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पराली जलाने पर 104 किसानों से वसूला ढाई लाख जुर्माना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2020 12:54 AM IST
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Two and a half lakh fine from 104 farmers for burning stubble
पर्यावरण में जहर घोल रहे कुछ किसान...यह तस्वीर लाडवा-रोड के साथ लगते क्षेत्र के खेत की है। सरकार व प? - फोटो : Kurukshetra
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने खेतों में खरपतवार अथवा पराली को जलाने पर रोक लगा रखी है। इसके बाद किसान खुलेआम पराली और खेत में बचे ठूंठों को जला रहे हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि खेतों की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित हो रही है। जिला के प्रत्येक ब्लॉक में किसान आग लगाकर खेतों का ठूंठ जला रहे हैं। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि कृषि विभाग द्वारा पराली जलाने को लेकर जिला के 104 किसानों से करीब ढाई लाख रुपये फाइन वसूला जा चुका है और वहीं थानेसर के एक किसान के खिलाफ एसआईआर भी दर्ज की जा चुकी है, लेकिन बावजूद इसके मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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किसानों को जागरूक करने के लिए प्रशासन द्वारा बैठकों का दौर जारी है, इन बैठकों का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा क्योंकि दिनरात पराली में लगी आग से प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। मशीन से कटाई करने वाले किसान खेत से ठूंठ को हटाने के लिए पहले उसके ऊपर पराली को डालकर फिर आग लगा रहे हैं। इससे खेत की उर्वरा शक्ति छीड़ होने के साथ ही पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।
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कागजों पर चलता है जागरूकता अभियान
प्रशासनिक दावों की बात करें तो वह नवंबर माह के शुरुआत से ही पराली न जलाने को लेकर किसानों को जागरूक करना शुरू कर दिया था। इसके साथ कुछ एनजीओ भी यह काम कर रही हैं। इसके बावजूद खेतों में जल रही पराली इस बात का संकेत है कि किसान इसे लेकर जागरूक नहीं हो रहा है। किसानों को प्रशासन की कार्रवाई और जुर्माने का डर भी दिखाया जा रहा है, लेकिन फिर भी पराली जलाने का सिलसिला निरंतर जारी है।
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193 पहुंचा प्रदूषण स्तर, आंखों में चुभ रहा स्मॉग
पराली जलाने से प्रदूषण लेवल 193 पहुंच गया है। अगर यह लगातार बढ़ता रहा तो लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। इन दिनों दिनरात फॉग से आंखों में भी जलन रहने लगी है। शाम के समय सबसे ज्यादा स्मॉग देखने को मिलती है।
2500 रुपये प्रति घटना लिया जाता है जुर्माना
पराली जलाने पर प्रति घटना के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। दो एकड़ से कम पर 2500 रुपये प्रति घटना, दो एकड़ से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये प्रति घटना और पांच एकड़ से अधिक पर 15000 रुपये प्रति घटना जुर्माना का प्रावधान है।

पराली को जलाने से होने वाले नुकसान
- इससे पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है, जो कि सभी के लिए काफी हानिकारक है।
- फसल की सुरक्षा के लिए कुछ सहायक कीट जो कि खेत में रहते हैं वह भी मर रहे हैं। इसका खामियाजा कम उत्पादन के रूप में भुगतना पड़े रहा है।
- खेत में आग लगाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है, जिससे उत्पादन में असर पड़ता है।
- जल्द दूसरी फसल लेने के लिए किसान उठा रहे भारी नुकसान।
104 किसानों से वसूला ढाई लाख जुर्माना : डीडीए
डीडीए डॉ. प्रदीप मील ने कहा कि जिला में अब तक 104 किसानों से पराली में आग लगाने को लेकर करीब ढाई लाख रुपये जुर्माना वसूला गया है। वहीं, एक थानेसर ब्लॉक के एक किसान के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। जिले में 304 जगह पराली में आग लगाने के मामले पाए गए हैं। डॉ. प्रदीप ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वह पराली को आग न लगाएं, इससे पर्यावरण के साथ-साथ हमारे शरीर को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि इस समय सेटेलाइट से खेतों पर नजर रखी जा रही है। पराली में आग लगाने वाला किसान किसी भी सूरत में बच नहीं सकता।
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