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Kurukshetra News: चेक बाउंस मामलों में दो दोषियों को मिली राहत, अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित
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कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराए गए अपीलकर्ताओं को राहत देते हुए उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत ने दोनों मामलों में अपीलों को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए दोषियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
अवकाशकालीन न्यायाधीश एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महावीर सिंह की अदालत में बलवंत सिंह बनाम श्री राम ट्रांसपोर्ट तथा एक महिला बनाम राजेश कुमार मंगला मामलों की सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों अपीलों में उठाए गए कानूनी बिंदुओं को विचारणीय मानते हुए उन्हें नियमित सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।
सुनवाई के दौरान दोनों अपीलकर्ताओं की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 430 के तहत सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की गई। अदालत को बताया गया कि संबंधित ट्रायल कोर्ट पहले ही सीमित अवधि के लिए दोनों दोषियों को राहत प्रदान कर चुकी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपीलों का अंतिम निस्तारण निकट भविष्य में संभव नहीं है और मामलों की सुनवाई में समय लग सकता है। ऐसे में अपीलकर्ताओं को अंतरिम राहत देना उचित है। अदालत ने दोनों मामलों में दोषियों की सजा को निलंबित करते हुए 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के एक-एक जमानती के आधार पर जमानत देने के आदेश जारी किए।
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मुआवजा राशि के 20 प्रतिशत भुगतान पर होगी अलग सुनवाई
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों मामलों में मुआवजा राशि के 20 प्रतिशत हिस्से को जमा कराने के प्रश्न पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अपीलीय अदालत के लिए यह जांचना आवश्यक है कि मामला उन अपवादात्मक परिस्थितियों में आता है या नहीं, जहां जमा राशि की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले संबंधित प्रतिवादियों का पक्ष सुनना आवश्यक है। इसके लिए दोनों मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं।
अगस्त में होगी अगली सुनवाई
अदालत ने बलवंत सिंह के मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 तथा महिला के मामले में 17 अगस्त निर्धारित की है। इन तिथियों पर अदालत यह विचार करेगी कि क्या अपीलकर्ताओं को मुआवजा राशि के 20 प्रतिशत हिस्से के भुगतान की शर्त से छूट दी जा सकती है। दोनों मामलों में अदालत ने अपने आदेश की प्रतियां संबंधित ट्रायल कोर्ट को आवश्यक कार्रवाई और अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश भी जारी किए हैं।
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अवकाशकालीन न्यायाधीश एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महावीर सिंह की अदालत में बलवंत सिंह बनाम श्री राम ट्रांसपोर्ट तथा एक महिला बनाम राजेश कुमार मंगला मामलों की सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों अपीलों में उठाए गए कानूनी बिंदुओं को विचारणीय मानते हुए उन्हें नियमित सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।
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सुनवाई के दौरान दोनों अपीलकर्ताओं की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 430 के तहत सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की गई। अदालत को बताया गया कि संबंधित ट्रायल कोर्ट पहले ही सीमित अवधि के लिए दोनों दोषियों को राहत प्रदान कर चुकी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अपीलों का अंतिम निस्तारण निकट भविष्य में संभव नहीं है और मामलों की सुनवाई में समय लग सकता है। ऐसे में अपीलकर्ताओं को अंतरिम राहत देना उचित है। अदालत ने दोनों मामलों में दोषियों की सजा को निलंबित करते हुए 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के एक-एक जमानती के आधार पर जमानत देने के आदेश जारी किए।
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मुआवजा राशि के 20 प्रतिशत भुगतान पर होगी अलग सुनवाई
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों मामलों में मुआवजा राशि के 20 प्रतिशत हिस्से को जमा कराने के प्रश्न पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अपीलीय अदालत के लिए यह जांचना आवश्यक है कि मामला उन अपवादात्मक परिस्थितियों में आता है या नहीं, जहां जमा राशि की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले संबंधित प्रतिवादियों का पक्ष सुनना आवश्यक है। इसके लिए दोनों मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं।
अगस्त में होगी अगली सुनवाई
अदालत ने बलवंत सिंह के मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 तथा महिला के मामले में 17 अगस्त निर्धारित की है। इन तिथियों पर अदालत यह विचार करेगी कि क्या अपीलकर्ताओं को मुआवजा राशि के 20 प्रतिशत हिस्से के भुगतान की शर्त से छूट दी जा सकती है। दोनों मामलों में अदालत ने अपने आदेश की प्रतियां संबंधित ट्रायल कोर्ट को आवश्यक कार्रवाई और अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश भी जारी किए हैं।