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नगर परिषद क्षेत्र में ओडीएफ दिखावा,कहीं शौचालयों में ताले तो गंदगी के ढेर
Updated Sat, 08 Dec 2018 11:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहर में बने सार्वजनिक शौचालय देखरेख के अभाव में जर्जर और गंदे पड़े हुए हैं। कई शौचालयों में पानी तक की व्यवस्था नहीं है तो कुछेक पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरन खुले में शौच जाना पड़ रहा है। नगर परिषद अधिकारियों की लापरवाही के कारण लाखों रुपये बेकार हो रहे हैं। दूसरी ओर स्वच्छता अभियान को भी झटका लग रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर परिषद ने पिछले साल शहर को खुले में शौच मुक्त घोषित करने के लिए करीब 21 जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया था। सभी शौचालयों पर पानी की व्यवस्था के लिए 500-500 लीटर क्षमता वाली प्लास्टिक की टंकियां रखवाई थी। टंकियों में नियमित पानी डालने के लिए टैंकरों की भी व्यवस्था की गई थी। साथ ही इन शौचालयों की देखरेख के लिए कर्मचारियों की भी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब अधिकांश शौचालय खराब पड़े हुए हैं या प्रयोग करने लायक नहीं बचे हैं। ऐसे में ये शौचालय अब शहर में खुद गंदगी के पर्याय बने हुए हैं। नप अधिकारियों के अनुसार अब नये सिरे से सभी शौचालयों को ठीक कराया जा रहा है। क्योंकि स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू हो गया है और शहर की रैंकिंग को लेकर चिंता है।
बदइंतजामी के शिकार
नारनौल शहर पिछले साल खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद नप ने सार्वजनिक शौचालयों की देखरेख पर ध्यान देना कम कर दिया। इससे अव्यवस्था होती गई और सभी शौचालय जर्जर हो गए। इसके चलते झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। इससे शहर में चारों ओर गंदगी को बढ़ावा मिल रहा है।
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असामाजिक तत्व तोड़कर ले गए टोंटी
लोगों का कहना है कि शुरुआत में तो नप ने शौचालयों की देखरेख के लिए सात-आठ कर्मचारी लगाए थे। कर्मचारियों को शौचालयों पर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ-साथ कोई असामाजिक तत्व शौचालय की टोंटी व पाइप आदि को नुकसान न पहुंचाए, इस पर भी ध्यान रखना था। कुछ दिन तो सब कुछ ठीक-ठाक चला लेकिन धीरे-धीरे शौचालयों की देखभाल, सफाई व पानी की व्यवस्था पर ध्यान कम होता गया। यूज न होने से असामाजिक तत्व अंदर लगी पानी की टोंटी व पाइप तोड़कर ले गए। नप के एक अधिकारी ने बताया कि चितवन वाटिका के पास स्थित शौचालय पर तीन-चार बार टोंटी लगवाई गई लेकिन असामाजिक तत्व तोड़कर ले गए।
ताले लटके मिले
नगर परिषद द्वारा सार्वजनिक शौचालयों की देखरेख पर ध्यान न देने के कारण शहर के अधिकांश शौचालय बेकार हो गए हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार इन सार्वजनिक शौचालयों का दौरा किया तो पाया कि छोटे-बड़े तालाब के पास (गंदे नाले) बने पांच शौचालयों में से तीन पर ताले लटके हुए थे। एक खुला हुआ तो एक गंदगी से अटा पड़ा था। आसपास के लोगों ने बताया कि कई महीनों से पानी नहीं था। कुछ दिन पहले नप ने पानी का कनेक्शन कराया है। इसके बाद शौचालय में ताला लगा दिया है। स्टेडियम के पास दो शौचालय बनाए गए हैं। यह भी टूटे पड़े हैं और प्रयोग करने के लायक नहीं हैं। इसके अलावा पार्क, पुल बाजार, चितवन वाटिका, महल मोहल्ला, जल महल के पास, गंदा नाला रेवाड़ी रोड पर, सुभाष पार्क समेत अन्य जगहों पर बने शौचालय खराब है। उन्हें देखकर सहजता से पता लगाया जा सकता है कि इन शौचालयों पर न सफाई की व्यवस्था है और न ही पानी की।
वर्जन
शहर के सभी कंडम शौचालयों को ठीक कराया जा रहा है। जल्द शौचालय साफ-सुथरा नजर आएंगे। शौचालय में ताला बंद होने की जानकारी ली जाएगी और खुलवाया जाएगा।
- भारती सैनी, चेयरमैन, नप।
वर्जन
शौचालयों के रिपेयर का कार्य चल रहा है। अभी आठ कर्मचारी शौचालयों की देखरेख में लगे हैं। इनकी सफाई और देखरेख के लिए अलग से टेंडर जारी किया जाएगा।
- मुकेश शर्मा, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नप।
शहरवासी करें नप का सहयोग
शहर के शौचालय प्रयोग करने लायक नहीं है। इसे नप को गंभीरता से लेकर सफाई करानी चाहिए। दूसरा सफाई अभियान में शहरवासियों को भी नप का सहयोग करना चाहिए।
- दलजीत राजेंद्र चेतीवाल, सामाजिक कार्यकर्ता।
नप अधिकारी नहीं सफाई के प्रति गंभीर
शहर के शौचालय खस्ता हालत में हैं। मेन शहर में तो शौचालय हैं ही नहीं। नप के अधिकारी शहर की सफाई को लेकर गंभीर नहीं हैं।
