फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   अनाज मंडी में चार दिन से सरसों बिकने का इंतजार कर रहे किसानों को प्रशासन का आदेश दूसरी मंडियों में ले जाओ

अनाज मंडी में चार दिन से सरसों बिकने का इंतजार कर रहे किसानों को प्रशासन का आदेश दूसरी मंडियों में ले जाओ

Sun, 07 Apr 2019 12:35 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 07 Apr 2019 12:35 AM IST
विज्ञापन
अनाज मंडी में चार दिन से सरसों बिकने का  इंतजार कर रहे किसानों को प्रशासन का आदेश दूसरी मंडियों में ले जाओ
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

महेंद्रगढ़। शिक्षामंत्री के गृह क्षेत्र के किसानों को सरसों बेचना मुसीबत बन गया है। किसानों को 25 से 30 किलोमीटर दूर की मंडियों में फसल बेचने के लिए जाना पड़ रहा है। शनिवार को विभिन्न गांवों के किसानों को सरसों लेकर सतनाली, कनीना, अटेली और नारनौल जाना पड़ा। महेंद्रगढ़ अनाज मंडी में खुली में पड़ी ढेरियों की हैफेड ने खरीद की। शुक्रवार देर रात आई आंधी में किसानों को किसी तरह की राहत नहीं मिली। शेड नहीं होने के कारण किसान अपनी ढेरियों को तिरपाल से ढककर बचाते रहे। खुद भी ढेरियों के पास ही रहे। शनिवार को किसानों को प्रशासन ने आदेश दे दिया कि अब यहां सरसों नहीं बिकेगी शेड्यूल के अनुसार दूसरी मंडियों में लेकर जाओ। किसानों ने सरकार से महेंद्रगढ़ के आढ़तियों के लाइसेंस रद्द करने की मांग की।
मंडी में तालाबंदी करने के बाद भी किसानों की सरसों नहीं खरीदी गई। सैकड़ों किसान शुक्रवार को अपनी सरसों की खरीद का इंतजार करते रहे। जब सरसों की खरीद नहीं हुई तो रात भर अनाज मंडी में ही रहे। किसानों को रात आंधी के बीच बितानी पड़ी। तिरपाल की व्यवस्था कर सरसों को ढकते रहे। अनाज मंडी में शेड नहीं होने के कारण किसानों को दिन के समय धूप में रहना पड़ता है। सरसों भी खुले में रहती है। आंधी, बरसात के समय किसान की फसल खुले में रहना तय है। किसानों ने बताया कि किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि तीन-चार बार पल्लेदारी देनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि बार-बार उतारने और चढ़ाने के लिए पल्लेदारों को लगभग 30 रुपये देने पड़े रहे हैं। जबकि चार से पांच हजार रुपये ट्रैक्टर और पिकअप का किराया देना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इससे अच्छे तो वो गांव में ही बेच लेते, इतनी परेशानी उन्हें नहीं उठानी पड़ती।
विज्ञापन


बोले किसान
मैं चार अप्रैल को सरसों लेकर आया था। दो दिन-रात से मंडी में सरसों की रखवाली कर रहा हूं। मंडी में किसान भूखे प्यासे समय व्यतीत कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं। शनिवार सुबह आकर बोल दिया कि उनकी सरसों सतनाली में खरीदी जाएगी। अब दोबारा से सरसों को गाड़ी में लोड करेंगे। बार-बार उतारने एवं चढ़ाने में पूरी पल्लेदारी और गाड़ी का किराया भी लग रहा है। जब हमारे घर पर ही खरीद नहीं हो रही तो दूसरे घर कौन खरीदेगा?
विज्ञापन
विज्ञापन

- राम सिंह, भांडोर नीची।

तीन दिन से किसान परेशान हैं। शुक्रवार की शाम को मार्केट कमेटी के चेयरमैन ने कहा था कि ढेरी वाली सरसों सुबह खरीदी जाएगी। लेकिन शनिवार को हैफेड ने सरसों खरीदने से मना कर दिया। सब किसान व्यापारियों की वजह से परेशान हो रहे हैैं। जब पूरे हरियाणा में व्यापारी खरीद कर रहे हैं तो ये क्यों नहीं खरीद रहे। अगर नहीं खरीद रहे तो सरकार इनका लाइसेंस रद्द करें।
- संजय, भांडोर नीची

चार अप्रैल से ढेरी लगाए हुए थे। शुक्रवार को घोषणा की गई थी कि ढेरी वाली सरसों खरीदी जाएगी, अब बोल रहे हैं कि सतनाली ही उनकी खरीद होगी। अब दोबारा से सरसों को लोड करवाया है। रात भर आंधी और बारिश में खुले में पड़े रहे। 2 हजार रुपये प्रतिदिन ट्रैक्टर का किराया देना पड़ रहा है। चार बार मजदूरी लग चुकी है। जब यहां नहीं बिकी तो वहां बिकने की क्या गारंटी। इसलिए वो अपनी फसल गांव में ही जो भी रेट मिलेगा उस पर बेच लेंगे, परेशानी तो नहीं उठानी पड़ेगी।

- कृष्ण कुमार, मालड़ा।

तीन अप्रैल का टोकन कटा हुआ है। अभी तक सरसों की खरीद नहीं हुई है। कभी कहते हैं कि महेंद्रगढ़ खरीद होगी तो कभी कहते हैं सतनाली खरीद होगी। वो खरीद को लेकर काफी कंफ्यूज हैं। इनके चक्कर में कागज सतनाली पहुंच गए और माल यहीं पड़ा है। प्रशासन को क्लीयर बताना चाहिए कि असल में खरीद कहां होगी। किसी प्रकार का कंफ्यूजन नहीं होना चाहिए। एक तो किसान पहले ही परेशान है और दूसरा कंफ्यूज हो रहा है।
- रोहताश मालड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed