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Kurukshetra News: जेल से ही नियंत्रित किया जा रहा था जहरीले शराब का कारोबार

Tue, 03 Sep 2024 07:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 03 Sep 2024 07:36 AM IST
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The trade of poisonous liquor was being controlled from the jail itself.
कुरुक्षेत्र। जहरीले शराब की फैक्टरी का कारोबार जिला जेल से नियंत्रित किया जा रहा था। जेल में बंद आरोपी मोनू राणा छिटपुट संदेश मोबाइल के जरिए भेज देता था, मगर कोई बड़ी डील होने पर उसके गुर्गे मुलाकात के बहाने जेल में उससे मिलने आते थे। ये खुलासा जांच में हुआ है। राज्य अपराध शाखा पंचकूला की टीम ने सोमवार को आरोपी अश्विनी और किशोरी को अदालत में पेश किया। यहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपियों ने जमानत के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, जिस पर पांच सितंबर को सुनवाई होगी।
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सूत्रों के मुताबिक जेल में यह मुलाकात दो-तीन घंटे तक चलती थी, इसके लिए उनको अलग से कमरा तक उपलब्ध कराया जाता था। इस एवज में मोनू राणा से जेल के अधिकारी 50 हजार रुपये वसूल करते थे। इसमें 10 हजार रुपये सहायक अधीक्षक अश्विनी (लाइन ऑफिसर) और कुरुक्षेत्र जेल वार्डन किशोरी अपने पास रखते थे, जबकि बकाया रकम जेल के बड़े अधिकारी को दी जाती थी। इन अधिकारियों की मदद से मोनू राणा जेल में बैठकर ही अपने सब धंधे पर नजर रख रहा था।
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जानकारी के अनुसार पिछले साल नवंबर माह में जिला यमुनानगर व अंबाला में जहरीली शराब का सेवन करने से 22 लोग काल का ग्रास बन गए थे। छानबीन के दौरान शराब में मिथाइल की मिलावट मिली थी। छानबीन में ठेकेदार समेत 22 लोग की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, आरोपी मोनू राणा हत्या का प्रयास करने के मामले में जिला जेल में बंद है।
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उधर, राज्य अपराध शाखा पंचकूला भी पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए थी। जेल से कॉल किए जाने और फैक्टरी संचालक से जेल में हो रही लंबी मुलाकात की भनक लगने पर अपराध शाखा ने तथ्य जुटाने शुरू कर दिए। हालांकि इससे पहले मामले में पकड़े गए आरोपियों की पूछताछ के बाद यमुनानगर के मौजूदा पुलिस अधीक्षक की सिफारिश पर बड़े अधिकारी समेत अश्विनी और किशोरी के खिलाफ थाना शहर थानेसर में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हो चुका है। प्रकरण में जिला जेल कुरुक्षेत्र के अधिकारियों का नाम शामिल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया। इसलिए मामले की जांच अपराध शाखा पंचकूला को सौंपी गई थी। टीम ने पूरा रिकॉर्ड, तथ्य जुटाने और छानबीन के बाद रविवार को अश्विनी और किशोरी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं गिरफ्तारी की भनक पर जिला जेल का बड़ा अधिकारी पहले ही फरार हो गया। थाना शहर में दर्ज मुकदमे में अधिकारी को नाम के साथ शामिल किया गया है। उनका मोबाइल भी बंद आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि जिला जेल के गिरफ्तार किए गए आरोपी लाइन ऑफिसर और वार्डन ने उक्त अधिकारी की संलिप्तता होने के बयान दर्ज कराए हैं।
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