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Kurukshetra News: अमेरिका भेजने के नाम पर दो परिवारों से 1.11 करोड़ की ठगी
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कुरुक्षेत्र/पिहोवा/ईस्माईलाबाद। अमेरिका से प्रवासी भारतीयों के निष्कासन का सिलसिला जारी है। पुलिस ने अवैध प्रवास के नाम पर दो परिवारों से कुल 1.11 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में दो एजेंटों के खिलाफ मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों को इटली, दुबई, स्पेन, ग्वाटेमाला, निकारागुआ और मैक्सिको जैसे देशों में घुमाया गया। पीड़ितों का दावा है कि एजेंटों ने अमेरिका भेजने और वहां शरण दिलवाने का वादा किया लेकिन कैंप पहुंचने के बाद एजेंटों ने उनसे संपर्क तोड़ लिया और डोंकर को भुगतान से इन्कार कर दिया। इसके बाद वहां की पुलिस की ओर से उन्हें पकड़कर भारत डिपोर्ट कर दिया गया।
पहला मामला इस्माईलाबाद थाने में 21.80 लाख की ठगी का हुआ दर्ज
थाना इस्माईलाबाद में तंगौरी गांव निवासी गौरव ने शिकायत दर्ज करते हुए बताया कि सितंबर 2024 में वह भारत से इटली गया था। वहां उसकी मुलाकात अंबाला के पंजेल निवासी एजेंट सुभाष से हुई जिसने एक महीने में अमेरिका भेजने का वादा किया। सौदा 21.80 लाख रुपये में तय हुआ। सुभाष ने 90,000 रुपये एडवांस में खाते में मांगे, जो गौरव ने जमा किए। अगले दिन सुभाष ने स्पेन की टिकट भेजी और गौरव को स्पेन भेज दिया। वहां से ग्वाटेमाला और निकारागुआ होते हुए मेक्सिको पहुंचाया गया। मेक्सिको में सुभाष के एक साथी ने गौरव का फोन छीन लिया और उसे 72 घंटे गाड़ी में रखा। सुभाष ने इस दौरान गौरव के परिवार से 20 लाख और फिर 1.80 लाख रुपये वसूले। मैक्सिको में दो महीने तक भूखा-प्यासा रखा गया जबकि सुभाष ने खर्च वहन करने का वादा किया था। 26 नवंबर 2024 को बॉर्डर पार करवाने के बाद गौरव 15 अगस्त 2025 तक कैंप में रहा। सुभाष ने पैसे लेने के बावजूद डोंकर को भुगतान न करने की बात कही। अंत में अमेरिका सरकार ने गौरव को पकड़कर भारत डिपोर्ट कर दिया। सुभाष ने पैसे लौटाने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर एएसआई सलिंद्र कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू की।
दूसरा मामला पिहोवा थाने में 90 लाख की धोखाधड़ी का हुआ दर्ज
पिहोवा के सैनी मोहल्ला निवासी राजेश कुमार ने शिकायत में बताया कि जनवरी 2024 में कपूरथला निवासी सर्वजीत कुमार उर्फ साबी और उसके साथी लियो ने उनके बेटे पीयूष को अमेरिका भेजने का वादा किया। 18 नवंबर को तीन लाख और दो दिन बाद पांच लाख रुपये साबी के खाते में ट्रांसफर किए गए। 27 नवंबर को पीयूष को 5.25 लाख के डॉलर के साथ दुबई भेजा गया, जहां एजेंटों ने डॉलर छीन लिए। इसके बाद ब्लैकमेलिंग शुरू हुई। 30 नवंबर को पांच लाख, दिसंबर में 4.5 लाख, जनवरी 2025 में तीन लाख रुपये चेक और गूगल-पे के जरिये भेजे गए।
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पीयूष को स्पेन के मैड्रिड भेजकर 25 लाख रुपये लिए, जो फिल्मी तरीके से कोड वर्ड के रूप में 10 रुपये का नोट के जरिये पिपली में वसूले गए। इसके बाद 20 जनवरी को चार लाख, 8.5 लाख और 13 फरवरी को चार लाख रुपये और लिए गए। मैक्सिको पहुंचने पर पीयूष को भूखा-प्यासा रखा गया। रिहाई के लिए 18.30 लाख रुपये और मांगे गए। चार महीने जेल में रहने के बाद 14 अगस्त को पीयूष को डिपोर्ट कर भारत भेजा गया। पीयूष ने बताया कि रास्ते में उसे टॉर्चर किया गया। पैसे मांगने पर साबी और लियो ने जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर, जांच शुरू कर दी : निर्मल सिंह
