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Kurukshetra News: गगनजोत के शव को बेटे ने दी मुखाग्नि, एक बेटा स्पेन से नहीं पहुंच पाया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2026 01:56 AM IST
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Gaganjot's son performed the last rites; one son could not make it from Spain.
पिहोवा। प्रदेश के पूर्व कृषि मंत्री और पिहोवा से चार बार विधायक रहे जसविंदर सिंह संधू के बेटे करीब 48 वर्षीय गगनजोत संधू के शव का शनिवार को अंतिम संस्कार किया गया। बेटे आफताब ने मुखाग्नि दी। छोटा बेटा स्पेन में पढ़ाई करता है, जिस कारण वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका।
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थानेसर के विधायक अशोक अरोड़ा, शाहाबाद के विधायक रामकरण काला, पिहोवा के विधायक मनदीप चट्ठा, नगर पालिका अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि पूर्व कृषि मंत्री बलबीर सैनी, हरियाणा सिख द्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष गोल्डी खेरा, इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष जसविंदर खैरा सहित बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी अंतिम यात्रा में शिरकत की। अंतिम संस्कार के बाद गांव के गुरुद्वारे में अरदास की गई।
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शुक्रवार को पंजाब के रोपड़ जिले के पखराली गांव स्थित फार्म हाउस में गगनजोत ने खुद को राइफल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। देर रात शव पैतृक गांव गुमथला गढ़ू लाया गया था। हालांकि अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गगनजोत ने यह कदम क्यों उठाया है जबकि फिलहाल इसके पीछे घरेलू झगड़े को ही कारण बताया जा रहा है। गगनजोत की मौत के साथ ही क्षेत्र की राजनीति में उस चेहरे की कहानी भी खत्म हो गई, जिसे कभी पिता जसविंदर सिंह संधू की राजनीतिक विरासत का वारिस माना जाता था। जानकारों के मुताबिक पिता चाहते थे कि गगनजोत राजनीति में आगे आएं और परिवार की सियासी जमीन संभालें। गगनजोत, भाई जसतेज सिंह संधू से छोटे और हरकीरत संधू से बड़े थे।
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पिता जसविंद्र संधू की मृत्यु के बाद गगनजोत पुश्तैनी घर छोड़कर भाई से अलग हो गए थे। उन्होंने पुश्तैनी घर के पास ही अपना नया घर और फार्म हाउस बना लिया। यहां बेटे और पत्नी के साथ रहते थे। पिता का 2019 में लिवर कैंसर से निधन हुआ था। इसके बाद परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की उम्मीद गगनजोत से भी जुड़ी थी पर राजनीति में कदम रखने के बाद उनका सफर लगातार विवादों से घिरता चला गया। उन्होंने इनेलो से अपनी राजनीतिक की शुरुआत की लेकिन पिता की मौत के बाद पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया।

वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी की। बाद में दीपेंद्र हुड्डा के समझाने पर नामांकन वापस ले लिया था। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में गगनजोत और उनके बड़े भाई जसतेज संधू के एक-दूसरे के सामने आने की स्थिति बन गई थी। बाद में दोनों पीछे हट गए और चुनाव नहीं लड़ा। गगनजोत गुमथला गढ़ू से दो बार सरपंच रहे। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने गांव में वाई-फाई और डिजिटल पंचायत की पहल की थी। वर्ष 2016 में गुमथला गढ़ू में वाई-फाई हॉटस्पॉट की सुविधा शुरू कर प्रदेश की पहली हाईटेक पंचायत बनाई थी।
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