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Kurukshetra News: जिस टी-55 टैंक ने 1965 में छुड़ाए थे पाकिस्तान के पसीने वह विद्यार्थियों में भर रहा जोश

Tue, 27 Aug 2024 03:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 27 Aug 2024 03:22 AM IST
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The T-55 tank which saved Pakistan in 1965 is filling the students with enthusiasm.
कुरुक्षेत्र। जिस टी-55 टैंक ने वर्ष 1965 में हुए युद्ध के दौरान पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए थे वह अब धर्मनगरी के युवाओं में जोश भर रहा है। इसे देखते ही न केवल विद्यार्थियों बल्कि हर युवा में देशभक्ति की भावना जागृत हो उठती है।
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र (एनआईटी) में इस टैंक को स्थापित किया गया है। ये भारत-पाक युद्ध के समय का सबसे आधुनिक और उन्नत युद्ध टैंक हैं और इसका लोहा पाकिस्तान ने भी माना था। जज्बे का प्रतीक ये टैंक विद्यार्थियों को जीवन में कड़ी मेहनत कर जीत हासिल करने की प्रेरणा देगा। इसी उद्देश्य से भारत-पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों को करारी हार देने वाला ये टैंक स्वर्ण जयंती भवन के बाहर स्थापित किया गया है।
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शान से सिर उठाए अपनी जीत का संदेश दे रहा ये टैंक युवाओं में देशप्रेम की भावना को भी जागृत कर रहा है तो वहीं इंजीनियर की पढ़ाई के साथ सेना में सेवाएं देने के लिए भी विद्यार्थियों को प्रेरित करेगा। यह टैंक प्रदेशभर की एकमात्र एनआईटी की सुंदरता को भी चार चांद लगा रहा है तो वहीं सेल्फी प्वाइंट भी बन गया है। विद्यार्थी सहित हर कोई व्यक्ति ठहर कर इसे निहार कर ही निकल रहा है तथा इसे अपने फोन में भी कैद कर रहा है।
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यूरोप के चेकोस्लोवाकिया से खरीदे गए 99 टैंकों में से एक यह भी शामिल था। इस टैंक ने जहां 1965 में पाकिस्तान को पटकनी देने में अहम भूमिका निभाई थी तो वहीं 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में इसका शौर्य ज्यों का त्यों बरकरार रहा था। ये टैंक मई 2011 तक पूरी सेवा में थे। सेवानिवृत्ति पर स्वदेशी रूप से विकसित एमबीएफ-विजयंता ने इनका स्थान ले लिया। हालांकि ये टी-55 टैंक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लेकिन इनकी जबरदस्त उपलब्धियां आज भी देश के रक्षा अध्याय के स्वर्णिम अक्षरों में लिखी गई हैं।
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विद्यार्थियों को जीत के लिए प्रेरित करेगा ये टैंक : प्रो. रमना रेड्डी
संस्थान निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी का कहना है कि ये टी-55 टैंक पूना से रक्षा मंत्रालय की ओर से मंगवाया गया है ताकि विजय के प्रतीक इस टैंक से विद्यार्थी जीवन में जीत हासिल करने की प्रेरणा ले सकें। इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थी कड़ी मेहनत करें और जीवन में ऊंचाइयों को छूते हुए आगे बढ़ते रहें।


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ये है टी-55 टैंक की खासियत
37 टन का ये टैंक 7.62 मिमी एसजीएमटी समाक्षीय मशीन गन से सुसज्जित है और 14600 मीटर की लक्ष्य सीमा तक मार कर सकता था। मुख्य गन लोड 43 राउंड था, जिसमें छह आकार के चार्ज राउंड, 15 कवच-भेदी राउंड और 22 उच्च-विस्फोटक राउंड शामिल थे।
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