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Kurukshetra News: मंडियों में गेट पास कटे पर खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी
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कुरुक्षेत्र। शाहाबाद में दो दिन के आंदोलन के बाद भी जिले की अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है। शनिवार को करीब 11 बजे से गेट पास काटे गए लेकिन खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर बड़ी संख्या में किसानों को समस्या का सामना करना पड़ा। जिले में 300 से ज्यादा गेट पास काटे गए, जिनमें थानेसर अनाजमंडी में करीब 80 गेट पास शामिल थे। 30 फीसदी से भी अधिक किसानों का रिकॉर्ड पोर्टल पर नहीं मिल पाया। जिन किसानों का डाटा पोर्टल पर सही था, केवल उन्हीं के गेट पास काटे गए। जिनका डाटा पोर्टल पर नहीं मिला, उनका रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज कर धान उतरवाया गया। शनिवार देर शाम तक भी सरकारी खरीद शुरू होने संबंधी कोई पत्र अधिकारियों के पास नहीं पहुंचा था। इस बीच, अनाज मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है।
पीआर किस्म की धान की 70 हजार क्विंटल से अधिक आवक हो चुकी है। किसान आंदोलन खत्म होने के बाद सरकारी खरीद की उम्मीद में आवक तीन दिन से बढ़ चुकी है। मंडी में धान के ढेर लगे हुए हैं इससे न तो खरीद हो पा रही है और न ही उठान हो पा रहा है। परिणामस्वरूप, अनाज मंडियां पूरी तरह भर चुकी हैं।
ब्रह्मसरोवर बना अस्थायी अनाजमंडी, चारों ओर धान के ढेर
ब्रह्मसरोवर भी धान की अस्थायी मंडी बन चुका है। चारों ओर धान के ढेर लग चुके हैं, जहां दिन भर धान की उतारा जा रहा है। सफाई, तौलाई आदि कार्य किए जाने लगे हैं। ट्रैक्टरों से लेकर अन्य वाहनों की आवाजाही भी बढ़ चुकी है। वीवीआईपी घाट के समक्ष से लेकर हर पार्किंग व आसपास सड़कों पर भी धान दिखाई देने लगा है, ऐसे में अब धान सीजन के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होने वाली है।
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किसानों के दबाव में शाहाबाद में गेटपास कटने लगे, उठान न होने से किसान-आढ़ती परेशान
शाहाबाद। धान की खरीद शुरू होने से पहले शाहाबाद अनाज मंडी में फसल के गेट पास कटने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 26 सितंबर को ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत 5000 क्विंटल धान के लिए 79 गेट पास काटे गए। मंडी में बड़ी मात्रा में धान पहुंचने के बावजूद उठान शुरू न होने से किसान और आढ़ती दोनों परेशान हैं। हालांकि यह गेट आस भी किसानों के दबाव के बाद ही काटे जा रहे हैं जबकि अभी प्रशासन की और से किसानों का डाटा सत्यापित नहीं किया गया है।
मार्केट कमेटी सचिव बोले, पोर्टल पर डाटा सत्यापन कराएं किसान
मार्केट कमेटी शाहाबाद के सचिव कृष्ण कुमार मलिक ने बताया कि 26 सितंबर को 5000 क्विंटल धान के लिए 79 गेट पास ऑनलाइन काटे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हीं किसानों के गेट पास काटे जा रहे हैं, जिनका डाटा पोर्टल पर सत्यापित है। ऐसे में किसान गेट पास के लिए आवेदन करने से पहले अपना डाटा सत्यापित कराना सुनिश्चित कर लें। बिना डाटा सत्यापित कराए किसान का गेट पास नहीं कट पाएगा। उन्होंने किसानों से अपील डाटा सत्यापन के बाद ही मंडी में धान लेकर आने की अपील की।
आंदोलन के दबाव में शुरू हुई गेट पास की प्रक्रिया : बैंस
भाकियू चढूनी गुट के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि किसानों के आंदोलन के दबाव के बाद अनाज मंडियों में धान के गेट पास काटने और भराई की प्रक्रिया शुरू हुई है। किसानों का डाटा समय पर पोर्टल पर सत्यापित न होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है और इससे साफ है कि प्रशासन धान खरीद को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं था। अनाज मंडियां धान से भर चुकी हैं लेकिन अभी तक खरीद और उठान की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है।
मंडी में करीब ढाई लाख क्विंटल धान : कालड़ा
शाहाबाद मंडी प्रधान बिट्टू कालड़ा और प्रधान धनपत राय अग्रवाल ने कहा कि मंडी में करीब ढाई लाख क्विंटल धान पड़ा है। धान की आवक लगातार जारी है लेकिन उठान न होने के कारण मंडी में जगह की समस्या बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर किसानों और आढ़तियों दोनों पर पड़ रहा है। सरकार और प्रशासन को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खरीद के साथ-साथ उठान की प्रक्रिया भी तेजी से शुरू करवानी चाहिए ताकि मंडी में नई आने वाली फसल के लिए जगह उपलब्ध हो सके ।
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पीआर किस्म की धान की 70 हजार क्विंटल से अधिक आवक हो चुकी है। किसान आंदोलन खत्म होने के बाद सरकारी खरीद की उम्मीद में आवक तीन दिन से बढ़ चुकी है। मंडी में धान के ढेर लगे हुए हैं इससे न तो खरीद हो पा रही है और न ही उठान हो पा रहा है। परिणामस्वरूप, अनाज मंडियां पूरी तरह भर चुकी हैं।
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ब्रह्मसरोवर बना अस्थायी अनाजमंडी, चारों ओर धान के ढेर
ब्रह्मसरोवर भी धान की अस्थायी मंडी बन चुका है। चारों ओर धान के ढेर लग चुके हैं, जहां दिन भर धान की उतारा जा रहा है। सफाई, तौलाई आदि कार्य किए जाने लगे हैं। ट्रैक्टरों से लेकर अन्य वाहनों की आवाजाही भी बढ़ चुकी है। वीवीआईपी घाट के समक्ष से लेकर हर पार्किंग व आसपास सड़कों पर भी धान दिखाई देने लगा है, ऐसे में अब धान सीजन के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होने वाली है।
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किसानों के दबाव में शाहाबाद में गेटपास कटने लगे, उठान न होने से किसान-आढ़ती परेशान
शाहाबाद। धान की खरीद शुरू होने से पहले शाहाबाद अनाज मंडी में फसल के गेट पास कटने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 26 सितंबर को ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत 5000 क्विंटल धान के लिए 79 गेट पास काटे गए। मंडी में बड़ी मात्रा में धान पहुंचने के बावजूद उठान शुरू न होने से किसान और आढ़ती दोनों परेशान हैं। हालांकि यह गेट आस भी किसानों के दबाव के बाद ही काटे जा रहे हैं जबकि अभी प्रशासन की और से किसानों का डाटा सत्यापित नहीं किया गया है।
मार्केट कमेटी सचिव बोले, पोर्टल पर डाटा सत्यापन कराएं किसान
मार्केट कमेटी शाहाबाद के सचिव कृष्ण कुमार मलिक ने बताया कि 26 सितंबर को 5000 क्विंटल धान के लिए 79 गेट पास ऑनलाइन काटे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हीं किसानों के गेट पास काटे जा रहे हैं, जिनका डाटा पोर्टल पर सत्यापित है। ऐसे में किसान गेट पास के लिए आवेदन करने से पहले अपना डाटा सत्यापित कराना सुनिश्चित कर लें। बिना डाटा सत्यापित कराए किसान का गेट पास नहीं कट पाएगा। उन्होंने किसानों से अपील डाटा सत्यापन के बाद ही मंडी में धान लेकर आने की अपील की।
आंदोलन के दबाव में शुरू हुई गेट पास की प्रक्रिया : बैंस
भाकियू चढूनी गुट के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि किसानों के आंदोलन के दबाव के बाद अनाज मंडियों में धान के गेट पास काटने और भराई की प्रक्रिया शुरू हुई है। किसानों का डाटा समय पर पोर्टल पर सत्यापित न होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है और इससे साफ है कि प्रशासन धान खरीद को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं था। अनाज मंडियां धान से भर चुकी हैं लेकिन अभी तक खरीद और उठान की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है।
मंडी में करीब ढाई लाख क्विंटल धान : कालड़ा
शाहाबाद मंडी प्रधान बिट्टू कालड़ा और प्रधान धनपत राय अग्रवाल ने कहा कि मंडी में करीब ढाई लाख क्विंटल धान पड़ा है। धान की आवक लगातार जारी है लेकिन उठान न होने के कारण मंडी में जगह की समस्या बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर किसानों और आढ़तियों दोनों पर पड़ रहा है। सरकार और प्रशासन को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खरीद के साथ-साथ उठान की प्रक्रिया भी तेजी से शुरू करवानी चाहिए ताकि मंडी में नई आने वाली फसल के लिए जगह उपलब्ध हो सके ।