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सरस्वती नदी में आदिबद्री से कुरुक्षेत्र तक पहुंची जल की धारा
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कुरुक्षेत्र। सरकार ने सरस्वती नदी को फिर से धरा पर प्रवाहित करने की योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। योजना के तहत आदिबद्री से कुरुक्षेत्र तक सरस्वती नदी में जलधार प्रवाहित की गई है। धीरे-धीरे पानी पूरी तरह प्रवाहित किया जाएगा। यह बात सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने रविवार को ईशरगढ़ में सरस्वती घाट से प्रवाहित जल का निरीक्षण करने के बाद कही।
धुम्मन ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयास से सरस्वती नदी को फिर से प्रवाहित करने की योजना बनाई गई है। इसके अनुसार आदिबद्री में बड़ा डैम बनाया जाएगा। डैम के लिए हिमाचल प्रदेश के साथ 21 जनवरी को एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया जाएगा। प्रस्ताव पर हस्ताक्षर होने के बाद करोड़ों का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया जाएगा। योजना पूरी होने के बाद सरस्वती नदी में जल को निरंतर प्रवाहित करने के प्रयास किए जाएंगे। कहा कि हाल ही में आदिबद्री से सरस्वती नदी में जल छोड़ा गया है। यह जलधारा कुरुक्षेत्र तक पहुंच गई है और धीरे-धीरे इस पानी को अंतिम छोर तक पहुंचाया जाएगा। इससे न केवल कुरुक्षेत्र के किसानों को फायदा मिलेगा, बल्कि जिले की भूजल स्तर खिसकने के कारण उत्पन्न हुई डार्क जोन की समस्या का भी समाधान होगा। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी को हजारों वर्षों बाद फिर से धरा पर बहता देखकर आत्म संतुष्टि मिलेगी। साथ ही सरकार की ओर से आदिबद्री से हरियाणा की सीमा तक नदी के किनारे स्थित पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जाएगा। नदी के आसपास के गांवों में घाटों को सुंदर बनाया जाएगा और बरसात के पानी का संरक्षण करने का प्रयास करेंगे।
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धुम्मन ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयास से सरस्वती नदी को फिर से प्रवाहित करने की योजना बनाई गई है। इसके अनुसार आदिबद्री में बड़ा डैम बनाया जाएगा। डैम के लिए हिमाचल प्रदेश के साथ 21 जनवरी को एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया जाएगा। प्रस्ताव पर हस्ताक्षर होने के बाद करोड़ों का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया जाएगा। योजना पूरी होने के बाद सरस्वती नदी में जल को निरंतर प्रवाहित करने के प्रयास किए जाएंगे। कहा कि हाल ही में आदिबद्री से सरस्वती नदी में जल छोड़ा गया है। यह जलधारा कुरुक्षेत्र तक पहुंच गई है और धीरे-धीरे इस पानी को अंतिम छोर तक पहुंचाया जाएगा। इससे न केवल कुरुक्षेत्र के किसानों को फायदा मिलेगा, बल्कि जिले की भूजल स्तर खिसकने के कारण उत्पन्न हुई डार्क जोन की समस्या का भी समाधान होगा। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी को हजारों वर्षों बाद फिर से धरा पर बहता देखकर आत्म संतुष्टि मिलेगी। साथ ही सरकार की ओर से आदिबद्री से हरियाणा की सीमा तक नदी के किनारे स्थित पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जाएगा। नदी के आसपास के गांवों में घाटों को सुंदर बनाया जाएगा और बरसात के पानी का संरक्षण करने का प्रयास करेंगे।
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