेकेदार लोगों को डीसी रेट का आश्वासन देकर गोशाला में कार्य करवाना शुरू कर दिया। जैसे एक महीना बिता तो गोशाला में कार्य करने वाले लोगों ने ठेकेदार से वेतन देने की बात कही तो ठेकेदार ने उन लोगों को कोई आश्वासन नहीं दिया। जिस पर ये लोग वहां से भाग गए। अब वहां गायों की सेवा करने के लिए मात्र पांच लोग बचे हैं, जो गायों की देखरेख कर रहे हैं।
-नप अधिकारी व चेयरपर्सन के सामने आया मामला
इसके बाद यह मामला नप कार्यकारी अधिकारी व चेयरपर्सन के सामने आ पहुंचा। नप अधिकारी विजय पाल यादव ने गोशाला में कार्यरत लोगों को आश्वासन दिया कि अब उनका वेतन नप वहन करेगी। वहीं खाने व पानी का प्रबंध भी नप द्वारा किया जाएगा। इसके बाद कुछ समय तो गोशाला कार्य सुचारु रुप से चला, लेकिन नप कार्यकारी अधिकारी का तबादला होने के बाद अब फिर वही हाल हो गया।
-गायों के लिए चारा भी खत्म, धूप में रहती हैं बैठी
खालड़ा में बनी गोशाला में अब दो सौ गाय व बछड़े आ चुके हैं। लेकिन उनके चारे व पीने का कोई उचित प्रबंध नहीं है। उनके बैठे के लिए कोई छाया का प्रबंध भी नहीं है। जिसके कारण सारे दिन गाय व बछड़े धूप में बंधे रहते हैं। गायों की देखभाल करने वालों ने बताया कि यहां मात्र एक दिन का ही चारा बचा है।
-गायों के उपचार के लिए नहीं हैं दवाईयां
गोशाला में स्थित गायों के उपचार के लिए न तो दवाईयां उपलब्ध हैं व न ही उनके लिए नप की ओर से दवाईयां उपलब्ध करवाई जा रही। जिसके चलते गोशाला में काफी गाय व बछड़े डायरिया बीमारी की चपेट में आ चुके है। अगर समय रहते गोशाला गायों व बछड़ों को समय पर दवाईयां उपलब्ध नही हुई तो गोशाला में स्थित सभी गायों में बीमारी फेल जाएगी।
-ठेकेदार ने मंगाई लाखों की दवाईयां, पेमेंट नहीं आने से नहीं हो रहा प्रयोग
ठेकेदार ने जिला प्रशासन व नप के आदेशों के बिना ही गोशाला के लिए लाखों रुपये की दवाईयां मंगवा ली। नप ने उनके लिए बजट पास नहीं किया। अब वह दवाईयां गोशाला में पड़ी खराब हो रही हैं। जिनका कोई उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। वहां पर स्थित कर्मचारियों कहना था कि जब तक इन दवाईयों को बिल व पेमेंट भुगतान नहीं होता तब तक इन दवाईयों को हाथ भी नहीं लगा सकते।
-दो चिकित्सक व तीन कर्मचारियों के भरोसे चल रही है गोशाला
ठेकेदार ने डीसी रेट का आश्वासन देकर लगभग गोशाला में 15 कर्मचारियों की भर्ती की थी। अब कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला तो कुछ कर्मचारी गोशाला छोड़कर चले गए। जिसके बाद कर्मचारियों में दो चिकित्सक व तीन कर्मचारी गोशाला में कार्य कर रहे है। गोशाला में स्थित कर्मचारियों का कहना था कि ना तो जिला प्रशासन व नप से कोई सहायता नहीं मिल रही व न ही गोशाला में आकर जिला प्रशासन का अधिकारी सुध ले रहा।
-ना कोई चंदा ना कोई दान
गोशाला कर्मचारियों का कहना था कि शहर से काफी दूर होने के कारण यहां पर आम लोग नहीं आ पाते। न ही कोई गोशाला के चंदा न ही कोई दान आ रहा। जिसके चलते गायों का खाना व पीने का प्रबंध रामभरोसे से ही।
-नप उपप्रधान ने किया कर्मचारियों का खाने व पीने का प्रबंध
गोशाला में स्थित कर्मचारियों व चिकित्सकों कहना था कि उनके खाने व पीने का प्रबंध नप उपप्रधान मनोज जांगड़ा द्वारा वहन किया जा रहा है। उनका कहना था कि वे सिर्फ नप के उपप्रधान के आश्वासन पर गोशाला में कार्य कर रहे हैं।
‘गायों के लिए नप की ओर से 40 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण किया गया। इसको सुचारु रूप से चलाने के लिए उपायुक्त, एसडीएम व नप के अधिकारियों तथा पार्षदों व शहर के गणमान्य लोगों की एक कमेटी बनाई जाएगी, जो गोशाला की देखरेख करेगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।’----भारती सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल।
-----------राजकुमार, देवेंद्र