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फीस भरने का झांसा देकर स्कूल प्रशासक को लगाई हजारों की चपत, केस दर्ज
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ठग ने बच्चे की स्कूल फीस जमा कराने का झांसा देकर स्कूल संचालक से फोन-पे का नंबर मांग कर उसे 72 हजार 800 रुपये की चपत लगा दी। पुलिस ने शिकायत पर केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
थानेसर लायलपुर कॉलोनी के रहने वाले विकास गाबा ने शहर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह निजी स्कूल का संचालक है। 2 दिसंबर को स्कूल के रिसेप्शन पर फोन आया, जिसमें एक व्यक्ति ने अपने बच्चे की फीस जमा करने के लिए फोन-पे नंबर की मांग की थी। रिसेप्शनिस्ट ने उस व्यक्ति को बार कोड भेजने का जिक्र किया। उस व्यक्ति ने कहा कि उसके पास कोई अन्य मोबाइल नहीं है, जिससे वह बारकोड स्कैन कर सके। उसने अपना नाम संतोखा सिंह बताया और कहा कि वह एक अस्पताल में काम करता है। व्यस्तता के कारण वह स्कूल में नहीं आ सकता है। उसे फोन-पे का मोबाइल नंबर भेज दें ताकि वह स्कूल की फीस जमा करवा सके। रिसेप्शनिस्ट ने स्कूल प्रशासक का मोबाइल नंबर उसे दे दिया। आरोपी ने उसके मोबाइल नंबर पर फोन कर कहा कि उसने खाते में एक रुपये भेजा है। वह देख लें की एक रुपये आया है या नहीं। जब उसे रुपये न आने के बारे में बताया तो उसने कहा कि उसका मर्चेंट अकाउंट है। वह एक रुपये डाले तो उसकी तरफ से शिकायतकर्ता के खाते में दो रुपये आ जाएंगे। शिकायतकर्ता ने चेक करने के लिए एक रुपया डाल तो साथ ही दो रुपये खाते में आ गए। आरोपी की फोन-पे की आईडी आई ,जिसमें उसका नाम संतोखा सिंह के नाम से रजिस्टर्ड था। इसके बाद मेरे पास मैसेज आया और 10 हजार 400 रुपये की पेमेंट रिसीव हो गई। आरोपी ने उसे कहा कि वह 10 हजार 400 रुपये उसके खाते में डाल दे तो शिकायतकर्ता खाते में 20 हजार 800 रुपये आ जाएंगे। फिर वह कहने लगा कि नेटवर्क की वजह से उसके खाते में पैसे नहीं आ रहे हैं और उसके पैसे कट रहे हैं। आरोपी ने उसे बताया कि उसके खाते में शाम तक पैसे वापस आ जाएंगे, वह चिंता न करें। आरोपी ने कहा कि वह एक बार फिर प्रयास करे, उसके पास मैसेज आया कि 20 हजार 800 रुपये बैंक रिसीव हो गए। आरोपी ने इस तरह चार बार में उसके खाते से 72 हजार 800 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
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थानेसर लायलपुर कॉलोनी के रहने वाले विकास गाबा ने शहर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह निजी स्कूल का संचालक है। 2 दिसंबर को स्कूल के रिसेप्शन पर फोन आया, जिसमें एक व्यक्ति ने अपने बच्चे की फीस जमा करने के लिए फोन-पे नंबर की मांग की थी। रिसेप्शनिस्ट ने उस व्यक्ति को बार कोड भेजने का जिक्र किया। उस व्यक्ति ने कहा कि उसके पास कोई अन्य मोबाइल नहीं है, जिससे वह बारकोड स्कैन कर सके। उसने अपना नाम संतोखा सिंह बताया और कहा कि वह एक अस्पताल में काम करता है। व्यस्तता के कारण वह स्कूल में नहीं आ सकता है। उसे फोन-पे का मोबाइल नंबर भेज दें ताकि वह स्कूल की फीस जमा करवा सके। रिसेप्शनिस्ट ने स्कूल प्रशासक का मोबाइल नंबर उसे दे दिया। आरोपी ने उसके मोबाइल नंबर पर फोन कर कहा कि उसने खाते में एक रुपये भेजा है। वह देख लें की एक रुपये आया है या नहीं। जब उसे रुपये न आने के बारे में बताया तो उसने कहा कि उसका मर्चेंट अकाउंट है। वह एक रुपये डाले तो उसकी तरफ से शिकायतकर्ता के खाते में दो रुपये आ जाएंगे। शिकायतकर्ता ने चेक करने के लिए एक रुपया डाल तो साथ ही दो रुपये खाते में आ गए। आरोपी की फोन-पे की आईडी आई ,जिसमें उसका नाम संतोखा सिंह के नाम से रजिस्टर्ड था। इसके बाद मेरे पास मैसेज आया और 10 हजार 400 रुपये की पेमेंट रिसीव हो गई। आरोपी ने उसे कहा कि वह 10 हजार 400 रुपये उसके खाते में डाल दे तो शिकायतकर्ता खाते में 20 हजार 800 रुपये आ जाएंगे। फिर वह कहने लगा कि नेटवर्क की वजह से उसके खाते में पैसे नहीं आ रहे हैं और उसके पैसे कट रहे हैं। आरोपी ने उसे बताया कि उसके खाते में शाम तक पैसे वापस आ जाएंगे, वह चिंता न करें। आरोपी ने कहा कि वह एक बार फिर प्रयास करे, उसके पास मैसेज आया कि 20 हजार 800 रुपये बैंक रिसीव हो गए। आरोपी ने इस तरह चार बार में उसके खाते से 72 हजार 800 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
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