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मंच पर जीवंत हुई आम आदमी की मुश्किलें
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कोई दुख न हो तो बकरी खरीद लो नाटक में अभिनय करते कौशलेश भारद्वाज। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की विश्व रंगमंच दिवस से प्रारंभ किए गए नाट्य मेले में दूसरा नाटक कोई दुख न हो तो बकरी खरीद लो का मंचित हुआ। मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित इस नाटक में हरियाणा नाट्य विद्यालय, करनाल के कौशलेश भारद्वाज ने अपने अभिनय और निर्देशन से वाहवाही लूटी।
नाटक में बकरी खरीदने से खड़ी हुई परेशानियों को बड़े खूबसूरत ढंग से हास्य और व्यंग्य के साथ मंचित किया गया। मिलावटी दूध के कारण एक व्यक्ति अपने पड़ोसी के साथ साझा गाय रख लेता है। गोबर की बदबू के कारण गाय पड़ोसी के घर मे ही रखने पर समझौता है, लेकिन पड़ोसी इस बात का फायदा उठाकर दूध में हेराफेरी शुरू कर देता है। बाद में पंडित की सलाह से वह व्यक्ति एक बकरी खरीद लेता है और बकरी आने से उसकी मुसीबतें शुरू हो जाती हैं।
बकरी के चारे की समस्या, बेवजह चिल्लाने की समस्या, बाहर छोड़ने पर दूसरों के खेत उजाड़ने की शिकायतें और उसे चराने जाने पर होने वाली थकान उसका दिमाग खराब कर देती है और वह बकरी को एक चरवाहे को दे देता है। चरवाहा उसकी बकरी रखने के लिए हर महीने एक रुपया किराया लेने लगा। समय बीतता गया और एक दिन चरवाहा बकरी उसे लौटा देता है। बकरी के वापस आने पर उस व्यक्ति को लगता है कि यह मुसीबत मरते दम तक उसका पीछा नहीं छोड़ेगी और अंत में उसे कहना पड़ता है कि बकरी पालने के लिए कुत्ते का दिमाग चाहिए।
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कौशलेश के प्रभावशाली अभिनय तथा चुटीले संवादों का दर्शकों पर गहरा असर पड़ा। एक घंटे तक एक ही कलाकार द्वारा मंचन करना दर्शकों की वाहवाही लूटने में कामयाब रहा। इसके अतिरिक्त जीवंत संगीत नाटक को खूबसूरत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा था। इस मौके पर रंगकर्मी शुमिता रंजीत बतौर मुख्य अतिथि पहुंची। रंजीत कुमार और मनीदीपा चौधरी विशेष मेहमान के रूप में उपस्थित रहे। हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने दीप प्रज्जवलित कर नाटक प्रारंभ किया। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया।
मेले में मंचित होगा हास्य नाटक दुलारी बाई
हरियाणा कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने बताया कि 14 मई तक कला कीर्ति भवन में चलने वाले नाट्य मेले में आठ अप्रैल को हास्य नाटक दुलारी बाई का मंचन किया जाएगा। दो घंटे की अवधि के नाटक का निर्देशन अंबाला के मास्टर विनोद द्वारा किया गया है। वहीं नौ अप्रैल को रंगकर्मी व टीवी कलाकार संजीव लखनपाल के निर्देशन में नाटक जब मैं सिर्फ इक औरत हुंदी आं का मंचन किया जाएगा। नाटकों का समय सांय साढ़े छह बजे रहेगा।
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की विश्व रंगमंच दिवस से प्रारंभ किए गए नाट्य मेले में दूसरा नाटक कोई दुख न हो तो बकरी खरीद लो का मंचित हुआ। मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित इस नाटक में हरियाणा नाट्य विद्यालय, करनाल के कौशलेश भारद्वाज ने अपने अभिनय और निर्देशन से वाहवाही लूटी।
नाटक में बकरी खरीदने से खड़ी हुई परेशानियों को बड़े खूबसूरत ढंग से हास्य और व्यंग्य के साथ मंचित किया गया। मिलावटी दूध के कारण एक व्यक्ति अपने पड़ोसी के साथ साझा गाय रख लेता है। गोबर की बदबू के कारण गाय पड़ोसी के घर मे ही रखने पर समझौता है, लेकिन पड़ोसी इस बात का फायदा उठाकर दूध में हेराफेरी शुरू कर देता है। बाद में पंडित की सलाह से वह व्यक्ति एक बकरी खरीद लेता है और बकरी आने से उसकी मुसीबतें शुरू हो जाती हैं।
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बकरी के चारे की समस्या, बेवजह चिल्लाने की समस्या, बाहर छोड़ने पर दूसरों के खेत उजाड़ने की शिकायतें और उसे चराने जाने पर होने वाली थकान उसका दिमाग खराब कर देती है और वह बकरी को एक चरवाहे को दे देता है। चरवाहा उसकी बकरी रखने के लिए हर महीने एक रुपया किराया लेने लगा। समय बीतता गया और एक दिन चरवाहा बकरी उसे लौटा देता है। बकरी के वापस आने पर उस व्यक्ति को लगता है कि यह मुसीबत मरते दम तक उसका पीछा नहीं छोड़ेगी और अंत में उसे कहना पड़ता है कि बकरी पालने के लिए कुत्ते का दिमाग चाहिए।
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कौशलेश के प्रभावशाली अभिनय तथा चुटीले संवादों का दर्शकों पर गहरा असर पड़ा। एक घंटे तक एक ही कलाकार द्वारा मंचन करना दर्शकों की वाहवाही लूटने में कामयाब रहा। इसके अतिरिक्त जीवंत संगीत नाटक को खूबसूरत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा था। इस मौके पर रंगकर्मी शुमिता रंजीत बतौर मुख्य अतिथि पहुंची। रंजीत कुमार और मनीदीपा चौधरी विशेष मेहमान के रूप में उपस्थित रहे। हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने दीप प्रज्जवलित कर नाटक प्रारंभ किया। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया।
मेले में मंचित होगा हास्य नाटक दुलारी बाई
हरियाणा कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने बताया कि 14 मई तक कला कीर्ति भवन में चलने वाले नाट्य मेले में आठ अप्रैल को हास्य नाटक दुलारी बाई का मंचन किया जाएगा। दो घंटे की अवधि के नाटक का निर्देशन अंबाला के मास्टर विनोद द्वारा किया गया है। वहीं नौ अप्रैल को रंगकर्मी व टीवी कलाकार संजीव लखनपाल के निर्देशन में नाटक जब मैं सिर्फ इक औरत हुंदी आं का मंचन किया जाएगा। नाटकों का समय सांय साढ़े छह बजे रहेगा।