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Haryana: झोपड़ी पर काल बन गिरा पेड़, सास-बहू और बच्ची की मौत, तीन अन्य सदस्य बाल-बाल बचे
Wed, 12 Oct 2022 02:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Oct 2022 02:47 AM IST
सार
हादसे में परिवार के तीन अन्य सदस्य बाल-बाल बचे हैं। चीख पुकार मच गई। बारिश और तेज हवा के चलते अरुणाय मोड़ के पास हादसा हुआ।
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पेड़ गिरना।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा के अरुणाय मोड़ के पास बारिश और तेज हवा से एक झोपड़ी में सो रहे परिवार पर पेड़ गिर गया, जिसके नीचे दबने से सास-बहू और पांच दिन की मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। वहीं तीन अन्य लोग बाल-बाल बच गए।
हादसे के बाद मौके पर मची चीख पुकार से बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। मशक्कत के बाद पेड़ के नीचे दबे लोगों को निकाला गया। मृतकों की पहचान मूल रूप से अलवर निवासी हेमा (42), करिश्मा (20) और पांच दिन की बच्ची के तौर पर हुई है।
सरस्वती खेड़ा कॉलोनी (अरुणाय मोड़) निवासी चांद ने बताया कि वे मूल रूप से राजस्थान में अलवर के रहने वाले हैं। अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ पिछले 10 सालों से अरुणाय मोड़ पर खाली पड़ी जमीन में झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। इस दौरान लोगों से बधाई मांग कर परिवार का गुजर बसर चलता है। रोजाना की तरह सोमवार की रात वह अपनी मां, पत्नी, बेटी और भाइयों के साथ सड़क किनारे बनी अपनी झोपड़ी में सो गए थे।
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सुबह करीब छह बजे बारिश और तेज हवा के कारण सड़क किनारे खड़ा एक सफेदे का विशाल पेड़ उनकी झोपड़ी पर गिर गया, जिससे वे लोग उसके नीचे दब गए। किसी तरह वह और उसका ममेरा भाई बजरंगी झोपड़ी से बाहर निकले और आसपास के लोगों की सहायता से
छोटे भाई 11 वर्षीय देव को बाहर निकाला, जबकि उसकी मां हेमा, पत्नी करिश्मा और छोटी बच्ची की नीचे दबने से मौत हो गई। थाना सदर प्रबंधक जसवंत सिंह ने बताया कि बयान के आधार पर पुलिस ने इत्तेफाकिया रपट दर्ज कर ली है। शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों केेेे हवाले कर दिया गया है।
दो दिन बाद होना था बच्ची का नामकरण
चांद ने बताया कि उसकी शादी करिश्मा के साथ करीब चार साल पहले हुई थी। चार दिन पहले ही उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया था। सोमवार को ही उसकी पत्नी सिविल अस्पताल से छुट्टी मिलने पर झोपड़ी में पहुंची थी। बेटी के जन्म से परिवार के सभी लोग खुश थे। वीरवार को कुलदेवी की पूजा के साथ बच्ची का नामकरण किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही खुशियों को ग्रहण लग गया और कुदरत की मार ने सब कुछ खत्म कर दिया।
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हादसे के बाद मौके पर मची चीख पुकार से बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। मशक्कत के बाद पेड़ के नीचे दबे लोगों को निकाला गया। मृतकों की पहचान मूल रूप से अलवर निवासी हेमा (42), करिश्मा (20) और पांच दिन की बच्ची के तौर पर हुई है।
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सरस्वती खेड़ा कॉलोनी (अरुणाय मोड़) निवासी चांद ने बताया कि वे मूल रूप से राजस्थान में अलवर के रहने वाले हैं। अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ पिछले 10 सालों से अरुणाय मोड़ पर खाली पड़ी जमीन में झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। इस दौरान लोगों से बधाई मांग कर परिवार का गुजर बसर चलता है। रोजाना की तरह सोमवार की रात वह अपनी मां, पत्नी, बेटी और भाइयों के साथ सड़क किनारे बनी अपनी झोपड़ी में सो गए थे।
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सुबह करीब छह बजे बारिश और तेज हवा के कारण सड़क किनारे खड़ा एक सफेदे का विशाल पेड़ उनकी झोपड़ी पर गिर गया, जिससे वे लोग उसके नीचे दब गए। किसी तरह वह और उसका ममेरा भाई बजरंगी झोपड़ी से बाहर निकले और आसपास के लोगों की सहायता से
छोटे भाई 11 वर्षीय देव को बाहर निकाला, जबकि उसकी मां हेमा, पत्नी करिश्मा और छोटी बच्ची की नीचे दबने से मौत हो गई। थाना सदर प्रबंधक जसवंत सिंह ने बताया कि बयान के आधार पर पुलिस ने इत्तेफाकिया रपट दर्ज कर ली है। शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों केेेे हवाले कर दिया गया है।
दो दिन बाद होना था बच्ची का नामकरण
चांद ने बताया कि उसकी शादी करिश्मा के साथ करीब चार साल पहले हुई थी। चार दिन पहले ही उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया था। सोमवार को ही उसकी पत्नी सिविल अस्पताल से छुट्टी मिलने पर झोपड़ी में पहुंची थी। बेटी के जन्म से परिवार के सभी लोग खुश थे। वीरवार को कुलदेवी की पूजा के साथ बच्ची का नामकरण किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही खुशियों को ग्रहण लग गया और कुदरत की मार ने सब कुछ खत्म कर दिया।

करिश्मा। (फाइल फोटो)- फोटो : Kurukshetra

मासूम बच्ची। (फाइल फोटो)- फोटो : Kurukshetra