पिहोवा के डीएसपी निर्मल सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की है। इस्माईलाबाद में एएसआई सलिंद्र कुमार और पिहोवा में संबंधित थाना पुलिस जांच कर रही है। ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी ठगी रोकी जा सके।
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पहला मामला इस्माईलाबाद थाने में 21.80 लाख की ठगी का हुआ दर्ज
थाना इस्माईलाबाद में तंगौरी गांव निवासी गौरव ने शिकायत दर्ज करते हुए बताया कि सितंबर 2024 में वह भारत से इटली गया था। वहां उसकी मुलाकात अंबाला के पंजेल निवासी एजेंट सुभाष से हुई जिसने एक महीने में अमेरिका भेजने का वादा किया। सौदा 21.80 लाख रुपये में तय हुआ। सुभाष ने 90,000 रुपये एडवांस में खाते में मांगे, जो गौरव ने जमा किए। अगले दिन सुभाष ने स्पेन की टिकट भेजी और गौरव को स्पेन भेज दिया। वहां से ग्वाटेमाला और निकारागुआ होते हुए मेक्सिको पहुंचाया गया। मेक्सिको में सुभाष के एक साथी ने गौरव का फोन छीन लिया और उसे 72 घंटे गाड़ी में रखा। सुभाष ने इस दौरान गौरव के परिवार से 20 लाख और फिर 1.80 लाख रुपये वसूले। मैक्सिको में दो महीने तक भूखा-प्यासा रखा गया जबकि सुभाष ने खर्च वहन करने का वादा किया था। 26 नवंबर 2024 को बॉर्डर पार करवाने के बाद गौरव 15 अगस्त 2025 तक कैंप में रहा। सुभाष ने पैसे लेने के बावजूद डोंकर को भुगतान न करने की बात कही। अंत में अमेरिका सरकार ने गौरव को पकड़कर भारत डिपोर्ट कर दिया। सुभाष ने पैसे लौटाने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर एएसआई सलिंद्र कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू की।
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दूसरा मामला पिहोवा थाने में 90 लाख की धोखाधड़ी का हुआ दर्ज
पिहोवा के सैनी मोहल्ला निवासी राजेश कुमार ने शिकायत में बताया कि जनवरी 2024 में कपूरथला निवासी सर्वजीत कुमार उर्फ साबी और उसके साथी लियो ने उनके बेटे पीयूष को अमेरिका भेजने का वादा किया। 18 नवंबर को तीन लाख और दो दिन बाद पांच लाख रुपये साबी के खाते में ट्रांसफर किए गए। 27 नवंबर को पीयूष को 5.25 लाख के डॉलर के साथ दुबई भेजा गया, जहां एजेंटों ने डॉलर छीन लिए। इसके बाद ब्लैकमेलिंग शुरू हुई। 30 नवंबर को पांच लाख, दिसंबर में 4.5 लाख, जनवरी 2025 में तीन लाख रुपये चेक और गूगल-पे के जरिये भेजे गए।
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पीयूष को स्पेन के मैड्रिड भेजकर 25 लाख रुपये लिए, जो फिल्मी तरीके से कोड वर्ड के रूप में 10 रुपये का नोट के जरिये पिपली में वसूले गए। इसके बाद 20 जनवरी को चार लाख, 8.5 लाख और 13 फरवरी को चार लाख रुपये और लिए गए। मैक्सिको पहुंचने पर पीयूष को भूखा-प्यासा रखा गया। रिहाई के लिए 18.30 लाख रुपये और मांगे गए। चार महीने जेल में रहने के बाद 14 अगस्त को पीयूष को डिपोर्ट कर भारत भेजा गया। पीयूष ने बताया कि रास्ते में उसे टॉर्चर किया गया। पैसे मांगने पर साबी और लियो ने जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर, जांच शुरू कर दी : निर्मल सिंह
पिहोवा के डीएसपी निर्मल सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की है। इस्माईलाबाद में एएसआई सलिंद्र कुमार और पिहोवा में संबंधित थाना पुलिस जांच कर रही है। ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी ठगी रोकी जा सके।