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Kurukshetra News: मेले में प्रशासन के दावे को मुंह चिढ़ा रही हकीकत

Tue, 02 Apr 2024 03:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 02 Apr 2024 03:01 AM IST
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The reality is mocking the administration's claims in the fair.
कुरुक्षेत्र। छह अप्रैल से शुरू होने जा रहे चैत्र-चौदस मेले के लिए प्रशासन पुख्ता प्रबंध के दावे कर रहा है। तीर्थ पर चल रहे कार्यों में प्रशासन यह दिखाने का भी प्रयास कर रहा है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है जिसे लेकर पुरोहित वर्ग भी सवाल उठा रहा है।
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तीन दिवसीय मेले में पंजाब-हरियाणा, दिल्ली सहित देशभर से पांच लाख से अधिक श्रद्धालु सरस्वती तीर्थ में स्नान आदि कर पितरों के निमित्त गति, पिंडदान व पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे। उधर, पुरोहित वर्ग प्रशासन पर कार्यों में लेट-लतीफी और लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहा है।
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पुरोहित वर्ग का कहना है कि सरस्वती नदी की सफाई के बगैर ही उसमें जल छोड़ दिया गया, जिस कारण नदी में जमा गंदगी, पॉलिथीन व अन्य कबाड़ जल के साथ बहकर तीर्थ तक पहुंच गया है। छह अप्रैल से त्रयोदशी मेले का आरंभ होगा, मगर एकादशी से ही श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचेंगे।
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एकादशी पर हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालु तीर्थ पर जुटेंगे, लेकिन तीर्थ में जल की एक बूंद भी नहीं है। अभी साफ-सफाई का कार्य चल रहा है, जिसमें अभी एक से दो दिन का समय और लगेगा। इस तरह हिमाचल प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तीर्थ के जल में स्नान और तर्पण करना मुश्किल से होगा, जबकि नदी का जल भी साफ नहीं है। सरस्वती तीर्थ पर जमी गंदगी और काई को निकाल कर तीर्थ पर इकट्ठा किया जा रहा है, जिसे सूखने के बाद उठाया जाएगा, लेकिन अभी गंदगी से उठ रही दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा तीर्थ पर रंग-रोगन, पेंट और मरम्मत के काम भी अब करवाए जा रहे हैं।

बाक्स
नदी में मरी हजारों मछलियां
उधर, हजारों मरी हुई मछलियां सरस्वती नदी के जल के ऊपर बह रही हैं। पुरोहित वर्ग का कहना है कि प्रशासन ने अचानक नदी से जल निकाल दिया, जिस कारण हजारों मछलियों की अकाल मौत हो गई। अब मरी हुई मछलियां और कबाड़ जल के साथ बहकर तीर्थ तक पहुंच गया है।
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