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भागवत कथा सुनने वालों की होती है मनोकामना पूरी
Updated Mon, 28 Aug 2017 11:52 PM IST
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भागवत कथा सुनने वालों की होती है मनोकामना पूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। मोहल्ला संघीवाड़ा स्थित राधा वल्लभ गणेश मंदिर में रमेश संघी की संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को सर्वप्रथम आचार्य मनीष शास्त्री और संदीप ने पूजन कराया। भागवत आचार्य पंडित बजरंग शास्त्री ने भागवत कथा में बताया की भागवत की कथा सहजता से मिलना कठिन है। इससके सुनने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
उन्होंने कहा कि जीव के जब बहुत जन्मों के पुण्य उदय होते हैं, तब श्रीमद्भागवत की कथा की प्राप्ति होती है। भागवत की कथा धन्य है जो प्रेत पीड़ा को दूर करने वाली है। जो जीव श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत की कथा को श्रवण करता है, प्रभु उनकी सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं और जीव परम पद को प्राप्त करता है। तृतीय दिवस की कथा में आचार्य ने भागवत का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत नारायण का स्वरूप है और मुक्ति प्रदाता है। भागवत मुख्य रूप से भगवान के चौबीस अवतारों का वर्णन है। इसके बाद आचार्य जी ने शुकदेव जन्म, परीक्षित जन्म, कलियुग आगमन, कुंती स्तुति, भीष्म पितामह देह त्याग, परीक्षित कथा संत का श्राप और शुकदेव के आगमन की कथा सुनायी। नरसिंह अवतार की कथा का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया की भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहते हैं। इस अवसर पर भगवान नरसिंह की सुंदर झांकी भी निकाली गई। कथा में मुख्य रूप से रमेश संघी, ब्रज मोहन संघी, प्रवीण संघी, नवीन संघी, बृज भूषण संघी, पुरुषोत्तम संघी, मनोहर लाल संघी, संजय संघी, जमना प्रसाद, कमला देवी संघी, कविता संघी ललिता संघी, सुमन, प्रियंका, बबीता आदि उपस्थित थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। मोहल्ला संघीवाड़ा स्थित राधा वल्लभ गणेश मंदिर में रमेश संघी की संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को सर्वप्रथम आचार्य मनीष शास्त्री और संदीप ने पूजन कराया। भागवत आचार्य पंडित बजरंग शास्त्री ने भागवत कथा में बताया की भागवत की कथा सहजता से मिलना कठिन है। इससके सुनने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
उन्होंने कहा कि जीव के जब बहुत जन्मों के पुण्य उदय होते हैं, तब श्रीमद्भागवत की कथा की प्राप्ति होती है। भागवत की कथा धन्य है जो प्रेत पीड़ा को दूर करने वाली है। जो जीव श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत की कथा को श्रवण करता है, प्रभु उनकी सभी मनोकामना को पूर्ण करते हैं और जीव परम पद को प्राप्त करता है। तृतीय दिवस की कथा में आचार्य ने भागवत का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत नारायण का स्वरूप है और मुक्ति प्रदाता है। भागवत मुख्य रूप से भगवान के चौबीस अवतारों का वर्णन है। इसके बाद आचार्य जी ने शुकदेव जन्म, परीक्षित जन्म, कलियुग आगमन, कुंती स्तुति, भीष्म पितामह देह त्याग, परीक्षित कथा संत का श्राप और शुकदेव के आगमन की कथा सुनायी। नरसिंह अवतार की कथा का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया की भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहते हैं। इस अवसर पर भगवान नरसिंह की सुंदर झांकी भी निकाली गई। कथा में मुख्य रूप से रमेश संघी, ब्रज मोहन संघी, प्रवीण संघी, नवीन संघी, बृज भूषण संघी, पुरुषोत्तम संघी, मनोहर लाल संघी, संजय संघी, जमना प्रसाद, कमला देवी संघी, कविता संघी ललिता संघी, सुमन, प्रियंका, बबीता आदि उपस्थित थे।
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