- विकास अग्रवाल, पुल बाजार।
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नारनौल। शहर में बने सार्वजनिक शौचालय देखरेख के अभाव में जर्जर और गंदे पड़े हुए हैं। कई शौचालयों में पानी तक की व्यवस्था नहीं है तो कुछेक पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरन खुले में शौच जाना पड़ रहा है। नगर परिषद अधिकारियों की लापरवाही के कारण लाखों रुपये बेकार हो रहे हैं। दूसरी ओर स्वच्छता अभियान को भी झटका लग रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर परिषद ने पिछले साल शहर को खुले में शौच मुक्त घोषित करने के लिए करीब 21 जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया था। सभी शौचालयों पर पानी की व्यवस्था के लिए 500-500 लीटर क्षमता वाली प्लास्टिक की टंकियां रखवाई थी। टंकियों में नियमित पानी डालने के लिए टैंकरों की भी व्यवस्था की गई थी। साथ ही इन शौचालयों की देखरेख के लिए कर्मचारियों की भी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब अधिकांश शौचालय खराब पड़े हुए हैं या प्रयोग करने लायक नहीं बचे हैं। ऐसे में ये शौचालय अब शहर में खुद गंदगी के पर्याय बने हुए हैं। नप अधिकारियों के अनुसार अब नये सिरे से सभी शौचालयों को ठीक कराया जा रहा है। क्योंकि स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू हो गया है और शहर की रैंकिंग को लेकर चिंता है।
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बदइंतजामी के शिकार
नारनौल शहर पिछले साल खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद नप ने सार्वजनिक शौचालयों की देखरेख पर ध्यान देना कम कर दिया। इससे अव्यवस्था होती गई और सभी शौचालय जर्जर हो गए। इसके चलते झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। इससे शहर में चारों ओर गंदगी को बढ़ावा मिल रहा है।
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असामाजिक तत्व तोड़कर ले गए टोंटी
लोगों का कहना है कि शुरुआत में तो नप ने शौचालयों की देखरेख के लिए सात-आठ कर्मचारी लगाए थे। कर्मचारियों को शौचालयों पर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ-साथ कोई असामाजिक तत्व शौचालय की टोंटी व पाइप आदि को नुकसान न पहुंचाए, इस पर भी ध्यान रखना था। कुछ दिन तो सब कुछ ठीक-ठाक चला लेकिन धीरे-धीरे शौचालयों की देखभाल, सफाई व पानी की व्यवस्था पर ध्यान कम होता गया। यूज न होने से असामाजिक तत्व अंदर लगी पानी की टोंटी व पाइप तोड़कर ले गए। नप के एक अधिकारी ने बताया कि चितवन वाटिका के पास स्थित शौचालय पर तीन-चार बार टोंटी लगवाई गई लेकिन असामाजिक तत्व तोड़कर ले गए।
ताले लटके मिले
नगर परिषद द्वारा सार्वजनिक शौचालयों की देखरेख पर ध्यान न देने के कारण शहर के अधिकांश शौचालय बेकार हो गए हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार इन सार्वजनिक शौचालयों का दौरा किया तो पाया कि छोटे-बड़े तालाब के पास (गंदे नाले) बने पांच शौचालयों में से तीन पर ताले लटके हुए थे। एक खुला हुआ तो एक गंदगी से अटा पड़ा था। आसपास के लोगों ने बताया कि कई महीनों से पानी नहीं था। कुछ दिन पहले नप ने पानी का कनेक्शन कराया है। इसके बाद शौचालय में ताला लगा दिया है। स्टेडियम के पास दो शौचालय बनाए गए हैं। यह भी टूटे पड़े हैं और प्रयोग करने के लायक नहीं हैं। इसके अलावा पार्क, पुल बाजार, चितवन वाटिका, महल मोहल्ला, जल महल के पास, गंदा नाला रेवाड़ी रोड पर, सुभाष पार्क समेत अन्य जगहों पर बने शौचालय खराब है। उन्हें देखकर सहजता से पता लगाया जा सकता है कि इन शौचालयों पर न सफाई की व्यवस्था है और न ही पानी की।
वर्जन
शहर के सभी कंडम शौचालयों को ठीक कराया जा रहा है। जल्द शौचालय साफ-सुथरा नजर आएंगे। शौचालय में ताला बंद होने की जानकारी ली जाएगी और खुलवाया जाएगा।
- भारती सैनी, चेयरमैन, नप।
वर्जन
शौचालयों के रिपेयर का कार्य चल रहा है। अभी आठ कर्मचारी शौचालयों की देखरेख में लगे हैं। इनकी सफाई और देखरेख के लिए अलग से टेंडर जारी किया जाएगा।
- मुकेश शर्मा, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नप।
शहरवासी करें नप का सहयोग
शहर के शौचालय प्रयोग करने लायक नहीं है। इसे नप को गंभीरता से लेकर सफाई करानी चाहिए। दूसरा सफाई अभियान में शहरवासियों को भी नप का सहयोग करना चाहिए।
- दलजीत राजेंद्र चेतीवाल, सामाजिक कार्यकर्ता।
नप अधिकारी नहीं सफाई के प्रति गंभीर
शहर के शौचालय खस्ता हालत में हैं। मेन शहर में तो शौचालय हैं ही नहीं। नप के अधिकारी शहर की सफाई को लेकर गंभीर नहीं हैं।
- विकास अग्रवाल, पुल बाजार।