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Kurukshetra News: स्थानेश्वर महादेव मंदिर महाभारत काल से अनादि शिव आराधना का है केंद्र
Mon, 21 Jul 2025 06:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 21 Jul 2025 06:04 AM IST
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राजरानी
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के प्राचीन स्थानेश्वर महादेव मंदिर में सावन माह के चलते श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। रोजाना दो से ढाई हजार शिवभक्त मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिर में सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं और भक्तों को दर्शन के लिए एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।
यह मंदिर सिर्फ भक्ति का केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास और आध्यात्म का साक्षात प्रतीक है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने भी यहां शिव की पूजा की थी। यह क्षेत्र प्राचीनकाल में स्थाणु तीर्थ के नाम से विख्यात था। शास्त्रों के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने यहां स्वयं शिवलिंग की स्थापना की थी। तंत्र ग्रंथों में भी स्थानेश्वर तीर्थ का विस्तार से वर्णन मिलता है।
जग ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित बृज मोहन भार्गव ने बताया कि स्थानेश्वर महादेव मंदिर के नाम से ही वर्तमान थानेसर शहर का नामकरण हुआ है। मंदिर की छत छतरीनुमा आकृति में निर्मित है, जिसमें अद्भुत शिल्पकला देखने को मिलती है। मंदिर के सामने बना कुंड, और उसके पास से बहती सरस्वती नदी का उल्लेख भी धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से बीमारियां दूर हो जाती हैं।
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बौद्ध ग्रंथों में मिलता है प्राचीन उल्लेख
मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल से भी पूर्व का है। बौद्ध ग्रंथ महाबग्ग में थूणा नामक गांव का जिक्र आता है, जिसे बाद में स्थाणुतीर्थ के रूप में जाना गया। वामन पुराण में इसे एक अत्यंत पवित्र तीर्थ बताया गया है, जहां हजारों शिवलिंग स्थापित हैं। ग्रंथों में वर्णित है कि इनके दर्शन मात्र से पापों से मुक्ति मिलती है। यह तीर्थ वट वृक्षों से घिरा हुआ है और इसके चारों ओर अनेक धार्मिक स्थल स्थित हैं।
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भगवान स्थाणु की महिमा अनादिकाल से विद्यमान
महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत बंसी पुरी ने कहा कि यहां भगवान स्थाणु सदा विराजमान रहने वाले हैं और जीवों के कल्याण का आधार हैं। उनके अनुसार बिना भगवान स्थाणु की आराधना के कोई भी सिद्धि संभव नहीं है। स्थाणु तीर्थ में शिव की उपस्थिति अनादिकाल से मानी जाती है, और यह स्थान आज भी शिवभक्ति का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के प्राचीन स्थानेश्वर महादेव मंदिर में सावन माह के चलते श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। रोजाना दो से ढाई हजार शिवभक्त मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिर में सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं और भक्तों को दर्शन के लिए एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।
यह मंदिर सिर्फ भक्ति का केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास और आध्यात्म का साक्षात प्रतीक है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने भी यहां शिव की पूजा की थी। यह क्षेत्र प्राचीनकाल में स्थाणु तीर्थ के नाम से विख्यात था। शास्त्रों के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने यहां स्वयं शिवलिंग की स्थापना की थी। तंत्र ग्रंथों में भी स्थानेश्वर तीर्थ का विस्तार से वर्णन मिलता है।
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जग ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित बृज मोहन भार्गव ने बताया कि स्थानेश्वर महादेव मंदिर के नाम से ही वर्तमान थानेसर शहर का नामकरण हुआ है। मंदिर की छत छतरीनुमा आकृति में निर्मित है, जिसमें अद्भुत शिल्पकला देखने को मिलती है। मंदिर के सामने बना कुंड, और उसके पास से बहती सरस्वती नदी का उल्लेख भी धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से बीमारियां दूर हो जाती हैं।
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बौद्ध ग्रंथों में मिलता है प्राचीन उल्लेख
मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल से भी पूर्व का है। बौद्ध ग्रंथ महाबग्ग में थूणा नामक गांव का जिक्र आता है, जिसे बाद में स्थाणुतीर्थ के रूप में जाना गया। वामन पुराण में इसे एक अत्यंत पवित्र तीर्थ बताया गया है, जहां हजारों शिवलिंग स्थापित हैं। ग्रंथों में वर्णित है कि इनके दर्शन मात्र से पापों से मुक्ति मिलती है। यह तीर्थ वट वृक्षों से घिरा हुआ है और इसके चारों ओर अनेक धार्मिक स्थल स्थित हैं।
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भगवान स्थाणु की महिमा अनादिकाल से विद्यमान
महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत बंसी पुरी ने कहा कि यहां भगवान स्थाणु सदा विराजमान रहने वाले हैं और जीवों के कल्याण का आधार हैं। उनके अनुसार बिना भगवान स्थाणु की आराधना के कोई भी सिद्धि संभव नहीं है। स्थाणु तीर्थ में शिव की उपस्थिति अनादिकाल से मानी जाती है, और यह स्थान आज भी शिवभक्ति का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।