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श्रीदेवी कूप मां भद्रकाली मंदिर : जहां मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते है घोड़े, महाभारत काल से चली आ रही परंपरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2024 05:46 AM IST
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Sridevi Kupa Maa Bhadrakali Temple: Where devotees offer horses after the fulfillment of their vow, a tradition going on since the Mahabharata period.
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी स्थित देश के 52 शक्तिपीठों में शामिल व प्रदेश के एकमात्र श्रीदेवी कूप मां भद्रकाली मंदिर के प्रति देश ही नहीं विदेश के लोगों में भी गहरी आस्था है। यहां न केवल मन्नत का धागा बंधा जाता है बल्कि इसके पूरा होने पर मिट्टी या चांदी के घोड़े भी चढ़ाए जाते हैं। यह परंपरा महाभारत काल से चली आ रही है। राष्ट्रपति से लेकर देश की अनेक बड़ी हस्तियां भी यहां नतमस्तक हो चुकीं हैं।
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पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्री कृष्ण ने मां भद्रकाली की आराधना कर घोड़े अर्पित करने की मन्नत मांगी थी और मन्नत पूरी होने पर युद्ध के बाद अपने घोड़े मां को अर्पित किए थे। तभी से यह परंपरा मां के भक्त निभा रहे हैं। मंदिर में कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री व देश के राष्ट्रपति तक पूजा अर्चना के लिए आ चुके हैं और मन्नत पूरी होने पर मां भद्रकाली को घोड़े भी चढ़ा चुके हैं। नवरात्र के दौरान विदेशी फूलों से मंदिर परिसर को सजाया जाता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मां के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।
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यहां गिरा था मां भद्रकाली का दायां टखना
पौराणिक कथाओं के मुताबिक मां भद्रकाली शक्तिपीठ का इतिहास माता सती से जुड़ा हुआ है। जब राजा दक्ष ने सती का यज्ञ में अपमान किया तो सती अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई और स्वयं की हवन यज्ञ में आहुतियां दे दी तो भगवान शिव सती के मृत देह को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र के जरिए सती के शरीर को कई हिस्सों में बांट दिया, जिससे देवी सती के अंग पृथ्वी लोक पर कई जगहों पर गिरे और वहां-वहां पर शक्तिपीठ की स्थापना की गई। मां भद्रकाली देवीकूप में सती माता का दायां टखना गिरा था।
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इन बड़ी हस्तियों ने मन्नतें पूरी होने पर चढ़ाए घोड़े
वर्ष 2022 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू साल 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद साल 2013 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और साल 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल मंदिर में मां भद्रकाली को मन्नत पूरी होने पर घोड़े चढ़ा चुकी है। इसके अलावा गृहमंत्री अमित शाह, तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री उमा भारती, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला सहित कई राज्यों के राज्यपाल भी चांदी के घोड़े चढ़ा चुके हैं।




शोभायात्रा रहती हैं आकर्षण का केंद्र
श्री देवीकूप मां भद्रकाली की ओर से निकाली जाने वाली शोभायात्रा भी काफी आकर्षण का केंद्र रहती है। इस शोभायात्रा के दौरान 5100 कलशधारी महिलाएं शोभायात्रा की अगुवाई करती हैं और 500 झंडे, 52 शक्ति पीठों के 52 चांदी के त्रिशूल, 11 गोल ध्वज पताका, 52 विशेष जय मां छतरियां भी आकर्षण का केंद्र रहती हैं, जिसे देखकर हर कोई हैरान नजर आता है।





घोड़े चढ़ाने की प्राचीन परंपरा : सतपाल शर्मा
पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि मां के भक्त मंदिर में मन्नत मांगते है और मन्नत पूरी होने पर श्रद्धा अनुसार सोने चांदी, मिट्टी, चीनी मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। इससे मां भद्रकाली प्रसन्न होती हैं। मंदिर में घोड़े चढ़ाने की परंपरा महाभारत के समय से है। शास्त्रों के मुताबिक श्री कृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार भी मंदिर में हुआ था। यह मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में से प्रदेश का एकमात्र शक्तिपीठ है। मां भद्रकाली के दर्शन करने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी आते हैं।
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